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सरदार मुझे गोली मार दो!

सोचिये की शोले में अगर इस ससेने में कुछ ऐसा हुआ होता तोह क्या होता :-)गब्बर : कितने आदमी थे?साम्भा : सर्कार दो थे।गब्बर: मुझे गिनती नहीं आती, २ कितने होते हैं?साम्भा: दो एक के बाद आता है।गब्बर: और दो के पहले क्या आता है?साम्भा: दो के पहले एक आता
 
पियूष अग्रवाल
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में तुझे देख लूँगा

एक गांव के  ऑफिस जाते पति को आधुनिक पत्नी ने मारीकिस फ्लाईगंकहा सी यू इन ईवनिंग सुनते ही पति का चढ़ गया पाराउसने भी जवाब दे माराधमकाती किसे होएक घुमा कर दूंगाऔर तू मुझे क्या देखेगीमें तुझे देख लूँगाकिशोर पारीक "
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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तंग आया फरमाईशों से

भरपाया तेरी ख्वाईशों  सेतंग आया फरमाईशों से इसलिए जा रहा हूँ इस नरक से तरनेजा रहा हूँ मरनेपत्नी  रुंआसी होकर बोलीहे मेरे हमजोलीनेचर  है तुम्हारी जोलीबेशक आप जातें
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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साइबर काऊ

ई- डेयरी खोल  करएक छोरा ले आयासाइबर काऊदूध लेने आयागांव का ताऊछोरे ने हँसते हुए बोला  ताऊ पेन ड्राइव लाओजितने जीबी दूध चाहो ले जाओताऊ भी था थोडा कम्पुटर पढ़ा उसने उसी अंदाज़
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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दुल्हे बने कंडेक्टर

फेरे में दुल्हन को देख दुल्हे बने कंडेक्टर से नहीं गया रहा उसने अपनी डयूटीके अंदाज़ में ही कहातू तो मन्ने   घणी ही भाएगीपर थोड़ी और सरकजा एक सवारी और आयेगी किशोर पारीक " किशोर" 
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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पॉपुलेशन नियंत्रण

इंडिया में प्रति दस सेकंड में एक औरत एक छोराजनति है !क्या करें आबादीरोकने का तरीका बतावें छात्र ने उत्तर दिया सर ! सबसे  पहले ऐसीलुगाई को ढूंढ़कर उसे सबक सिखावें ! किशोर पारीक " किशोर"
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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पापा बनाम डेडी

मुझको तू पापा कहती थी अब क्यों कहती "डेड"इस परिवर्तन पर मेरा लाडोघूम रहा है , हेडघर अपना है,बाग सरीखाडेडी तुम हो मालीतुमको गर बोलूं पापातो पूछती होंटों  की लाली ! किशोर पारीक " किशोर"
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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नेता सांप

नेता सांप सोने पहुंचे वर्माजी,बिस्तर में था इक नाग बोले वर्मा डस नेता को,और यहाँ से भाग ! बोला सांप छोड़िये बातें नेता अपना भाई है मेरे अन्दर की विष की थेलीउससे ही भरवाई है !किशोर
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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कबूतर के माध्यम से मिसकाल

कबूतर के माध्यम से मिसकालएक प्रेमी जोड़ा कबूतर के माध्यम से संदेशो का सिलसिला जोड़ाएक  दिन प्रेमिका केचाँद से चेहरे पर उदासी की अमावस्याछाई   थीकबूतर तो आया था एस एम् एस नहीं लाया था मिलने पर पूछाकारणप्रेमी ने कहा
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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सरकारी अस्पताल

सरकारी अस्पतालकाव्य की कक्षा में गुरूजी ने प्रश्न दागाबताईये !ज्यों-ज्यों दवा की रोग बढता ही गया समझाइये एक होशियार चेले के उत्तर पर पूरी कक्षा ने मुस्कराहट मारी बोला सर ! लगता है जहाँ इलाज चल रहा है, वह अस्पताल है सरकारी !
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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अबे जब चोर मिनिस्टर का बेटा होगा........तो कोतवाल तो क्या.........कमिश्नर को भी डांटेगा

पप्पू बहुत ही होसियार बालक हैं..........मास्टर जी ने उसको कुछ मुहावरे दिए थे.......जिनका प्रयोग उसने कुछ इस तरह किया ऊँठ के मुहँ में जीरा अगर आप ऊँठ के मुहँ में जीरा डाल देंगे तो आपको जीरा नजर नहीं आएगा क्यूंकि ऊँठ अपनी गर्दन ऊपर उठा लेगा  काला
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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पूरी रात कुत्ता मेरा मुहँ चाटता रहा, आलस्य की भी हद हैं

एक ऊट सवार एक गाँव से गुजर रहा था. तभी उसे किसी ने आवाज लगाई. उसने देखा एक पेड़ के नीचे दो आदमी लेते हुए हैं. जब वो पास पंहुचा तो उनमे से एक आदमी बोला ---- ऐ भाई सुनो तो जरा!!!!!  ऊँठ सवार बोला ---- बताओ क्या बात हैं??? तो लेटा हुआ
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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गाँव में बिजली आने वाली हैं ----- कुत्ता भी उनके साथ झुमने लगा( यशवंत मेहता "फ़कीरा")

एक महाशय एक मशहूर पब में गया. उसने देखा एक आदमी बहुत ज्यादा पीकर पब से निकलता और "धर्रर -ढर्र" करता हुआ कार चलने का नाटक करता हुआ सड़क पर निकल जाता और आधे घंटे बाद फिर से पब में वापस आ जाता था.महाशय ने बारटेंडर से पुछा ---- यह आदमी कौन हैं और ऐसा क्यूँ
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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चुहे ने खेल डाली उनके साथ होली -------(यशवन्त मेहता)

हमारी एक आंटी हैं. उन्हें होली से बहुत डर लगता  हैं. रंग से बचने के लिए वो हर होली पर कहीं छुप जाती हैं. उन्हें खोज पाना बहुत मुस्किल होता था. अब जो छुपेगा उसे रंग पोतने के लिए तो लोग और तैयार रहते हैं. लोग उन्हें खोज ही लेते और फिर गुलाल अबीर से
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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होली पर पागल हुए बिल्लू ------- (यशवन्त मेहता)

बिल्लू कहे इस बार तो होली जम के खेलेंगे गुजिया दही भल्ले मालपुआ जम के पेलेंगेगोरी के गली के लगायेगे चक्करमुह पे रंग पोत कर लेंगे उसके बाप से टक्करगुब्बारों से करेंगे सब पर वार  जो चिडेगा उसे करेंगे रगों से सरोबार नो शर्म नो लाज बिल्लू रंग ऐसा पोतो
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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ताऊ उत्पाद उत्पात ख़तम कैप्सूल

ताऊ जी अपने उत्पाद के सफल प्रयोग कर रहे हैं और प्रयोगशाला बन गए हैं समीर लाल. मार्केटिंग करते हुए ताऊ जी असली बातें तो छुपा गए. बोले तो "ताऊ जी उत्पादों  के उत्पात". हमने तो पकड़ लिए "ताऊ जी उत्पादों  के उत्पात" और उसका इलाज भी ले आये हैं. अब आप
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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रविवार की सब्जी, पतिदेव और देशव्यापी संकट

आप सोंच रहे होंगे की इन तीनो अलग से दिखने वाले शब्दों का क्या सम्बन्ध! पर सम्बन्ध है वह भी ऐसा नही जिसे अनदेखा किया जा सके.हर रविवार सुबह की सब्जी के लिए पतिदेव से होने वाली खिचातानी की विवरण सुनने के बाद आपको इन तीनो का सम्बन्ध अच्छी तरह समझ आएगा. जैसा
 
लवली कुमारी / Lovely kumari
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....किसी कंजूस की पत्नी हो तो ऐसी.....

एक आदमी ने अपने जिंदगी में खूब रुपया-पैसा कमाया। पर एक नंबर का कंजूस-मक्खीचूस। उससे सबसे ज्यादा प्यार रूपये से ही था। उसकी इस आदत के कारन उसकी पत्नी बहुत परेशान थी। इतना रुपया होने का बावजूद भी वो एक-एक रूपये के लिए मोहताज थी। न वो श्रृंगार वाटिका जा
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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....किसी कंजूस की पत्नी हो तो ऐसी.....

एक आदमी ने अपने जिंदगी में खूब रुपया-पैसा कमाया। पर एक नंबर का कंजूस-मक्खीचूस। उससे सबसे ज्यादा प्यार रूपये से ही था। उसकी इस आदत के कारन उसकी पत्नी बहुत परेशान थी। इतना रुपया होने का बावजूद भी वो एक-एक रूपये के लिए मोहताज थी। न वो श्रृंगार वाटिका जा
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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चाय ने बनाया हमें सस्ता मेहमान

चाय के बिना तो जीवन अधूरा हैं। एक बार प्रेमिका से जुदा होना मंजूर हैं पर चाय से नहीं। चाय से इतना प्रेम क्यूँ हैं हमें??। चाय ने हमें क्या-क्या नहीं बनाया। हमारे भिन्न चाय वाले रूपों में आज एक रूप आपके सामने रख रहे हैं।देखिये हम कितने सस्ते मेहमान हैं।
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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चाय ने बनाया हमें सस्ता मेहमान

चाय के बिना तो जीवन अधूरा हैं। एक बार प्रेमिका से जुदा होना मंजूर हैं पर चाय से नहीं। चाय से इतना प्रेम क्यूँ हैं हमें??। चाय ने हमें क्या-क्या नहीं बनाया। हमारे भिन्न चाय वाले रूपों में आज एक रूप आपके सामने रख रहे हैं।देखिये हम कितने सस्ते मेहमान हैं।
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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सस्ते शेर शराब की बोतल से......

य़ॆ आग सीने मे रोज भड़कती हैशराबी तड़पते है जिस दिन शराब नही मिलती है_____________________________________________देखो महबूब के गम वो बोतल पर बोतल पिये जा रहे हैफ़्री की मिल रही है सो हम भी उनका साथ दिये जा रहे
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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सस्ते शेर शराब की बोतल से......

य़ॆ आग सीने मे रोज भड़कती हैशराबी तड़पते है जिस दिन शराब नही मिलती है_____________________________________________देखो महबूब के गम वो बोतल पर बोतल पिये जा रहे हैफ़्री की मिल रही है सो हम भी उनका साथ दिये जा रहे
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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......एक नम्बर के कुत्ते अब्बू तुम्हारे....

तुम गुलकन्द हो हमारी.....हम मीठे पान तुम्हारे.....१२० का तम्बाकू अब्बू तुम्हारेतुम नदिया हो हमारी.....हम मछ्ली तुम्हारे.....बेरहम मछुहारे अब्बू तुम्हारेतुम खबर हो हमारी......हम अखबार तुम्हारे.....कैचीं छाप एडिटर अब्बू तुम्हारेतुम गज़ल हो हमारी.....हम सुर
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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......एक नम्बर के कुत्ते अब्बू तुम्हारे....

तुम गुलकन्द हो हमारी.....हम मीठे पान तुम्हारे.....१२० का तम्बाकू अब्बू तुम्हारेतुम नदिया हो हमारी.....हम मछ्ली तुम्हारे.....बेरहम मछुहारे अब्बू तुम्हारेतुम खबर हो हमारी......हम अखबार तुम्हारे.....कैचीं छाप एडिटर अब्बू तुम्हारेतुम गज़ल हो हमारी.....हम सुर
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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गोनू झा

गोनू झा बहुत ही चतुर थे। उनकी चतुराई के किस्से बहुत मशहुर हैं। कल गोनू झा का नाम कहीं सुना तो एक उनका एक किस्सा याद आ गया।एक बार की बात हैं गोनू झा मछली लिए मस्त चल में घर जा रहे थे। वो जिस रास्ते से गुजर रहे थे वही पर एक नाई एक आदमी की हजामत बना रहा था।
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गोनू झा

गोनू झा बहुत ही चतुर थे। उनकी चतुराई के किस्से बहुत मशहुर हैं। कल गोनू झा का नाम कहीं सुना तो एक उनका एक किस्सा याद आ गया।एक बार की बात हैं गोनू झा मछली लिए मस्त चल में घर जा रहे थे। वो जिस रास्ते से गुजर रहे थे वही पर एक नाई एक आदमी की हजामत बना रहा था।
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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टिप्पणी महिमा

ब्लोग्स के जगत में प्रकट हुई साकारधन्य ब्लोग्गर जन जब टिप्पणी मैया लियो अवतारदयानिधि टिप्पणी मैया की सब गावो जय जय कार ब्लॉग जगत करता नमन मैया को बारम्बारजिस ब्लॉग पर टिप्पणी मैया दर्शन दे जावेउस ब्लोगर जन का ब्लॉग चल जावेजिस ब्लॉग पर टिप्पणी मैया रुष्ट
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श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ --- कड़ी २

पिछली कड़ी में हमने आपको श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ महाराज जी की दिनचर्या और उनके विचारो से अवगत कराया था। आज की कड़ी में हम आपको बाबाजी के आश्रम लेकर चलेंगे।बाबा जी सांसारिक जीवन त्याग कर, एकांत की तलाश में भटकते-भटकते इस जगह आ पहुचे।
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पापा और पप्पू का आधुनिक संवाद

पप्पू की जब उम्र हुई इक्कीस पापा जमकर निकलने लगे खीस पप्पू समझे, क्यूंकि पापा कमाए घिसकर हड्डिया और हम उड़ाते मटन-मुर्गा पहनकर विदेशी चद्दीयाँ शायद इसलिए पापा परेशान हैं शाम को पापा ने पव्वा लगाया हुकुम फ़रमाया, पप्पू को बुलाया क्यूँ बेटा पप्पू जिंदगी को
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स्वान महात्मय

सभी भक्तो को बाबा चप्पल धारी का प्यारनाले की बदबू से मन हो गया आनंदमयताली कुटी खूब, अब चुप बैठ, ध्यान से सुन स्वान महात्मयस्वानो के बहुत प्रकार हैंस्वानो को जनसंख्या अपार हैंस्वान हर जगह नजर आते हैंस्वान हर गली-नुक्कड़ पर मिल जाते हैंस्वान मंच पर भोंकते
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सहित्य-रचना की धूप में वो पक गया आम के अचार सा

कवि ने खर्च कर डाली ज़िन्दगी सारी हम सुने किसी की, कोई सुन ले हमारी जवानी में मधुर रचनाये रच एक कवियत्री पटाई थी शादी के बाद हर नयी कविता सुनाने पर बस लाते ही खाई थी प्रकाशकों के चक्कर काट, हर बार लौट आया लाचार सा सहित्य-रचना की धूप में वो पक गया आम के
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मैं तो "सोडा" मिला कर पीता था यह मुझे "नीट" ही पिलाती हैं

सर्द काली रातों मेंन जाने किस कोने से निकल कर आती हैंफिर "साली" मेरे दिल में घुस जाती हैंदर्द के साथ "सालसा" करके दिल को बड़ा रुलाती हैंगम को दिल से निचोड़ करमन की आग पर शराब पकाती हैं"कम्बक्त" खुद भी "पेग" लेती हैंमेरे को भी पिलाती हैंअब तो समझ जा
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बनारसी पान की पीक और दो उस्तादों की कहानी

भैया बनारसी पान तो वर्ल्ड फेमस हैं और उससे भी ज्यादा फेमस हैं बनारसी पान से जुड़े हुए किस्से और लतीफे। न जाने कितने ही संगीतज्ञों , लेखको, शायरों और राजनीतिज्ञों की कमजोरी रहा हैं यह बनारसी पान। तो जनाब बंदा हाज़िर हैं बनरसी पान की पीक से जुड़े दो किस्सों
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हाहाकार अनलिमिटेड

आदरणीय सभापति  महोदय …अतिथि  विशेष  शिक्षण  मंत्री  श्री  R Dtripati [tripathi] जी  ..मान्यनिया  शिक्षगन  और  मेरे  पियारे  [pyare]सह्पतियो  [sahapathiyon]…आज  अगर  I.C.E
 
पियूष अग्रवाल
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टिपण्णी पार्टी और टिप्पणी विरोध पार्टी

इधर हिंदी ब्लॉग जगत में टिपण्णी करने और न करने को लेकर जंग छिड़ी हुई हैं। सब अपनी अपनी कह रहे हैं तोहमने सोचा हम भी कुछ कह ले। अवधिया जी तो टिप्पणियो की दुकान खोलने की बात कर रहे हैं। अवधिया जीयह तो बता दीजिये कि टिपण्णी आर्डर करने के कितने देर में मिल
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कोई किसी की प्रेमिका पर डोरे न डाले....

हुआ यूँ की एक बार कवि मन को एक हसीना से प्यार हो गया। कवि "प्रियतमा" के प्यार में मधुर मधुर कविताये रचता था। उसकी "प्रियतमा" ने तो उसको स्वीकार नहीं किया और कवि के दोस्त ने उस लड़की पर डोरे डालने शुरू कर दियें। कवि निराश हो गया और निराशा में यह कविता रच
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बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

कैसे कैसे घुस गए राजनीती के अन्दरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरगंगा को बना डाला हैं काला समंदरआगे से राम जी पिछवाड़े से माल अन्दरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरदेश तोड़ने पहुच जाते जंतर मंतररासलीला रचते प्यारे भयंकरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरआम जनता नाचे बनके
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बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

कैसे कैसे घुस गए राजनीती के अन्दरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरगंगा को बना दिया हैं काला समंदरआगे से राम जी पिछवाड़े से माल अन्दरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरदेश तोड़ने पहुच जाते जंतर मंतररासलीला रचते प्यारे भयंकरबेशरम लाल भगंदर वाले बन्दरआम जनता नाचे बनके