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कुमाउं में भी पाये जाते हैं भित्ती चित्र : लखु उडियार

प्रागेतिहासिक काल में मनुष्य ने अपने रहने के लिये उन गुफाओं को पसंद किया जो ऊँचे-ऊँचे स्थानों में तो स्थित होती ही थी साथ ही वहां से भोजन एवं जल की व्यवस्था भी आसानी से की जा सकती थी। उस समय के मानव ने इन गुफाओं में अपने रहन-सहन के अनुसार कुछ चित्रण भी
 
विनीता यशस्वी
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22 अक्टूबर 2019 में हो जायेंगे 100 साल पूरे

यह मेरे ब्लॉग की भी 100 वीं पोस्ट है।भारत में मद्रा के स्वरूप में हमेशा ही बदलाव होता रहा है। पहले जो मुद्रा प्रचलन में थी वो इस समय के प्रचलित मुद्रा से बिल्कुल अलग थी। ऐसी ही एक मुद्रा मुझे देखने को मिली तो मेरे लिये किसी अजूबे से कम नहीं थी। यह दस
 
विनीता यशस्वी
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रानीबाग की कुछ तस्वीरें इस पोस्ट में

पिछली पोस्ट में मैंने रानीबाग में लगने वाले उत्तरायणी मेले के बारे में लिखा था पर कुछ समस्याओं के कारण तस्वीरें नहीं लगा पाई थी। इस पोस्ट में रानीबाग की कुछ तस्वीरें लगा रही हूं।रानीबाग का मुख्य मन्दिर जिया रानी की गुफा को जाने वाला रास्ताजिया रानी
 
विनीता यशस्वी
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रानीबाग का उत्तरायणी मेला

इस बार 14 जनवरी मकर संक्रान्ति या उत्तरायणी वाले दिन रानीबाग जाने का अवसर मिला जो मेरे लिये इस दुनिया का सबसे पवित्र स्थान है। रानीबाग नैनीताल से 28 किमी. की दूरी पर है। रानीबाग में ही एच.एम.टी. घड़ी की फैक्ट्री भी है जिसने पहाड़ वालों को बहुत लम्बे समय तक
 
विनीता यशस्वी
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ऐसा है हल्द्वानी का इतिहास

हल्द्वानी जिसे पहाड़ों में आने के लिये स्वागत गेट माना जाता है। आज यह शहर कुमाऊं का सबसे बड़ा व्यापारिक शहर बन चुका है और इसका विस्तार दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हल्द्वानी अपने में बहुत बड़ा इतिहास समेटे हुए है। हल्द्वानी 1907 में टाउन एरिया बना।
 
विनीता यशस्वी