उसके परस बिन मनवा है सूना
उसके परस बिन मनवा है सूनाजीवन में कैसी बहार रे ?अन्तर में मेरे लवना थी लागीसांचे में प्राण ढले रे ,रैन अँधेरी थी देखा ये सपनामिट गया कैसे सवेरेफिसला कदम क्या खोई है सरगमहो गई भार सितारा रे || उसके ....निराशा में चित्त का रहा ना सहारामाया को खूब जुटाई
Jun 14 2010 06:37 AM



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