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बस हमने बचपन में कभी होली नहीं खेली--जानते हैं क्यों ---

वक्त बदल जाता है । हालात बदल जाते हैं। और कई बातें , कई रिवाजें वक्त की परतों के नीचे दब कर रह जाती हैं।ऐसा ही है , होली मनाना । जी हाँ , होली अलग अलग राज्यों में अलग अलग तरीके से मनाई जाती है।ब्रिज की होली को कौन नहीं जनता। लेकिन हरयाणवी होली ! शायद
 
डॉ टी एस दराल
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रोहतक का चिड़ियाघर और तिलयार झील

आज पहली बार हरियाणा के पर्यटन स्थल के बारे में बताते हैं। शुरूआत करते हैं रोहतक से। रोहतक दिल्ली से मात्र सत्तर किलोमीटर पश्चिम में है। दिल्ली-फिरोजपुर रेल लाइन पर स्थित एक जंक्शन है। रोहतक का सबसे प्रसिद्द मटरगश्ती केंद्र है - तिलयार झील। यह एक कृत्रिम
 
नीरज मुसाफिर जाट
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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फौजी ताऊ मनफूल सिंग का सिलेक्शन,ताऊ लडेगा इब हरियाणे इलेक्शन

आप सब ने रमलू की राम-राम ,आज ताऊ की चौपाल साँझ नै फेर जम गयी आज ताऊ तो घर पे ही मोजूद था,दो दिन की गैरहाजिरी ताऊ की हमने लगा रक्खी थी,शिम्भू नै पूछा-ताऊ आप कहाँ चले गए थे, पुरे दो दिन गायब थे, ताऊ बोल्या-भाई शिम्भू बात यूँ हैं के वो अपना सै न गुडगांव आला
 
ललित शर्मा