स्वतंत्रता ही नियती है
स्वतंत्रता का न ओर हो सकता है न छोर, लेकिन सत्य में तो स्वतंत्रता का दायरा उतना ही सीमित या विस्तृत होता है जितने की आपका समाज इजाज़त दे. जहां भौंहें उठना चालू होती हैं वहां choices बहुत जल्दी embarassment बन जाती हैं. लेकिन अगर कोई ध्याद दे तो पायेगा कि
Jan 08 2010 10:12 PM



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