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बुद्धि मुझे दो शारदा

बुद्धि मुझे दो शारदा, सदन शीघ्र बन जाय ।कर पूरण स्वर-साधना, देऊ तुझे बिठाय ।।देऊ तुझे बिठाय, विराजो मेरे घर में ।ऐसे गीत लिखाय , हो अंतस में प्रकाश ।।कह `वाणी` कविराज, चित्त में शुध्दी मुझे दो |रचूं कुंडली शतक , मात सदबुद्धि मुझे दो || शब्दार्थ :
 
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आखिर, आज तुम आ ही गए...

"आखिर... आज... इतने दिनों का इंतज़ार ख़त्म हो ही गया...आखिर... आज, तुम आ ही गए...न जाने कितना इंतज़ार करना पड़ा था इस दिन का... लगता था कि न जाने तुम आओगे भी या नहीं...रोज़ T.V. पर खबरें सुनते थे, और रोज़ तुम्हारे आने का इंतज़ार करते थे... तुम्हारे आने, न
 
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वो सुबह की एक प्याली चाय....

हमारे देश के ; न कहा जाये तो; लग-भग 80% लोगों के दिन कि शुरुआत एक जैसी ही होती है, चाय से... रोज़ सुबह लग-भग हर घर का हर बड़ा, आँख खुलने के बाद यही चिल्लाता सुने देता है... "अरे, कोई एक कप चाय दे दो..." कहें तो... कहानी कहानी घर की...हाँ, पर पसंद अलग-अलग
 
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हिंदी समुदाय यानी...

शीर्षक में 'यानी' के बाद आप कुछ भी जोड़ सकते/सकती हैं - गुलाम मानसिकता के शिकार लोगों का समूह, पस्त होने के बाद तटस्थ हो जाने वालों का समूह, ऐसा समुदाय जिसके नायक या तो भूख से मरते हैं या उपेक्षा से, ऐसे लोगों का समूह जो अपनी पहचान भूल चुका है...।
 
सुयश सुप्रभ Suyash Suprabh
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काश ज़िंदगी में भी रिवर्स गेयर होता...

कार, जीप या और कोई वाहन... आज हमारी ज़िन्दगी का बहुत ही ज़रूरी अंग... स्कूल, ऑफिस, बाज़ार, या किसी रिश्तेदार के घर ज़रुरत किसी-न-किसी वाहन की ही पड़ती है, और पड़े भी क्यों न, आजकल सब-कुछ इतनी दूरी पर जो हो गया है...तो कुल मिलकर आप सभी किसी-न-किसी वाहन का
 
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महानता के शिखर-हिन्दी शायरी

चाहने से सभी महान नहीं बन जाते हैं, आकाश छूने की कोशिश में कई लोग जमीन पर आकर गिर जाते हैं। जिन्होंने जमीन पर चलते हुए पत्थरों की आवाज को भी सुना है, कांटो के साथ भी दोस्ती को चुना है, चलते चलते पड़े छाले जिनके पांव में, लालच की खातिर पकड़ा नहीं रास्ता बड़े
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हिंदी ब्लोगिंग

मैंने ब्लॉग्गिंग की शुरुआत 2006 में की थी. उस समय नारद नामक संकलक हुआ करता था. मैंने ब्लोगिंग की शुरुआत हिंदी भाषा में ही की थी. कुछ भी लिखते थे, नारद पर अपने आप प्रकाशित हो जाता था. बड़ा मज़ा आता था. लिखो और नारद पर छापो. तब गिनती के हिंदी ब्लोगर हुआ
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ये है हिंदी के दुश्मन.....

जयपुर में धमाका...केरला में मानसून आया...दसवीं में ८० फीसदी पास...ये कुछ उदाहरण है जो मैंने पिछले दिनों कई टी वी चेनलों पर देखे...!आज बहुत से अन्य भाषी शब्दों को हिंदी में अपना लिया गया है!आज के लोग जिस हिंदी अंग्रेजी मिश्रित भाषा का उपयोग करते है,उसे
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अभी-भी...

बातें...कुछ कही कुछ अनकही, कुछ गलत कुछ सहीकुछ नई कुछ पुरानी, कभी तुम्हारी कभी हमारी...पल...कुछ साथ कुछ अकेले, कुछ सवाँरे कुछ सहेजेकुछ जिये कुछ खो दिए, कभी हँसे कभी रो दिएज़िन्दगी...कभी ख़ुशी कभी ग़म, कभी हम कभी तुमकभी होंठ खिले कभी आँखे नम, कभी मिली तो
 
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काली कारतूत पर साधुता की संज्ञा लिखाते-हिन्दी व्यंग्य कविता

शौहरत के शिखर पर वह बैठे हैं नीचे आने से उनको डर लगता है, उनके ऊंचे इंसान होने का वहम बना हुआ है लोगों में नीचे आने पर अपने बौने चरित्र की पहचान होने से उनका दिल घबड़ाने लगता है। ———- साधु ही हमेशा मौन की राह नहीं अपनाते, कसूरवार भी उसकी
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कुछ बातें ऐसे ही

पिछले कुछ दिन मैं पटना में था, मेरी बहन की सगाई थी, इसलिए थोडा ब्लॉग पे वक़्त नहीं दे पा रहा था.सगाई के बाद भी मुझे वक़्त नहीं मिल पाया सही से ऑनलाइन आने का.2-3 दिन पहले अपने इ-मेल पे लोगिन किया तो मेरे कुछ ब्लॉगर मित्र के इ-मेल इन्बोक्स में थे..सबकी
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हमें गर्व है हिंदी के इस प्रहरी पर ....

कुसुम कुमार, अरविंद कुमार .........मोनिअर-विलियम्स के ज़माने में अँगरेज भारत पर राज करने के लिए हमारी संस्कृति और भाषाओं को पूरी तरह समझना चाहते थे, इस लिए उन्हों ने ऐसे कई कोश बनवाए. आज हम अँगरेजी सीख कर सारे संसार का ज्ञान पाना चाहते हैं तो हम अँगरेजी
 
रवीन्द्र प्रभात
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अपने घर में दें प्रमाण!

         अ  आ इ ई उ ऊ ए ई ओ औ अं अः  ( मैं राष्ट्र भाषा हूँ) जिस घर में हम रहते हैं, जिस घर में हम पैदा हुए और जिस घर की पहचान हमसे बनी हो - वही घर कहे  कि  मैं इस बात का प्रमाण पेश करूँ कि मैं
 
रेखा श्रीवास्तव
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समाचार...

समाचार... NEWS{North East West South}खबरें... आजू-बाजू की, अडोस-पड़ोस की, गली-मोहल्ले की, गाँव-शहरों की, जिले-राज्य की, देश-विदेश की...ढेर साड़ी खबरें... यानी खबरों का पुलिंदा...याद करो... जब किसी से मिलते हैं, या फ़ोन करते हैं... सवाल:- "और क्या हाल
 
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कुछ अश्क़...

कुछ अश्क़ बहे यहाँ आने से पहले...कुछ बहेंगे यहाँ से जाने के बाद...उन अश्को में समाया था डर,इन पर होगा यादों का ताज...डर था,इस दुनिया में आने का, इसे जानने का, समझने काइसे पहचानने का...और यादें रह जांएँगीउन रिश्तों की,जो जाने-अन्जाने बस यूँ ही बन जाते
 
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चलो थोड़े स्वार्थी हो जांए...

आज की इस दुनिया में और इस life style में इतने busy हो गए हैं की हमारे पास अपने लिए ही वक़्त नहीं रह गया है... जिसे देखो बस भाग रहा है या एक fixed life जी रहा है, सब कुछ time-table के हिसाब से... जिंदगी न होकर train हो गयी है, चढ़ा दिया पटरी पर, और
 
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कल के अन्जाने...

कल के अन्जाने, आज अपने से लगने लगे...कल तक नाम नहीं जानते थे एक-दूसरे काआज देखो तोनज़रें भी पहचानने लगे...कल तक ये सुर्ख हवाएँअन्जानी थीं मुझसे,आज ये मौसम भी अपना सा लगता है...कल तक डरता था दिल यहाँ आने से...आज,यहीं ठहर जाने को मन करता है...
 
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हिंदी का कवि होगा..

बड़ा भेड़ होगा हिंदी का कवि होगालहकेगा, तीन पत्‍ते की डाल के पीछेबहकेगा, जाने कौन नैतिकता की रासहोगी (रास माने रस्‍सी) कि भाषा की खासनाद से बंधे होंगे, उसी में फुत्‍कारेंगे, दुमझारेंगे, जैसे रेलवे की रिर्जव सीट है उससेहट नहीं सकते, किसी भी सूरत में वाक़ई
 
Pramod Singh
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एक्स्ट्रा क्लास

बस्ता उठा टिंकू चला , चार चोराहे पार |थक कर जब स्कूल पहुंचा , पता लगा रविवार ||पता लगा रविवार , नहीं बजेगा घंटा घंटी |पड़ेगी घर पर मार  , नहीं कल की गारंटी ||फिर चलाया दिमाग , मम्मी करनी कक्षा  पास |जाना   हर रविवार , चलेगी अब 
 
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आज का आदमी

आज का आदमीअपनी गरीबी के कारणबहुत कमऔरपडोसियों की तरक्की से बहुत ज्यादा दुखी हैअमृत 'वाणी'
 
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नुक्ते पर नुक्ताचीनी

हिंदी में नुक्ते का सवाल थोड़ा उलझा हुआ है। आप नुक्ते का चाहे जैसा प्रयोग करें, आपकी भाषा पर नुक्ताचीनी करने वाले लोग मिल ही जाएँगे।एक सज्जन ने हिंदी में नुक्ते का प्रयोग करना बंद कर दिया। लोगों ने उनकी भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नुक्ते के प्रयोग के
 
सुयश सुप्रभ Suyash Suprabh
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महान विलियम शेक्‍सपीयर की एक कहानी

उपाय के लिए उपायऔर सदियों पहले से मैं कहना, वियना के लोगों को भी mildly नियंत्रित थे परवाह है. दुखी किया कारण था कि राज ड्यूक Vicentio जरूरत से ज्यादा अच्छे स्वभाव का था, और नापसंद को अपराधियों देखते हैं. परिणाम था कि की संख्या बुरा वियना में व्यक्तियों
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तोते

तोतेएक सुबह के भूखे तोतेशाम के सूर्यास्त को देख करमेरी सो साल कीभाविस्य्वानी न करोसामने के चोराहे को देख करबस इतना सा बताओकी घर लोतुन्गाया हास्पिटलया सीधा मगघटवहांएक तोता और हेमेरे मोहल्ले में वहा बता देगामुझे कल का भविष्य |
 
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बहरे कई प्रकार के

बहरे      कई   प्रकार   के,    भांत -     भांत   के लाभ |जब तक काम पड़े  नहीं, तब तक लाभ ही लाभ ||तब तक लाभ ही लाभ ,  चिल्ला कर वक्ता  कहे |मन मन
 
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चवन्नी और अठन्नी

आज कलजहाँ देखो वहाँकई मितव्ययी दांतपराई अठन्नी को भीइतनी जोर से दबाते हैंकिबेचारी अठन्नीदबती - दबती चवन्नी बन जातीजब भीवह खोटी चवन्नी निकलतीइतनी तेज गति से निकलतीकि उन कंजूस सेठों का जबड़ा हीबाहर निकल जाताऔरइस एक ही झटके में शरीर कीनस नस की बरसों
 
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गुनाह

गुनाहों की दुनिया मेंह्महर गुनाह से बचते रहेइसीलिए  कि हमारेनन्हें  मासूम बच्चे हैंमगरबेगुनाह होना हीकितना  बड़ा गुनाह  हो  गयाकिआज कल गुनहगारों की बस्ती मेंबेगुनाहों  के  घरसरे आम तबाह हो रहें  |
 
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सांप हमें क्या काटेंगे !!

सांप हमें क्या काटेंगेहमारे जहर सेवे बेमौत  मरे जायेंगेअगर हमको काटेंगे ?कान खोल कर सुनलोविषैले   सांपोवंश समूल नष्ट  हो जायेगाजिस दिन हम तुमको काटेंगेक्योंक्योंकिहम आस्तीन के सांप हे |अमृत 'वाणी'
 
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बेचारी हिन्दी ... ये वो थाली है जिसमें लोग खाते हैं और फिर उसी में छेद करते हैं

अंग्रेजी के 26 अक्षर तो रटे हुए हैं आपको, पूछने पर तत्काल बता देंगे। किन्तु यदि मैं पूछूँ कि हिन्दी के बावन अक्षर आते हैं आपको तो क्या जवाब होगा आपका? अधिकतर लोगों को यह भी नहीं पता कि अनुस्वार, चन्द्रबिंदु और विसर्ग क्या होते हैं। हिन्दी के पूर्णविराम
 
जी.के. अवधिया
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अब हमको देना वोट

महंगाई की मार पड़ी , दिया कमर को तोड़ |हो गए हम विकलांग सभी , खड़े हैं  सब हाथ जोड़ ||खड़े हें सब हाथ जोड़ , कौन  पूंछे हाल हमारे |साथी सब गये छोड़ , दूर बहुत हैं किनारे ||मंत्री जी समझाए , दिया उनको तुमने वोट |नहीं रहे कमर एसी अब  हमको देना
 
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हर इंसा की जिंदगी में

हर इंसा की जिंदगी में                           कम से कम एक बार
 
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भोजन की मात्रा

भोजन की उतनी ही मात्रा अमृत के समान  है, जिसे ग्रहण करने के बाद आप को,किसी भी कार्य में बाधा उत्पन्न  नहीं होय |
 
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कैसे भला होगा हिंदी का

सरकार का राजभाषा विभाग और उसके माध्यम से अधिकांश सरकारी विभागों-निकायों यहां तक कि बैंकों में भी सूचना पट्टï टंगे दिखाई पड़ते हैं कि यदि आप हिंदी में कार्य करेंगे तो हमें प्रसन्नता होगी। हिंदी में काम करने और करवाने के लिए प्रेरणा। शब्दों और शब्द
 
सुभाष चन्द्र
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सबसे बड़ा दुःख

आता है अचानक दौड़ता हुआ सबसे बड़ा दुःख जो कुछ ही समय में एक ही सवाल से सबका इम्तिहान लेकर चला जाता है आहिस्ता-आहिस्ता जिन्दगी की छोटी सी किताब में अपने ही हाथों से वो एक नया पाठ लिख कर जाता है जिसमें बिना किसी पक्षपात के साफ-साफ कई नाम लिखे होते हैं जैसे
 
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आतंकी घाटियां

आतंकी घाटियॉंऔर रेगिस्तानइन दोनों मेंकेवलदो ही अंतर खास है ।पहला अंतररेगिस्तान मेंपानीखून की तरहां बहता हैऔर आतंकी घाटियों मेंखूनपानी की तरहां बहता है ।।दूसरा अंतररेगिस्तान मेंआदमी की मौत के लिएयह बहुत जरूरीकिवह दिखने में गुनहगार होकिन्तुआतंकी घाटियों
 
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वें हजारों बार जीए

शहरों में कई लोगइसलिए मर रहेंकिउन्हें जीना नहीं आयाऔर कई लोगमहजइसीलिए जी रहें किउन्हें मौत नहीं आ रही ।बचे हुए लोगरो रहेकुछ उनके वास्तेजो बेमौत मर गएकुछ उनके वास्तेजोन जाने कब मरेंगे ।चंद भले लोगचंद भले लोगों के लिएरोजदुआएं कर रहे हैंहे प्रभु !वें हजारों
 
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धोती-जब्बा पगड़ी

धोती-जब्बा-पगड़ीमाथे पर तिलक और चोटीगले में मालाराम-नाम का दुषालागायों को चराने के लिएलूटेरों को डराने के लिएहाथ में लठयह सब कुछ देखविगत कुछ वर्शों सेषहरों के कई लोगमुझे इस तरहां देखतेजैसेमैं उनकी टी टेबल पर पड़ा हूँ कल का उपेक्षित अखबारवे हॅसते हुए देख
 
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मृत्यु

मृत्यु केकुछ रूप देखे हैंमैंनेएक वोजिसमेकुछ लोगजीते जी मर जाते हैं ।एक वोजिसमेंकुछमर कर भी जीते हैं ।एक वो भी हैजिसमें कुछ ऐसे भी हैंजोमर कर ही जीते हैंऐ पुरूषार्थी रथ !समय-समय परसभी कोबताते रहनाकैसी-कैसी मृत्युकरेगी उनका आलिंगन ।।
 
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ओटेमेटिक घड़ी

ऐ मेरीओटेमेटिक घड़ीकाश मैंने तुझसेइतना ही सीख लिया होताबस मुझे चलना हैतेरी तरहसर्दी-गर्मी-बरसातआंधी-तूफांदिन हो या रातराह मेंफूल हो या कांटेहर हाल में चलना हैहर दिनदिन-रात चलना हैअगरइतना ही सीख लिया होतातो आजमेरी घड़ीइतनी नाजुक नहीं
 
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जुबान में ढूंढते हैं प्यार भरे शब्द-हिंदी शायरी

कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर कोई जानता ही नहीं कैसे जिंदगी को जिया जाता है सभी को अपने दर्द सहता पायें जुबानों में ढूंढते हैं अपने लिये प्यार भरे शब्द पर लोग अपनी दौलत और शौहरत के ढेर
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शिक्षा

केवल मुद्रा-बल सेविभिन्न प्रकार कीमुद्राएं बना-बना करपीछले कई वर्शों सेकहीं दिन कोकहीं रात कोकहीं सुबह कोकहीं शाम कोभांत-भांत केहजारों विद्यालयों मेंलाखों अधूरेकर रहेंकरोड़ों को पूरेकर रहेकरोड़ो पूरे ।इसीलिएअब तकना तो उन्हें बना सके पूरेनास्वयं ही बन सके
 
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