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अपने पहले लेख का इंतजार ....

इंटरनेशनल दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन में मिलेशाहनवाज सिद्दिकी लिखना चाहते हैंक्‍या लिखें समझ नहीं पाते हैंखुश हैं वे बहुत, प्रेमरस से भरे हैंजब अपनी इस कशमकश को हरिभूमि मेंछपा पाते हैंआप भी पढि़ए और खुद भी लिखिएआगे बढि़ए, कोशिश तो करिए।
 
अविनाश वाचस्पति
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बातों की रस्‍सी के रसिया : हरिभूमि में पढि़ए (अविनाश वाचस्‍पति)

रस्‍सी की अपनी महत्‍ता है। हम जल्‍लाद की रस्‍सी से नहीं पर कानून की रस्‍सी तो बंधे हैंअभी क्लिक करके लिंक पर पहुंच कर पढि़ए। हरिभूमि आता ही होगा अपने भौतिक स्‍वरूप में। उसके आते ही उसका स्‍कैन करके आपके सामने इमेज प्रस्‍तुत की जाएगी। क्लिक यहां कीजिए
 
अविनाश वाचस्पति
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छिपा नहीं छपा है कि सब्जियां शराब पीकर डांस कर रही हैं (अविनाश वाचस्‍पति)

छपा है छिपा भी है। पर आप सिर्फ इमेज पर क्लिक करते जाइये। यह क्लिक करना पसंद या नापसंदगी के चटके नहीं हैं। ये वो झटके हैं जो आजकल सब्जियों को शराबडांस करते देखकर किसान को लग रहे हैं परन्‍तु सब्जियों को शराब की लत भी तो किसानों ने ही डाली है। जानने के लिए
 
अविनाश वाचस्पति
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खुश है जमाना आज .... (हरिभूमि में प्रकाशित व्‍यंग्‍य)

मूर्ख दिवस कहीं जाता नहीं है वो तो यहीं बसा रहता है सबके दिमाग में। बस सिर्फ होता यह है कि एक अप्रैल को वह उकसाए जाने पर अपनी पूर्णता में सिर उठाता है और अपने वजूद का ऐलान कर देता है और देखिए सब उसके प्रभाव में बह जाते हैं या मोहग्रसित हो जाते हैं।अब
 
अविनाश वाचस्पति
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हरिभूमि में पढि़ए मधुमक्खियों की माया या माया की मधु‍मक्खियां (अविनाश वाचस्‍पति)

इमेज पर करें क्लिकऔर देखिए उड़ती हुईशब्‍दों की मक्खियांजो मधु न होते हुए भीचिपट जाती हैं मन परमानस पर।
 
अविनाश वाचस्पति