पसंद करें
0
नापसंद करें

सावन रीता .....बीतत जाए ...!!!!!

छाई चहुँ ओर घोर- घोर --घन घटा निराली --काली काली ॥उमड़ घुमड़ कर --गरज -गरज करबरस पड़ेंगे घनघोर -मृत्यु के बादल -जाने किस पल किस पर.......?क्षणभंगुर जीवन ..........!!!!!!!भोला मानुस उछल पडा -मौसम मनमोहक देख कर -काले बादल को देख कर -सावन की थी छटा निराली
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
0
नापसंद करें

सुकृती----पहचान मेरी

देखती थी आइना फिर सोचती थीकौन हूँ मैं ..?क्या करूँ मैं ....?कुछ करूँ मैं...... कुछ बनूँ मैं .....!!कुछ बने पहचान मेरी ......!खिली -खिली मन की बगिया -तितली बन जाऊं .....?अद्भुत सुंदर जीवन ....!!!!फिर भी चैन न पाऊँ ।सांझ ढले मंदिर का दीपकरोज़ जलाऊँ
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
0
नापसंद करें

जीवन -ज्योत बनी पहचान

जीवन पथ पर--कितना रोका जग ने मुझको -रुक न पाई--मैं अलबेली झूम -झूम के -नाची गई जीवन की ऋतू बदल बदल कर चलती जाती -कभी हवा फिर कभी धूप-पर मैं मुस्काती !!!!गाने की इच्छा ज्यों बढ़तीजीवन की लौ आंचपकडती -वहीदिया था मन का मेरा जलता जाता जीवन ज्योत जलाता जाता
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
1
नापसंद करें

सपनो से है प्यार मुझे

पूछ रही थी -मैं सपनों से-रोज़ -रोज़ ये क्यों दिखाते हो ?क्यों आते हो रोज़ -रोज़ ये ....मुझे सताने ???फिर देखे ये नन्हे नन्हे कोमल कोमल -पौधे जैसे छोटे छोटे --कब से मन में थे जो मेरे ---कब उपजे थे ...........????जब उपजे थे ---अब फूटे हैं !!!!!खुश हो सोचा
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
0
नापसंद करें

सच के नाम पर सजा झूठ-हिन्दी शायरी

हिन्दी साहित्य,समाज,मनोरंजन,मस्ती,संदेश,hindi shaitya,sher,shतमाम रस्में निभाकर भी हम क्या पाते हैं, पुराने बयान पर आंखें बंद कर यकीन के साथ यूं ही जिंदगी में चले जाते हैं। इंसानों की सोच पर बंधन डाले हैं सर्वशक्तिमान के संदेश की किताबें लिखने वालों ने
 
दीपक भारतदीप
पसंद करें
0
नापसंद करें

तू क्यूँ नहीं ?

तू इतनी दूर क्यूँ? रात को हर राज बताता रहा में, तुमसे आपने आप को छुपता रहा में| तू इतनी दूर क्यूँ ? तेरे इंतज़ार को जिंदगी मानता रहा में, तुमसे आपना तन्हाई छुपता रहा में| तू इतनी दूर क्यूँ ? ख्यालों को सच मान जीता रहा में, तुमसे आपना प्यार
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

मन की सरिता

मन की सरिता है ,भीतर बहुत कुछ संजोय हुए ,कुछ कंकर कुछ पत्थर कुछ सीप कुछ रेत,कुछ पल शांत स्थिर तो कुछ पल तेज ,मन की सरिता है ,कभी ठहरी ठहरी रुकी रुकीनिर्मल दिशाहीन सीकभी लहर -लहर लहरातीचपल -चपल चपला सीमन की सरिता हैफिर आवेग जो आ जाये ,धारा फिर जो बह जाए
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
0
नापसंद करें

पलट गए पन्ने

पलट गए पन्ने -आगे बढ चला जीवन -जैसे रेत पर बने पैरों के निशान मेरे -पलट कर देखती हूँ सोचती हूँ -क्या दिया क्या लिया ....-क्या कुछ छाप छोड़ी ?क्या पलभर भी कोई मुझे याद रख पायेगा ?या सदियों से आ रही परंपरा कायम रह जायेगी -विस्मृत सी पड़ जायेगी मेरी स्मृति
 
anupama's sukrity !
पसंद करें
0
नापसंद करें

असली और नकली जांबाज-हिन्दी शायरी

मैदान पर लड़ते कम किनारे पर खड़े दिखाते दम कागजी जांबाजो के करतब कभी अंजाम पर नहीं पहुंचे पर हर पल उनको अपनी आस्तीने ऊपर करते हमने देखा है। कीर्तिमान बहुत सुनते हैं उनके पर कामयाबी के नाम पर खाली लेखा है। ———- पत्र प्रारूप पर हाशिए पर नाम
 
दीपक भारतदीप
पसंद करें
0
नापसंद करें

नैतिकता की बात-हिन्दी व्यंग्य कविता

आपस में जाम टकराते हुए लोग नैतिकता की बात करने लग जाते हैं, फिर सुनाते हैं अपनी कमाई के नुस्खे जैसे दो नंबर की कमाई एक नंबर की हो सीना फुलाकर उसकी कहानी सुनाते है।। बहुत अच्छा लगता है आदर्श और नैतिकता की बात करते हुए बशर्त है आदमी स्वयं से छिप सकता
 
दीपक भारतदीप
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिंदगी रूठ रही है हमसे

लगता है जिंदगी रूठ रही है हमसेन तनहाई भांती है, न गम सताता है...या शायद मैने पा लिया है तुमको?
पसंद करें
0
नापसंद करें

जीना सभी चाहते

आपकी तारीफ में क्या लिखों, आखों की कसीस इतनी, देखते ही महफ़िल मदहोश हुआ है! यहाँ जीना सभी चाहते, इस सुन्दरता पे… मरे बिना रहा नहीं जाता! -प्रवीण
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरी श्रृधा

मन में गहरी श्रृधा को लेकर, पहुंची थी मैं गंगा के तट पर, पर !खुशी नहीं हुई मुझे, वहां पहली बार जाकर, एक पीड़ा उभर आई होठों पर आंखों पर, रोके न रूक रही थी वो पीड़ी, टपक टपक कर सबको बता रही थी दुख मेरा, देखा मैंने, अनेक श्रृधाओं को,डूबते और तैरते, व्‍य
पसंद करें
0
नापसंद करें

नहीं जानते …

प्यार क्या है! वो नहीं जानते … हर मुस्कुराहट को ख़ुशी समझे लेते है ! प्यार क्या है! हम नहीं जानते … उनकी हर अदा को पैगाम समझे लेते है ! - प्रवीण
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

पक्ष विपक्ष

पक्ष: चुनाव हुआ. नयी सरकार बनी. सरकार धर्मनिरपेक्ष है. आरक्षण के पक्ष में है, गरीबो के बारे में सोचती है, सब को सामान अवसर देती है!! विपक्ष: कार्यकारिणी की बैठक हुई, प्रेस से बातचीत हुई. हारे तू क्या हुआ फिर से खड़े होंगे, रचनात्मक विपक्ष की भूमिका म
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिंदिगी गुलिस्ताँ भी है

जिंदिगी सुर्ख रेत की तरह थी, आपके स्पर्श से जाना जिंदिगी गुलिस्ताँ भी है.   जब हम आपनी ही यादों में तनहां थे, पल पल ज़िन्दगी सवाली थी, आपके प्यार से जाना जिंदिगी गुलिस्ताँ भी है. -प्रवीण
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

तुम याद आई इतना

जिंदिगी का हर पल , सदियों में बदल गया, तुम याद आई इतना ! एक बूंद की प्यास में, मैं सागर पी गया, तुम याद आई इतना ! -प्रवीण
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

आपकी जुल्फों

ये आपकी बिखरी जुल्फ की ख़ता है, हम नहीं जानते ! ये मेरा दिल भी धराकता है, हम इतना जानते है! ये आपकी खुली जुल्फ की कशिस है, हम नहीं जानते ! ये हवाएं आज बईमान है, हम इतना जानते है ! ये आपकी घनी जुल्फ की छाया है, हम नहीं जानते! ये रेशमी रात है, हम इतना
 
प्रवीण
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरे दिन रात

दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चिलमन मैं, मैं खो जाता हूँ! हमारी सुबह तू तब होती है जब आपके लब हमारे लब पे आते है! रात बीतती है जब आपकी बाहों में, तब सुबह का अहसास होता है! हर रात जो
 
प्रवीण