पसंद करें
1
नापसंद करें

हमर पहिल हाइकु

  संस्कृत साहित्य में सहस्त्रों वर्षों पूर्व त्रिपदिक छंद रचे गए जिनमें गायत्री तथा ककुप प्रसिद्ध हैं. हाइकु मूलतः त्रिपदिक (तीन पदों अर्थात पंक्तियों का ) जापानी छंद है. जापान में इस छंद में प्राकृतिक छटा का वर्णन करने की परंपरा है किन्तु
 
Kusum Thakur
टैग: हाइकु
पसंद करें
2
नापसंद करें

हाइकु-६

१- अपना दर्द भोगना पड़ता है हर किसी को। २- प्रतिध्वनियाँ गूँजती हैं रगो में जर्जर आस्था। ३- चाँदनी रात मकबरा खामोश ताजमहल? ४- शब्दों की भीड़ बीमार कल्पनाएँ अर्थ रहित। ५- सूरज फीका चाँद पीला-पीला सा चाँदनी रोई । ६- दिगभ्रमित दमघोटूँ खामोशी मूल्यहीनता ।
पसंद करें
0
नापसंद करें

हाइकु-५

१- वंश का नाम चलाता है आत्मज बेबुनियाद । २- खलीफ़ा बुर्ज मेहनत किसी की नाम किसी का? ३- क्रान्ति का बीज चिंगारी बनी आग जीत निश्चित । ४- सुलगा दिल रोया था रातभर ज़ुबां खामोश । ५- बिना कफ़न हो जाती हैं दफ़न दहेज बिना । ६- पीड़ा का मौन पिघलता प्यार से [...]
पसंद करें
2
नापसंद करें

हाइकु-४

१- मिट्टी का तेल दियासलाई की लौ बहू की बलि । २- सपने बुने अलगनी में पड़े सूखते रहे। ३- दिन या रात चन्द्रमा परेशान ब्रह्म मुहुर्त्त? ४- दर्पण का सच टूट-बिखर कर रहा अमिट । ५- चाँद हैरान सूरज परेशान चाँदनी रोई । ६- जीवनदाता बन गया राक्षस सुरक्षा कहाँ ? ७-
पसंद करें
1
नापसंद करें

विचार

जीवन रंग मूल तत्व का अंश भाव तरंग
 
गुर्रमकोंडा नीरजा
टैग: हाइकु
पसंद करें
0
नापसंद करें

डिग्रियाँ

डिग्रियाँ भी तो बिन पेपरवेट सब बेकार
 
गुर्रमकोंडा नीरजा
टैग: हाइकु