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उत्तराखंड की महत्वपूर्ण परम्परा है भिटौली

 भिटौली शब्द भेंट से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ स्थानीय भाषा में मिलने से होता हैए जहां तक इस त्योहार का समबन्ध है तो इसमें शादीशुदा लड़्की के मायके वाले अपनी बहनध्बेटी को उसके ससुराल में जाकर भेंट ;यहां पर यह स्थानीय भाषा के अनुसार मिलने और उपहार
 
विनीता यशस्वी
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उत्तराखंड का राज्यपुष्प ब्रह्मकमल

हालांकि इसका नाम ब्रह्मकमल है पर यह तालों या पानी के पास नहीं बल्कि ज़मीन में होता है। ब्रह्मकमल 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। और इसकी भारत में लगभग 61 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से लगभग 58 तो अकेले
 
विनीता यशस्वी
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उत्तराखंड में मनाये जाने वाला प्रमुख त्यौहार है हरेला

उत्तराखंड में मनाये जाने वाले त्यौहारों में से एक प्रमुख त्यौहार हरेला भी है। इस त्यौहार को मुख्यतया कृषि के साथ जोड़ा जाता है। हरेले को प्रतिवर्ष श्रावण मास के प्रथम दिन मनाया जाता है। इसे मनाने का विधि विधान बहुत दिलचस्प होता है। जिस दिन यह पर्व मनाया
 
विनीता यशस्वी
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ऐसा होता है पत्थर मारने वाला मेला

कुमाउं के देवीधुरा स्थान में रक्षा बंधन के दिन पत्थर मारने वाला एक मेला मनाया जाता है जिसे बग्वाल कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि देवीधुरा के लोग बावन हजार चौसठ योगनियों के आतंक से बहुत दु%खी रहते थे। उन्होंने मिल कर माँ वाराही से प्रार्थना की कि वह उनको
 
विनीता यशस्वी
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उत्तराखंड की लोक संस्कृति है जागर

कुमाउंनी संस्कृति के विविध रंग हैं जिनमें से एक है यहां की ‘जागर’। उत्तराखंड में ग्वेल, गंगानाथ, हरू, सैम, भोलानाथ, कलविष्ट आदि लोक देवता हैं और जब पूजा के रूप में इन देवताओं की गाथाओं का गान किया जाता है उसे जागर कहते हैं। जागर का अर्थ है ‘जगाने वाला’
 
विनीता यशस्वी
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ऐसा है रुद्रपुर का इतिहास

 अतरिया देवी का मंदिररुद्रपुर का निर्माण चन्द वंश के राजा रुद्र चन्द ने (1565-1597) में किया। कुमाउं में 16वीं सदी में इनका ही शासन था। एक दंत कथा के अनुसार एक बार जब राजा रुद्र चन्द यहाँ से जा रहे थे तो उनके रथ का पहिया दलदली जमीन में फंस गया। उसके
 
विनीता यशस्वी
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काशीपुर पर कवि गुमानी की कविता

मैंने अपनी पिछली पोस्ट में काशीपुर के इतिहास के बारे में लिखा था। कुमाऊं के प्रसिद्ध कवि गुमानी यहीं पैदा होते थे। सिद्धेश्वर जी के कहने पर मैं गुमानी जी की काशीपुर पर लिखी रचना यहां लगा रही हूं।कथावाले सस्ते किरत धर पोथी बगल में।लई थैली गोली घर-घर हसीमी
 
विनीता यशस्वी
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ऐसा है काशीपुर का इतिहास

काशीपुर उत्तराखंड का तराई वाला शहर है। काशीपुर का इतिहास भी बिल्कुल अनोखा है।काशीपुर को हर्ष के समय (606-641 ए.डी.) में गोविषाण नाम से जाना जाता था। लगभग इसी समय में यहाँ चीनी यात्री ह्वेनसांग भी आया था। इस जगह का नाम काशीपुर, चन्द राजा काशीनाथ अधिकारी
 
विनीता यशस्वी