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हिंदी डे के ग्रेट ऒकेज़न पर आपसे रिक्वेस्ट

आपमें से कई ब्लॊगर्स जानते ही होंगे कि कल हिंदी डे था.कल वैसे मैं ज़्यादा ही बीज़ी था , क्योंकि एक दम से मुझे भी फ़ीवर आ गया था.ऊपर से मेरे दोनों लेपटॊप मेंटेनेंस में,याने करेला और नीम चढा. मगर आई लव हिंदी, इसलिये मेरी बडी डिज़ायर थी कि हिंदी पर कुछ
 
दिलीप कवठेकर
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कौन कहता है बाजार हिंदी को बिगाड़ रहा है!

जो हिंदी भाषा के विकास पर शंका और क्षोभ जताते हैं, उनके ज्ञान के दयारे सीमित हैं। वे बंद आंखों से दुनिया और भाषा का आंकलन करते हैं। दुनिया में जितने और जहां-जहां भी परिवर्तन हो रहे हैं, उनके लिए वे सभी बेमानी हैं। वे दुनिया को बदलते इसलिए देखना नहीं
 
अंशुमाली रस्तोगी