आशिक का जनाज़ा उर्फ़ महबूबा की राहत
द जनाज़ा ऑफ़ महबूब निकला फ्रॉम द गली ऑफ़ महबूबा विथ लोट्स ऑफ़ जोर शोर सुनकर महबूबा झांकी फ्रॉम द डोर एंड बोली- 'आखिर मर ही गया हरामखोर'.
Dec 29 2009 11:38 AM



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