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आजादी के नाम पर...

सभी आजाद रहना चाहते हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि आजादी की सबकी परिभाषा अलग-अलग है। संभव है कि जहां से किसी की आजादी शुरू होती हो, वहां किसी के लिए इसका अंत हो रहा हो, लेकिन हम इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। हमने इतने स्वतंत्रता दिवस मना लिए, लेकिन
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लोक चेतना में स्वाधीनता की लय (स्वतंत्रता दिवस पर)

स्वतंत्रता व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। आजादी का अर्थ सिर्फ राजनैतिक आजादी नहीं अपितु यह एक विस्तृत अवधारणा है, जिसमें व्यक्ति से लेकर राष्ट्र का हित व उसकी परम्परायें छुपी हुई हैं। कभी सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत राष्ट्र को भी पराधीनता के दौर
 
Akanksha~आकांक्षा
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शहीद मदनलाल धिंग्रा - पुण्य स्मरण

इस हफ़्ते बडी़ गहमा गहमी थी. जैसे पिछले हफ़्ते राखी के त्योहार का सुरूर चढा, इस हफ़्ते जन्माष्टमी का. और साथ ही हमारे सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां का स्वतंत्रता दिवस!! क्या बात है!!दोस्तों आपको याद ही होगा, भारत का स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त को होता है. अरे
 
दिलीप कवठेकर
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स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प

कल १५ अगस्त, २००९ को राष्ट्र स्वतंत्रता की ६२वीं वर्षगाँठ मना रहा है। लोग इस अवसर को मनाने के लिएतरह-तरह की तैयारियाँ किए हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि आज हम अपने को कैसे स्वतंत्र कहें? क्यों? आप खुद देखें व सोचें कि क्या आज हम वास्तव में स्वतंत्र हैं? आज
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हम आजाद हैं; क्या वाकई हैं!

21वीं सदी तक आते-आते हमारे लिए स्वतंत्रता दिवस के मायने बहुत कुछ बदल गए हैं। एक तरफ 'इंडिया' के भीतर 'नया अमेरिका' तेजी से विकसित हो रहा है, तो दूसरी तरफ असली भारत आज भी बदहाल और भूखा है। हमारे लिए स्वतंत्रता के मायने बस इतने ही हैं कि हम आजाद हैं। इस एक
 
अंशुमाली रस्तोगी