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धर्मनिरपेक्षता के अंतर्विरोध- 3

हिंदुत्व, शंबूक और पिघला हुआ शीशा... परंपरा के नाम पर गंदगी जमा करने वाले लोग यह समझते है कि उनके अलावे और किसी के पास ऐसी स्वस्थ परंपरा हो ही नहीं सकती। हिंदुओं का खयाल है कि उनकी परंपरा प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष ही रही है। बात अगर वेद के जमाने से श
 
राजू रंजन
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भागलपुर में दंगा पीड़ितों को मदद----एक ऐतिहासिक क़दम

शेषनारायण सिंह बीस साल पहले जब भागलपुर में दंगे हुए थे तो पूरे देश में आतंक फ़ैल गया था. मुसलमानों को चुन चुन कर मारा गया था. आर एस एस ने यह साबित करने की कोशिश की थी कि उनकी मनमानी को कोई नहीं रोक सकता. बाबरी मस्जिद के खिलाफ फासिस्ट ताक़तें लामबंद हो
 
Shesh Narain Singh
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पूंजीवादी साम्राज्यवादी शोषक वर्ग के निशाने पर आदिवासी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि आदिवासियों का विकास बंदूक के साये में नहीं किया जा सकता। यह बात बहुत ही अजीब है। सवाल उठता है कि क्या आदिवासी इलाकों के लोग शुरू से ही बंदूक लेकर घूमते रहते थे। आजादी के बाद उन्होंने 50 से भी अधिक वर्षों तक इंतजा
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काबिल पुरखों की तलाश में संघ परिवार

आर.एस.एस. वालों ने एक बार फिर योग्य पूर्वजों की तलाश का काम शुरू कर दिया है। करीब 29 साल पहले गांधी को अपनाने की कोशिश के नाकाम रहने के बाद उस प्रोजेक्ट को दफन कर दिया गया था लेकिन चारों तरफ से नाकाम रहने पर एक बार फिर महात्मा गांधी को अपनाने की जुगत
 
Shesh Narain Singh
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अब क्या करेगी बी जे पी

आर एस एस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उसके मुखिया मोहनराव भागवत ने कह दिया कि संघ के कैडर अपने हिसाब से इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि उन्हें किस पार्टी को वोट देना है . उन्होंने साफ किया कि ज़रूरी नहीं के संघ के सदस्य केवल बी जे पी को ही वोट
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पाकिस्तान के बिना बी जे पी का क्या होगा

बी जे पी की राजनीति का एक और प्रमुख स्तम्भ ढहने वाला है...लगता है कि पाकिस्तान पर भी अब वोटों की खेती नहीं हो पायेगी. अयोध्या विवाद पर तो अब वोट की खेती नहीं हो सकती और बोफोर्स का मुद्दा भी अब दफ़न हो गया है . उसके सहारे बी जे पी जैसी भावनाओं पर राजन