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संवाद-छंद-1

घनाक्षरी कवित्त या छंद या जो भी हो में मुझे लगता है कि तुकांत बदले नहीं जाते किंतु विषय व कहन के अनुसार निम्न रचना में तुकांत बदल गये रचना प्रस्तुत है मैंने इसे संवाद-छंद शीर्षक दिया है आप सब सुधिजन इस पर भी ध्यान देंसंवाद-छंदमल्लिका शेरावत आधा मीटर
 
योगेन्द्र मौदगिल
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मोटर साइकिल, मोबाईल और मां-बहिनःहिन्दी आलेख (motor cycle, mobil and mother -sister:hindi article

गरमी के दिनों में शाम को पार्क जाना अच्छा लगता है। दिन भर पंखे तथा कूलर की कृत्रिम सर्दी शरीर में उमस पैदा कर देती है। फिर दिन भर चाहरदीवारी में गर्मी की उष्मा से परे देह में बैठा मन कहीं अन्यत्र ऐसी जगह जाने को करता है जहां प्रकृति की थोड़ी अधिक कृपा हो।
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कार्टून:सचमुच पैसे नहीं है

शिक्षा के लिए उ.प्र. के पास पैसे नहीं है. होते तो और भी बहुत से काम निपट नहीं जाते? देखिये मुख्यमंत्री की इस पर सफाई, इसके बाद कोई कारण नहीं है कि आप इस बात को न माने कि पैसे नहीं है.
 
संजय बेंगाणी
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वफादार रसोईया…बचाओ…

वफादारी इसे ही कहते है. मालिक की पसन्द ना पसन्द का पूरा ख्याल करे. कार्टून का विचार हमारा है. मुस्कान की गेरेंटी सहित....
 
संजय बेंगाणी
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सभी बुड्ढे हुए जवान, इस होली में

क्यों सोता चद्दर तान ,इस होली में?सभी बुड्ढे हुए जवान, इस होली मेंबाहर निकल कर देख जरा तूक्यों बॆठा हॆ,अपनी ही खोली में ?किसने किसको कब,क्या बोला ?मत रख अब तू ध्यान, इस होली मेंखट्टा-कडवा ,अब कब तक बोलेगा?मिश्री-सी दे तू घोल, अपनी बोली मेंमाना की जीवन
 
विनोद पाराशर
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व्यंग्य- बिना माल के दलाल्

व्यंग्यमाल बिना घूमता दलाल वीरेन्द्र जैन दलाल का काम होता है कि वह बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच मेल बैठाये। बेचने वाले के पास माल होता है और खरीदने वाले के पास पैसा होता है और दोनों ही अन्धे होते हैं। इन दोनों के बीच गाल बज़ाने वाले को दलाल कहते हैं
 
वीरेन्द्र जैन
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ई छोकरा-छुकरिया कैसे नैन मटक्का करत रहत

स्वागत है आप सब लोगन का प्रेम नगर मां । अब ई का नाम प्रेम नगर काहे है ? बड़ा जाना पहचाना सा सवाल और हम कहत हैं कि ई सवाल का जवाब दे दे थक गये हैं कि भैया ऊ का कहत हैं कि हियाँ प्रेम बहुत होत है । जब देखो तब हियाँ के लड़के लडकियाँ नैन मटक्का करत रहत । अब ऊ
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आतंक का भूत-हिन्दी व्यंग (atank ka bhoot-hindi vyanga)

एक विशेषज्ञ का मानना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले में बिन लादेन बहुत पहले ही मारा जा चुका है पर अमेरिका के रणनीतिकार युद्ध जारी रखने के लिये उसका भूत बनाये रखना चाहते हैं ताकि वहां की खनिज, कृषि और तेल संपदा पर कब्जा बना रहे। ऐसा लगता है कि अमेरिकन
 
दीपक भारतदीप
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ये संकल्प है, संकल्पों का क्या!

किसी ने पूछा,नये साल में क्या करने वाले हो?जी, जूते खाने वाला हूँ. मुझ जैसे लोग संकल्पवान लोगों का "मोरल डाउन" करते है, ऐसे लोगों से यथा सम्भव दूरी बनाए रखनी चाहिए.
 
संजय बेंगाणी
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मंहगाई ऒर नया साल

मंहगाई ऒर नया-साल-विनोद पाराशर-हमने कहा-नेताजी! मंहगाई का हॆ बुरा हालबीस रुपये किलो आटाअस्सी रुपये दालमुबारक हो नया साल.देसी घी का दिया-सिर्फ प्रभु के सामने जला रहे हॆंऒर-हम खुद!सूखे टिक्कड चबा रहे हॆं.बच्चों को-दूध नहीं/चाय पिला रहे हॆंरो-धोकर-गृहस्थी
 
विनोद पाराशर
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कर्म-कौशल!

वे तब भी महान थे। अब भी महान हैं। तब नेता थे, अब धार्मिक नेता हैं। नेता रहते हुए, उन्होंने काफी पांव पसारे, किंतु दुर्भाग्य की उनकी लोई पांवों के मुताबिक लंबी नहीं हो पाई। राजनीति के वृक्ष की जिस ऊंची डाल पर वे बैठना चाहते थे, नहीं बैठ पाए। बावजूद इस
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राजेंद्र त्यागी का रचना संसार

मुंबई बम हादसे में हुए शहीदों के नाम एक ग़ज़ल - ये सियासत का कैसा मंजर है। चश्म-दर-चश्म इक समुंदर है।। बात करते हैं' क्यों वो मजहब की? उनके' हाथों में' जबकि ख़ंजर है।। रोटियों के लिए, बमों की आग। लकडि़यां, आदमी का पंजर है।। फ़स्ल कैसे उगे, हि़फाजत की
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ग़ज़ल

मैं अकेला था, अकेला ही चला हूँ। बंधनों से मुक्त, मैं रस्ता नया हूँ।। मील के पत्थर नहीं, हैं लक्ष्य मेरे। मैं क्षितिज के पार, जाना चाहता हूँ।। क्यों समर्पण, सामने उनके करूं मैं। क्या हुआ मैं, जो अभावों में पला हूँ।। भाव हैं निश्छल, प्रणय का मैं पुजारी
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मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट

पिछले पूरे हफ्ते खबरें आती रहीं कि आईआईएम के एमबीए के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा कैट पर कंप्यूटर का माऊस भारी पड़ गया। जिन्हे आगे जाकर मैनेजर बनना है, उनके लिए कैट परीक्षा ठीक से मैनेज नहीं हो पायी। इस खाकसार का मानना है, जो कंप्यूटर कैट के टाइम ठीक स
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नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल

तमाम दिल्लीवासियों के लिए जारी खास ट्रेफिक एडवाइजरी इस प्रकार है- 1- तमाम रैलियों औऱ रैलों के चलते लक्ष्मीनगर से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले वाया करनाल जाने के लिए तैयार रहें। आईटीओ पर ट्रेफिक को डाइवर्ट किया जायेगा। डाइवर्ट होते होते बंद करनाल
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संडे यूं ही-विकास का नैनो माडल

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है खबरें बदल रही हैं। रोजगार बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। तमाम कंपनियां माल बेचने के लिए छोटे कस्बों को ज्यादा बेहतर पा रही हैं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों का कहना है कि अब विस्तार की गु
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फाइल में बम

संथानमजी कह रहे हैं कि हमारे परमाणु बम में दम नहीं है। सरकार कह रही है कि संथानमजी की बात में दम नहीं है। कुछ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि संथानमजी भी सही हैं और सरकार भी। पब्लिक समझ नहीं पा रही है कि किसकी बात को दमदार माना जाये। [...]
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कुछ गिफ्टात्मक आईडिये

हाल में दीवाली पर इस खाकसार ने जो गिफ्ट झेले हैं, उन पर कुछ गिफ्टात्मक आइडिये इस प्रकार हैं- 1- गिफ्ट में जो कप, जार, ग्लास मिले हैं, उन्हे लेकर एक हंड्रेड परसेंट गिफ्ट शाप खोल दीजिये। इन्हे मुफ्त में भी लेने को कोई तैयार न होगा। एक बात समझ नहीं आती
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दिल्ली में शादी

शादी यूं मुश्किल काम है, इस बात को वह ज्यादा समझते हैं, जिनकी हो जाती है। जिनकी नहीं हो पाती है, शादी उन्हे भी मुश्किल लगती है। पर उनकी मुश्किलें अलग तरह की और काल्पनिक होती हैं। रीयल प्राबलम शादी के बाद शुरु होती है। पर कई बार रीयल प्राबलम शादी से प
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संडे यूं ही-सोने में दम बाकी है

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है पिछली दीवाली से इस दीवाली के बीच सोने के भावों में करीब 37 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछली दीवाली पर सोना 11,800 रुपये प्रति दस ग्राम था, यह अब करीब 16,200 रुपये प्रति ग्राम हो गया है। यानी एक साल में सैंतीस प्रतिशत
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सेंट रावण स्कूल

क्या वक्त था,अच्छे स्कूलों, गुरुकुलों के आचार्य खुद आगे होकर बच्चों को मांग कर लाते थे, एडमीशन के लिए। राजा दशरथ से विश्वामित्रजी राम और लक्ष्मण को मांग कर ले गये थे। भले दिन थे वो, अब के से नहीं। अब राजा दशरथ बालकों को लेकर किसी कायदे के स्कूल में ज
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हिन्दी प जौन घात है अंगरेजियै मा है। (अवधी ) - अमिताभ त्रिपाठी ’अमित’

यह रचना लखनऊ के आसपास तथा कुछ हद तक राय बरेली सलवन आदि में बोली जाती है| हिंदी और उसकी स्थिति पर इधर काफी चर्चा हो रही थी तो एक हास्य-व्यंग्य रचना बन गई| आप सब के सम्मुख है| बोली के प्रति मैं भी बहुत आश्वस्त नहीं हूँ| जहाँ त्रुटियां लगें इंगित करियेग
 
अमित
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दुर्घटना से देर भली!

कुछ लोगों का कहना है कि कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियां देखकर लगता है कि ये खेल दो हज़ार दस में न होकर, मानो दस हज़ार दो में होने हों। ऐसा कहने वालों के संस्कृति-बोध पर मुझे तरस आता है। ये लोग शायद भारत की कार्य-संस्कृति से वाक़िफ नहीं हैं। मेरा मानना ह
 
नीरज बधवार
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पप्‍पू ने पूछा है पत्‍नी से : बाथरूम में नहाते समय क्‍या लगायेंगे ?

ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिए नहाते समय क्‍या लगाना चाहिए पूछ लिया पप्‍पू ने आकर मूड में पत्‍नी से। तुरंत जवाब दिया पत्‍नी ने पप्‍पू की पत्‍नी जो है साबुन ?नहीं शेम्‍पू ?नहीं अब समझी पानी से नहाना चाहिए !पानी तो मैंने बतलाया हैमैं पूछ रहा हूं क्‍या लगाना
 
अविनाश वाचस्पति
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ट्रैफ़िक बूथ नहीं , सैलून कहिये !!!!

यह है लखनऊ के सदर ट्रैफ़िक पुलिस लाइन के पास स्थित पुलिस बूथ , कहने को तो यह बूथ है लेकिन अब यहाँ यातायात सिपाही नही हज्जाम बैठने लगे हैं ।साभार : दैनिक हिन्दुस्तान दिनांक ६-९-२००९
 
Dr Prabhat Tandon
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होम वर्क की वर्कशाप

दिल्ली के स्कूलों का एक अघोषित उद्देश्य यह भी है कि पेरेंट्स को भी प्रोग्रेस, ज्ञान और विद्या के पथ पर अग्रसर करते रहे हैं। संस्कृत के एक श्लोक का आशय है कि विद्यार्थिनो को कुत सुख यानी विद्यार्थियों को सुख कहां। सो दिल्ली के स्कूल पेरेंट्स के सुख हर
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शायर, सिंह और समोसे

कहावतें चलती रहती हैं, हालात बदल जाते हैं। कहावत चल रही है, लीक छोड़कर तीन चलें, शायर, सिंह,सपूत। सिंह तो अब बचे नहीं, तमाम अभयारण्यों से खबरें आ रही हैं कि सिंह अब देखने को भी नहीं बचे हैं। लीक क्या छोड़ेंगे, सिंह तो दुनिया ही छोड़ गये। शायरों पर बह
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संडे यूं ही-नकली का मजबूत अर्थशास्त्र

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है अर्थशास्त्र का पुराना नियम है कि बुरे सिक्के अच्छे सिक्कों को चलन से बाहर कर देते हैं। बुरा ज्यादा चमकदार होता है, बुरा ज्यादा असरदार दिखता है और बुरा बहुत सस्ता होता है, अच्छे और असली के मुकाबले। यह नियम सिर्फ मुद्
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बुल बनाम आईसक्रीम

मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेनसेक्स नेताओं के ईमान से भी गया गुजरा हो लिया है, कितना गिरेगा, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। जानकार बताते हैं कि सेनसेक्स की हालत यह तबसे हो गयी है, जब से मुंबई शेयर बाजार के बाहर एक सांड़ की मूर्ति की स्थापना की गयी है। स
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ब्लागर योगेश वर्माजी को पितृशोक

चर्चित ब्लागर, शानदार गीत-गजल लिखने वाले ब्लागर -(ब्लाग swapnyogesh.blogspot.com )योगेश वर्माजी के पिताश्री कल रात 13 जुलाई, 2009 को नहीं रहे। योगेशजी कई दिनों से पिताश्री की सेवा-सूश्रुषा में संलग्न थे। परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है कि श्री योगे
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घंटाभंगुर बिजली

बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं- जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम् ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से
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अमर सिंहजी के शेर पर

बजट कर प्रस्तावों पर डिस्कशन के कुछ अंश, जिन्हे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। मेरा सुझाव है कि हमें सीरियलों में चल रहे अफेयरों पर कर लगा देना चाहिए। सीरियल में अगर अफेयर नहीं होंगे, तो उन्हे कौन देखेगा। बगैर अफेयर की लाइफ तो सब झेल रहे हैं। मेरी
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संडे यूं ही-सिर्फ इत्ता ही

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है चालीस से ज्यादा साल निकाल दिये इस जिंदगी के। कितने क्षण ऐसे हैं, जब ऐसा लगा हो कि यह क्षण ऐसा है, जब लगा हो कि अब मामला खल्लास भी हो ले, तो प्राबलम नहीं। बहुत कम-बहुत पहले जब पत्नी मास्टर आफ लाइब्रेरी साइंस का कोर्स
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प्रेम में ट्रांसफार्मर

जिस इलाके में रहता हूं, वहां का ट्रांसफार्मर फुंक गया है, बिजली अठ्ठाईस घंटे से नहीं आ रही है। चेतना में सिर्फ ट्रांसफार्मर घुस गया है। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन वाला एक बंदा बता रहा है कि चंद्रयान तीन की तैयारी चल रही है। मैं पूछ रहा हूं कि भई
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संडे यूं ही-प्रेम से भागना मत

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है ओशो की पुस्तक-मन लागो यार फकीरी में से कुछ मेरे प्रिय अंश …….सूरज की रोशनी पानी के बबूले पर सतरंगा इन्द्रधनुष बनाती है, क्षण भर को ही टिकेगा यह रंग, क्षण भर को टिकेगा यह होना। लेकिन संसार में क्षण भर को
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बिजलीमय मैं सब जग जानी

बिजली पर कवि जालीदास का रचनात्मक चिंतन इस प्रकार है- 1- रुखा सूखा खाय कर छत पर जाकर सोय देख परायी बिजली, टेंशन में मत होय भावार्थ-कई दिनों से बिजली नहीं आ रही है। फ्रिज काम नहीं कर रहा है। जो कुछ फ्रिज में रखा था, वह सब सूख गया है। सब रुखा हो गया है,
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आतंकवादी आलू, कातिल कटहल….

यह निबंध उस छात्र की कापी से लिया गया है, जिसने एमए हिंदी में निबंध के परचे में टाप किया है। निबंध का विषय था-महंगाई। महंगाई का हमारे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में विशेष महत्व है। महंगाई जब बढ़ती है, तो टीवी पर न्यूज वगैरह में थोड़ी वैराइटी आ
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टमाटर और सरकार का कोआर्डिनेशन

इकोनोमिक एक्सपर्ट बता रहे हैं कि सस्ताई आ गयी है, महंगाई दर नहीं अब सस्ताई दर सामने आ रही है। 6 जून को खत्म हुए हफ्ते में 1.61 प्रतिशत सस्ताई आ गयी। मैं सब्जी बाजार में गया और सब्जी वाले को बताया सस्ताई आ गयी है। टमाटर कितने सस्ते हुए। सब्जी वाला हंस
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नाहरसिंह का क्राइम शो

यह खाकसार लिखने के ठीये तलाशते-तलाशते एक टीवी चैनल पर जा पहुंचा। चैनल चीफ से पूछा-परवरदिगार, कुछ कामेडी-हंसी-मजाक लिखवाना हो, तो बंदा हाजिर है। चैनल चीफ ने टीवी चैनलों के लेटेस्ट आंकड़े पेश करके बताया-कामेडी-विमेडी भूल जाओ। न्यूज चैनलों के टाप टेन का
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कुछ कठिन सवाल

इधर कुछ कठिन सवाल राष्ट्र के सामने आ पड़े हैं, जिनका जवाब नहीं सूझ रहा है। 1- सवाल यह है कि आखिर फिजा और चांद साहब का मामला क्या माना जाये, फाइनली निपट लिया मान लिया जाये। या सेमीफाइनल का दौर माना जाये। चांद जी कह रहे हैं कि उन्होने से सिर्फ दो बार त