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पहली उड़ान है सपनो की

जबसे उसने हथेली में  उगा चाँद देखा है मैंने उसकी आँखों में उभरता अरमान देखा है निकली है पहली बार वो तनहा सफ़र पर नाजुक परो ने उसके विस्तृत आसमान देखा है पहली उड़ान है सपनो कीसाथ दुआए है अपनों की माँ  की आँखों में आज सुकून और
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जब कविता रचनी होती है

जब कविता रचनी होती है मत पूछो क्या क्या करते है हर लम्हा हर पल हम किस वेदना** से गुज़रते है भावो से मिलते शब्द चुने लय गति के संयोजन से तुक मिला मिला कर गीत बुने सार्थक रचने के प्रयोजन सेकभी लगा पहली पंक्ति हलकी अंतिम वाली भारी है माध्यम पंक्ति स्वयं बन
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दिल में उतर रही हूँ मैं

कितना संभल कर चल रही हूँ मैं फिर भी ना जाने क्यों फिसल रही हूँ मैं आइना हर रोज़ दिखता है निशाँ नए इस कदर ना जाने क्यों बदल रही हूँ मैं जब से चढ़ी है नज़र में खुमारी किसी के दिल में उतर रही हूँ मैं कल सरी महफ़िल शमा कतरा गई मुझसे या खुदा इस कदर निखर रही हूँ
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प्रेम के क्षण (१)

१ काँप गई आलिंगन में उन्मुक्तता है इस बंधन में पंख लगे है धडकनों को उबरू कैसे इस उलझन से २ कितने मादक कितने मोहक नैन तुम्हारे मौन में भी कितने मुखर नैन तुम्हारेइन नैनो ने विकल किया ये तो सोये पर जागे रात रात भर नैन हमारे ३ दिन-ब-दिन तुम चढ़ रहे हो
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हर रंग में छांट लूं ...

चलो एहसासों को दुपट्टे में बाँध लूं तुम्हारी छुअन को किनारी सा टांक लूं लिपटे जो मुझसे तो तुम नज़र आओ काँधे से फिसलो तोबाँहों में उतर जाओ दांतों तले दबा लूं तो हया से लगो ऐसे बनो मेरा हिस्सा कभी न जुदा से लगो इतने रंग भर दो के अम्बर को बाँट दूं दुपट्टे की
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तुमको याद ना हो

बहुत मुमकिन है तुमको याद ना हो तुम्हारी डायरी के इक्किस्वे पन्ने पर एक सूखा गुडहल जो तुमने अपने हांथो से लगाया था मेरे जूडे में फिर मान के निशानी दबा दिया डायरी में उसकी साँसे कल तक बाकि थी आज ही दम तोडा है अपने रिश्ते के साथ अब शायद मुझको भी दफ़न कर दोगे
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इनकार करती हूँ

चलो तुमको यकीं तो हुआ कि मैं इसमें तनहा मुजरिम नहीं थीकुछ हालत थे कुछ मजबूरी थी बेवफाई मेरी फितरत में शामिल नहीं थी चाहती तो पहले भी बता सकती थी तुम्हे अपनी मजबूरी कि भी लम्बी कहानी थी पर तब शायद तुमको यकीं नहीं आता मेरी बेगुनाही ज़माने पर ज़ाहिर नहीं थी
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ज़िन्दगी रुकी क्यों है !

कल खुदा से मेरी मुलाक़ात हुई पता नहीं उसकी सूरत मेरे सनम सी क्यों थी चेहरा तो रोशन चिराग सा था आँखों के कोनों में नमी सी क्यों थी वो करता रहा मुझसे बात और मेरे दर्द भी बांटता रहा जो भी कहा सुना उसने गौर से मेरे दिल में भी झाकता रहा गर उस्सने नहीं है कोई
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एक सपना

मैंने देखा है एक सपना , प्यारा सा सपना , जिसमे है सिर्फ मैं और मेरी दुनिया , मेरी दुनिया कि छोटी - छोटी खुशियाँ , फूलों की रंगिनिया , खुशबू भरी कलियाँ , समेट लेना चाहता हूँ मैं , सभी सुखो कि अनुभूतियों को , सारे जहाँ के प्यार भरी मुस्कान को , पर क्या