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सावन रीता .....बीतत जाए ...!!!!!
छाई चहुँ ओर घोर- घोर --घन घटा निराली --काली काली ॥उमड़ घुमड़ कर --गरज -गरज करबरस पड़ेंगे घनघोर -मृत्यु के बादल -जाने किस पल किस पर.......?क्षणभंगुर जीवन ..........!!!!!!!भोला मानुस उछल पडा -मौसम मनमोहक देख कर -काले बादल को देख कर -सावन की थी छटा निराली
Jun 17 2010 05:48 PM



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