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इतना देखो कि आंखें जलने लगें..

"ऊब के रेगिस्‍तान में वीभत्‍स एक नख़लिस्‍तान" - बाबू बॉदेलेयर"Cervantes, who wasn't dyslexic but who was left crippled by the exercise of arms, knew perfectly well what he was saying. Literature is a dangerous occupation."यह एक दूसरे बाबू ने कहा. था. और
 
Pramod Singh
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नौका डूबी पर सवार..

रह-रहकर पानी में चप्‍पू खेने की आवाज़ आती. इससे अलग एकदम सन्‍नाटा था. और अंधेरा. रात भर की थकान के बाद तीन दिन पहले लड़का जब पहली मर्तबा सुबह के उजाले में नाव पर चढ़ा था तब उसकी खुशी का पारावार न था. जाने कहां-कहां के लोगों और उनके अजनबी पहरावों और
 
Pramod Singh
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कला कैलेण्डर की चीज़ नहीं है

आज १३ जनवरी से हमारी भाषा के सबसे संवेदनशील और क्लासिकी ऊंचाइयों को अपनी साधारण-सादा कविताओं की उँगलियों से कई बार छू चुके अप्रतिम कवि शमशेर बहादुर सिंह के सौवें जन्म-वर्ष की शुरूआत हो रही हैं। उन पर अब उत्सवों और आयोजनों का सिलसिला साल भर तक चलेगा। साल
 
Uday Prakash
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चिदम्‍बरम साहेब की लड़ाई..

एक निबंध है, लंबा और अंग्रेजी में है् मगर चाहता हूं आपलोग पढ़ें. इसलिए नहीं कि दिल तोड़नेवाले ढेरों तथ्‍यों से रुबरु होने की ज़रुरत बनेगी, इसलिए भी, कि लेख को पढ़ते, सोचते हुए लगता है आनेवाले दिनों में इन चिंताओं से और-और दो-चार होते रहने की ज़रुरत ब
 
Pramod Singh
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एक आतंकी का पति और बुद्ध की मुस्कान (दो)

सत्ताओं ने एक ऐसा समय रचा है हमारे इर्द-गिर्द कि सारे दुस्वप्न और आशंकाएं एक-एक कर सच होने लगती हैं। उस रोज़ जब पोखरण में परमाणु के धमाके हुए उसके बाद के पंद्रह दिन पाकिस्तान में उथल-पुथल के थे। अगर सियासत के खिलाड़ी सरहद के इस पार अपनी हिंसा की ताकत क
 
Uday Prakash
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ओह सो नेकेड्ली, सो ओपेन..

अंग्रेजी में एक नयी पत्रिका बाज़ार में आई है. ताज़ा अंक के एक लेख में भारतीय शहर और उसके शहरियों के बारे में गौतम भाटिया कहते हैं- और बहुत ग़लत नहीं कहते हैं: “The chaotic agglomeration of the Indian city also ensures the urban Indian remains entirel
 
Pramod Singh
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हमने 'भारत के गोर्की' का घर देखा .....

मैंने मुंशी प्रेमचंद को नहीं देखा। जब मेरा जन्म हुआ, उसके सोलह साल पहले उनकी मृत्यु हो चुकी थी। जब मैं कुछ लिखने-पढ़ने और समझने लायक हुआ, तब से मैंने उनकी कहानियां पढ़नी शुरू कीं| उनकी कहानियां और उपन्यास पढ़ते हुए कई-कई बार उनसे मिलने का मन होता था।
 
Uday Prakash