हमने खाया था एक हरिजन के घर में खाना
बात काफी पुरानी है, संभवत: करीब 30 साल पुरानी। यह बात तब की है जब पांचवीं क्लास में पढ़ते थे। हमारे ख्याल से आज से तीन दशक पहले गांवों में छूआ-छूत की तूती बोलती थी। ऐसे में किसी हरिजन के घर पर खाना खाने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। लेकिन हमने
Apr 09 2010 07:14 AM



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