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ऐसा भी होता है

दिखने में दुबले-पतले लेकिन स्वस्थ। उम्र होगी 75 के आस पास। स्मार्टली मंच में आये। कुछ औपचारिक संबोधन के बाद आप बीती सुनाने लगे। उन्हीं के शब्दों में।मुझे अपनी पत्नी की बहुत चिता लगी रहती है। अभी वह 72 साल की है। वैसे तो वह बहुत एक्टिव है। चलती फिरती है।
 
मथुरा कलौनी
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पं.डी.के.शर्मा "वत्स" उर्फ ‘बनवारी लाल’ -तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ?

  आदरणीय पंडित जी,प्रणाम अभी कुछ घंटे पहले ही फोन पर आपसे सोहाद्रपूर्ण तरीके से बतियाने के बाद आपकी ये ताज़ी पोस्ट   बुद्धिमानों का सम्मेलन और बनवारी लाल जी की मन की पीडा   अनायास ही पढ़ने को मिली …जान कर अच्छा लगा कि आप तो पूरे
 
राजीव तनेजा
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अभी तो साहब आराम कर रहे हैं ~~

ये मत समझो कि दुबके हुए है डरकर आजकल साहब बहुत काम कर रहे हैं कुछ पल तो सुकून लेने दो, कल आना थके हुए हैं अभी वो आराम कर रहे हैं  
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अथ श्री एवं श्रीमती अवधिया वार्ता

"लाख समझाओ इनको पर नतीजा 'वही ढाक के तीन पात'। फिर बैठ गये आप कम्प्यूटर के सामने?" श्रीमती जी बोलीं।"अरे भई, हम हैं रिटायर्ड आदमी! ब्लोग ना पढ़ें और पोस्ट-टिप्पणियाँ ना लिखें समय कैसे कटे? 'खाली बनिया क्या करे, इस कोठी का धान उस कोठी में धरे'।" हमारा
 
जी.के. अवधिया
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आने वाले दिनॊ मे शायद आपमें से किसी के काम आ जाए .. ........

--------इस माह के खतम होते-होते गर्मियो की छुट्टियाँ शुरू हो जाएगी ..............कईयों की श्रीमतिजीयाँ बच्चॊ को लेकर मामा के घर चली जाएगी और उसके बाद श्री लोगों का जो हाल होने वाला है..........उसके लिए ये पुर्वाभ्यास ....... आज ये पेरोडी ( विरह गीत )
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कब्रिस्तान में फंक्शन ``

यह रचना किसने लिखी है मुझे नहीं पता. यह मुझे ईमेल से प्राप्त हुई है. मै इसे यथावत रख रहा हूँ. किसी को रचनाकार का नाम पता चले तो मुझे भी सूचित करने का कष्ट करें.
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होली के नज़ारे --हंसी के फव्वारे --बुरा न मानो होली है ---

होली त्यौहार है --रंगों का , उमंगों का । हंसने हंसाने का , खाने खिलाने का । मिलने मिलाने का । और सबको प्यार से गले लगाने का ।अब देखिये हमने होली कैसे मनाई ---I :होली खेलने हम घर से निकलेएक पडोसी नज़र आये ,हमने उनके गालों पे गुलाल लगाये ,फिर प्यार से गले
 
डॉ टी एस दराल
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मिलिए इस हास्य फुहार करने वाले नन्हे कलाकार से ---------

ये है मेरा ६ वर्षीय भतीजा सुयश .........समझ नहीं पाती वों ऐसा सोच कैसा लेता है .....................कल कि बात है ....................१- हुआ कुछ यू कि कल स्कूल में उसे इंग्लिश टेस्ट में पांच में से साढ़े चार अंक मिले .................घर आने परख़ुशी-ख़ुशी
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डाक्टरी का कोर्स करके के कम्पाउदर बनेगा ---

दिल्ली ब्लोगर मिलन की झलकियाँ याद करते हुए , आइये आपको भी सुना देते हैं ये दास्ताँ ।बात उन दिनों की है जब मैं ऍम बी बी एस कर रहा था । एक दिन हरियाणा के एक गाँव चला गया, एक शादी में ।हलवाई की कढाई पर सब बुजुर्ग बैठे हुक्का पी रहे थे। मैंने जाकर राम राम
 
डॉ टी एस दराल
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क्या अब भी आप कह सकते हैं की ६० वर्षों में कोई विकास नहीं हुआ।

गणतंत्र दिवस की साठवीं वर्षगाँठ। और देखिये आज ही हमारी कामवाली एक सप्ताह के अर्जित अवकाश पर चली गई। भई उसका कहना है की जब सरकारी नौकर काम करें या ना करें, उनको हर ६ महीने में सरकार १५ दिन का अर्जित अवकाश देती है। तो घर का सारा काम , यानि झाड़ू पोंछा ,
 
डॉ टी एस दराल
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आइये निवेदन करें गूगल वासियों से , की भई, कम से कम भारत में तो इसे बंद मत करिए।

चिकित्सा है पेशा, समाज सेवा जिम्मेदारी फोटोग्राफी का शौक, हंसना हँसाना है जिंदगी हमारी। नए साल में हमने यही सोचा था की अब सारी पोस्ट इन्ही चार विषयों पर लिखा करेंगे। पहली तीन पोस्ट लिखने के बाद अब बारी है हास्य- व्यंग की। तो चलिए थोडा हास्य -व्यंग हो
 
डॉ टी एस दराल
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झल्लू जी पहुचे हरिद्वार !! फसे नयी परेशानी में .........

नमस्कार दोस्तों, अपने जवाहर सिंह झल्लू जी इस बार मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हरिद्वार में लगे महाकुम्भ पहुच गये। अब जब झल्लू जी जहाँ हो वहां कोई अनोखी बात न हो ऐसा हो ही नही सकता है ! पहली बात अपने झल्लू जी ही अनोखे है ! अब झल्लू जी हरिद्वार में जैसे ही
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बच्चा ..मिथिलेश ...तुहरा कल्याण हो

बांध के लंगोट....पहन के खढ़ाऊ...आ पहुंचा है झोट्टा बुढ़ऊ ... बच्चा मिथिलेश...तुम में अत्यधिक क्रोध विद्यमान है...जो तुम्हारी दिन-प्रतिदिन बलवती होती हुई महत्वाकांक्षी सेहत के लिए अच्छा नहीं है ...इसे शांत करो...शांत करो.. चिंता न करो...तुम्हारे सब दुख
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हंसने से डरता है क्यों

हंसना अपने देश में दोयम दर्जे का काम है। इसलिए आप देखेंगे कि दफ्तरों में छोटे लेवल के कर्मचारी थोड़ा-बहुत हंसी मजाक करते हैं, लेकिन अधिकारी स्तर के लोग हमेशा गंभीर बने रहते हैं। वे मजाक नहीं करते। चेहरे पर हमेशा चिंता ओढ़े रहते हैं। जो जितना बड़ा अधिकारी
 
बालमुकुंद
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हंसने से डरता है क्यों

हंसना अपने देश में दोयम दर्जे का काम है। इसलिए आप देखेंगे कि दफ्तरों में छोटे लेवल के कर्मचारी थोड़ा-बहुत हंसी मजाक करते हैं, लेकिन अधिकारी स्तर के लोग हमेशा गंभीर बने रहते हैं। वे मजाक नहीं करते। चेहरे पर हमेशा चिंता ओढ़े रहते हैं। जो जितना बड़ा अधिकारी
 
बालमुकुंद
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पौराणिक मालिका आणि त्यातले राक्षस

रामानंद सागर यांच्या पौराणिक मालिका जेंव्हा दूरदर्शनवर यायच्या तेंव्हा आम्ही त्यातल्या राक्षस किंवा असुर (जे racism म्हंटले जाणार नही ते) या मंडळीना खूप खूप घाबरायचो. आता ते का घाबरायचो त्याचा महत्वाचं कारण म्हणजे एक तर ते बरेच स्थूल होते व त्यांचा वर्ण
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स्वामी भविष्यवक्ता नन्द महराज का प्रादुर्भाव हुआ

स्वामी लंगोटा नन्द महराज के आशीर्वाद सेस्वामी भविष्यवक्ता नन्द महराज का प्रादुर्भाव हुआवे कौन हैं क्या हैं कैसे हैंबच्चा लोग इन प्रश्नों का समाधान भी होगा आप सभी धीरज सेमेरे नाम भी त्रिकाल संध्या के दौरान करिए
 
स्वामी भविष्यवक्तानंद
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न जीता कमल, न जीता पंजा! वाह रे मतदाता जीत गया छक्का !!!!

जी हाँ दोस्तों , शीर्षक सही है और मेरी मानसिक स्थिति भी अभी ठीक है। मध्य प्रदेश के सागर शहर के मतदाताओ ने महापौर (meyar) के पद के लिए एक किन्नर "कमला बुआ " को रिकॉर्ड मतों से जीताया है .जी हाँ मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार और केंद्र में कांग्रेस की
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ज़रा हट के ---

पिछली कई पोस्ट में मैंने कई सीरियस मुद्दों और बीमारियों के बारे में लिखा। आगे आने वाली पोस्ट में ज़िक्र होगा, थायराइड की बीमारियों का। लेकिन वो कहते हैं न की --ऑल वर्क एंड नो प्ले, मेक्स जैक अ डल ब्वाय। तो हमने सोचा की इस बार ज़रा कुछ हट के हो जाए। वै
 
डॉ टी एस दराल
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ले गये गुण्डे धनिया को......

बसों से सफ़र करते रहो तो जीवन के कई अनोखे और मज़ेदार अनुभव होते है। मै अपने घर से बस में सफर करता हुआ मुज़फ्फरनगर शहर की तरफ जा रहा था। रास्ते में जानसठ कस्बे में जो की एक तहसील भी है वहां पर लगे एक होर्डिंग को देखकर खुद को हंसे बिना नहीं रोक सका। अस
 
शशांक शुक्ला
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कुछ बचपन की यादें, शायद आपके साथ भी ऐसा हुआ हो !

दोस्तों , बचपन बहुत ही निराला होता है । न कोई चिंता , न कोई फिकर बस अपने में मस्त ! मेरी इस बात से आप सभी सहमत होंगे ? हर किसी के बचपन की तरह मेरा बचपन भी बड़ा ही सुंदर रहा । मेरे बचपन की बड़ी प्यारी सी याद आपसे बांटने का जी कर रहा है । मेरा जन्म जरूर
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"समीर लाल उड़नतश्तरी वाले" : आख़िर इस नाम का राज क्या है

सबसे पहले तो गुस्ताखी माफ़! पर जब से मैंने 'समीर लाल उड़न तश्तरी वाले' का नाम ब्लॉगवाणी पर देखा तभी से मेरे पेट में दर्द शुरू हो गया. वैसे तो मैंने भी बाबा समीरानंद को इस नए नाम की बधाई आनन-फानन में दे डाली ताकि कोई और पहले से इसका कॉपीराइट लेने के बारे
 
yuva
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एक कम पच्चीस ----गिनो तो जरा -----

कम से कम वे सब पढें जिनके नाम या लिंक है इसमें --------बहुत मेहनत की है मैंने जाया न करें प्लीज ------ ---- - फ़िर से वही - ---
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अथ: सर्किट--भाई संवाद !!!!

ऐ भाई !!!, अपुन को एक बात बोलने का है --- ---- क्या ???? किसी का माल उठाया है , या किसी को टपका के आया है --- ---- नई भाई !!!, आज तो बहुत अच्छा वाला बात बोलने का है --- ---- चल - चल जल्दी बोल --- भेजा क्यूँ खा रहेला है --- ---- ऐ भाई आज अपुन ब्लोगिन्
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"बम चिकी बम…बम….बम"

राजीव तनेजा*** "बोल बम चिकी बम चिकी बम…बम….बम" "बम….बम…बम"…. "बम….बम…बम"(सम्वेत स्वर)… "परम पूज्य स्वामी श्री श्री 108 सुकर्मानन्द महराज की जय"…. "जय"…
 
राजीव् तनेजा
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कहो कैसी रही ????? ( भई वाह ये भी खूब रही )!!!!!!!!

दो पोस्ट पहले एक पहेली पूछी थी , रजनीश जी ने तो बहाना बना दिया था , और वत्सल के दिमाग के नट - बोल्ट ही गिर गए थे | बाकी किसी ने कोशिश ही नही की | सोंचा थोड़ा आसान कर दू ---- थोड़े शब्द बताये और थोड़े मंगवाए ( सोने के भाव आए ) |( आसान होते ही ) सबसे पह
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मेरा खुला पत्र योगेश समदर्शी के नाम

समदर्शी जी नमस्कार…. ये खुला पत्र मैँ आपको इसलिए नहीं लिख रहा हूँ कि मेरे पास लिफाफा खरीदने के लिए खुले पैसे नहीं हैँ। एक्चुअली क्या है कि मेरे पास लिफाफे को बन्द करने लायक ज़रूरी गोंद नहीं थी तो मैँने सोचा कि…….अब आप कहेंगे कि गोंद
 
राजीव् तनेजा
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सत्यम के चेयरमैन रामालिंगा राजू पर सडॆ अंडॆं फ़ेंकें और दिल के दर्द को कुछ कम करॆ !!

एक समय की  अग्रणी सॉफ़्टवेयर कंपनी सत्यम के चेयरमैन रामालिंगा राजू भले ही हिरासत में हो , लेकिन इससे क्या किसी  मन की खीज मिटनी है  , अब जिनका-२ चूना लगा हो वह बेचारे क्या करें । हाँ एक उपाय है , यहाँ जायें और सडॆ अंडॊं को फ़ेंक कर अपने
 
Dr Prabhat Tandon
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