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एक्स-रे का खौफ, मरीज सावधान

सावधान यदि आप डॉक्टर पर भरोसा करते हैं तो जरा सतर्क हो जाइए। सतर्क होना ही पड़ेगा, क्योंकि सवाल आपके सेहत से जुड़ा है ऐसे में भला कौन होगा जो अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करेगा। वैसे तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं अपने मर्ज के इलाज के लिए, लेकिन यदि आपको इलाज
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विकलांगता : एक स्थिति बनाम सामाजिक चश्मा

शिरीष खरे हमारे अतीत के हिस्से में ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं जिनका नाम उनकी विकलांगता के आधार पर दर्ज हैं। अब नाम भले दूसरे बच्चों की तरह रखे जाने लगे हो मगर समाज की जुबान से ऐसे अपशब्द पूरे तरह से गए भी नहीं हैं। आज भी कई जगहों पर ऐसे अपशब्द ही उनकी पहचान
 
CRY के दोस्त
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भूख की पेट में भारत के बच्चे

शिरीष खरे यह बीते साल नंबवर के आखिरी हफ्ते की बात है जब ग्राम-अगासिया, विकासखण्ड-मेघनगर, जिला-झाबुआ, मध्यप्रदेश के अर्जुन ने एक सर्द रात में कुपोषण के सामने दम तोड़ दिया था। उस सर्द समय में इसी आदिवासी इलाके के दर्जनों बच्चे भी मारे गए थे। अर्जुन सबसे कम
 
CRY के दोस्त
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एलोवेरा (ग्वार पाठा )

पिछले दशक से स्वस्थ और स्वास्थ्य सम्बन्धी जीवन शैली सबसे ज्यादा चर्चा और ज्यादा गौर किये गए विषयों में से एक है | स्वस्थ रहने और फिट जीवन जीने के लिए होलिस्टिक तरीका अपनाना एकदम नया मन्त्र है स्वस्थ वसा -मांसपेशियों के अनुपात को बनाए रखने वाले सुरक्षित
 
Ratan Singh Shekhawat
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एक से या अनेक से !

यह नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन) का नया प्रचार मंत्र है। मंत्र के साथ एक छोटा सा कंडोम कार्टूननुमा आकार में खड़ा है और हंसते हुए कह रहा है कंडोम से। नाको ने मंत्र जनहित में जारी किया है। मेरे घर के पास बंगाली चौराहे के एक कोने पर इस विज्ञापन का
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सावधान! परोक्ष धूमपान अधिक खतरनाक

कई घटनाओं में देखा गया है कि जो व्यक्ति धूमपान का आदी है, उसे तो कुछ रोग नहीं होता, लेकिन उसकी पत्नी को कैन्सर हो जाता है। उसके आसपास रहने, उठने, बैठनेवालों को गम्भीर बीमारियाँ हो जाती हैं। इसका कारण बताते हुए चिकित्सा वैज्ञानिकों ने बताया है कि जो व
 
हरिराम
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कितना भूखा है मध्यप्रदेश

शिरीष खरे झाबुआ, मध्यप्रदेश । कुपोषण ने दो दर्जन से ज्यादा बच्चों को निगला है- यह हाल आदिवासी जिले झाबुआ का है, जहां मेघनगर ब्लाक के अगासिया और मदारानी गांवों में बच्चों की मौत का सिलसिला है कि टूटता ही नहीं। फिलहाल पूरा मध्यप्रदेश ही इतना भूखा है कि
 
CRY के दोस्त
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मोटापा कम करने राम बाण!!! बिलकुल फ्री!!! dr.jhatka.

अब देखिये मोटे शरीर के चलते क्या क्या सहन नहीं करना पड़ा ??? आज कल जिम्नेजियम का ज़माना है, तो साथ के दोस्तों ने कहा यार कुछ मोटापा कम करले| कुछ कसरत वसरत किया कर | बाबा रामदेवजी के योगासन से अपनी विशाल कया को मानवो में मिलती जुलती बना | मैं बोला : अ
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.....खूब पानी पीयो और रोग भगाओ

रोगमुक्ति पानी ग्रहण करने की संतुलित मात्रा बचा सकती है बीमारियों पानी यूं तो मनुष्य की बुनियादी जरूरत में शामिल हैं लेकिन सही और उचित मात्रा में इसके सेवन से कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है। करीब डेढ दशक से जल थैरेपी के जरिए कई बीमारियों को दूर भग
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मुद्रा चिकित्सा (भाग -१)

प्राणी जगत में समस्त प्राणियों में सर्वाधिक सामर्थ्यवान प्राणी मनुष्य ही है,यह सर्वविदित है..परन्तु अपने सम्पूर्ण जीवन काल में अपने सामर्थ्य के दशांश का भी सदुपयोग विरले ही कोई मनुष्य कर पाता है,यह दुर्भाग्यपूर्ण है....एक शरीर के साथ ही अपार सामर्थ्य का
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जुकाम के जलवे

बारिश के मौसम के साथ ही बीमारियों का मौसम भी शुरू हो जाता है। एक आम बीमारी जुकाम है। उसके बारे में जानिए कुछ रोचक तथ्य। औसतन एक व्यक्ति को हर साल 3-4 बार जुकाम हो जाता है। जुकाम की बीमारी एक विषाणु (वाइरस) के कारण होती है। जुकाम लाने के लिए केवल 10 व
 
बालसुब्रमण्यम
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होम्यपैथी - आपके मर्जों का कोमल इलाज

डा. सैम्यूल हेहनमान, होम्योपैथी के आविष्कारक) होम्योपैथी अब विश्वभर में एक ऐसी विश्वसनीय और प्रभावशाली चिकित्सा पद्धति के रूप में ख्याति अर्जित कर चुकी है जो शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं छोड़ती। होम्योपैथी की खोज अठारहवीं सदी में डा. सैम्यूल हेहनमैन ना
 
बालसुब्रमण्यम
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तपेदिक के शिकंजे में कसता भारत

तपेदिक भारत में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। आई.सी.एम.आर. द्वारा किए गए राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत की कुल आबादी का लगभग 1.5 प्रतिशत तपेदिक का शिकार है। लगभग 40 प्रतिशत आबादी में तपेदिक जीवाणु मौजूद है, यद
 
बालसुब्रमण्यम
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कैसे करें फलाहार

फलों को हमेशा दूध के साथ ही खाना चाहिए। फलों को हरी सब्जियों (सलाड) के साथ नहीं खाना चाहिए। सूखे मेवे के साथ फल खाए जा सकते हैं। खाली पेट पर फलाहार करने से सबसे अधिक फायदा होता है। यदि आप भोजन के बाद फल खाना पसंद करते हों, तो आपको अधिक मात्रा में फल
 
बालसुब्रमण्यम
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दवाई खाने की नौबत ही क्यों आए

जो वात, कफ और पित्त की प्रकृति समझेगा और अपने व्यक्तित्व को समझ लेगा वह अपने और अपने परिवार को रोग मुक्त कर लेगा। हमें यह तय करना होगा कि स्वस्थ रहने के लिए दवाइयों पर निर्भरता समाप्त करेंगे। यदि हमारी जीवन शैली ठीक रही तो हमें दवाइयों की कम से कम जर