क्या नशेबो फराज थे तनवीर, जिन्दगी आपने गुजार ही दी : यादें हबीब तनवीर
सात साल की उम्र में ‘मोहब्बत के फूल’ नाटक को देखकर एक बालक के मन में अभिनय की ललक जो जागृत हुई वह निरंतर रही, बालक नाचते गाते अपनी तोतली जुबान में नाटकों के डायलागों को हकलाते दुहराते बढते रहा। उसके बाल मन में पुष्पित अभिनय का स्वप्न शेक्शपीयर की
Jun 08 2010 10:22 PM



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