जीवन जीना है तो शराब-ऐ-हँसी पीना है
आज जब हम बहुत व्यस्त है ,तो रोजाना की दौड़-धूप में जीवन को जीना ही भूल जाते है. चेहरों की हंसी अजनबी हो जाती है तो इसी रोज की दौड़-धूप से ही कुछ हंसी के पलों को चुराने की कोशिश है,कुछ इस तरह -- एक बस पकड़ रहा है,और एक सर क्योकि स्कूटर पंचर हो गया है और अब
Sep 16 2009 11:41 PM



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