पसंद करें
5
नापसंद करें

स्वच्छ सन्देश प्रतिबद्ध है भारतीय मुसलमानों के हितों के लिए अपनी क़लम के ज़रिये लड़ाई लड़ने के लिए!

स्वच्छ सन्देश प्रतिबद्ध है भारतीय मुसलमानों के हितों के लिए अपनी क़लम के ज़रिये लड़ाई लड़ने के लिए! स्वच्छ सन्देश प्रतिबद्ध है भारतीय मुसलमानों में जागरूकता फ़ैलाने के लिए और स्वच्छ सन्देश प्रतिबद्ध है हर उस हाथ को अपनी क़लम से कलम कर डालने के लिए जो
पसंद करें
2
नापसंद करें

मैं अरबी भाषा नहीं जानता हूँ तो क्या मैं इस्लाम स्वीकार कर सकता हूँ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है!हम अपने दिलों को एक ऐसे बुद्धिमान आदमी के लिए क्यों न खोलें जिसने हक़ को पहचान कर उसे स्वीकार कर लिया है और वह इस्लाम में प्रवेष करना चाहता है और अगले चरणों के बारे में पूछ रहा है, वास्तव में जिन
पसंद करें
1
नापसंद करें

कच्ची उम्र में जिसने यह आदत से दूरी बना ली ज़्यादातर आगे कम ही चांसेज़ होते हैं कि बुरी आदत अख्तियार कर ले: Saleem Khan

ज़रूरी यह नहीं कि आप किस तरह से लोगों को सिगरेट पीने अथवा स्मोकिंग से होने वाले नुक्सान से अवगत करा रहें है, ज़रूरी यह है कि आप अपनी तरफ़ से उन सभी स्मोकर्स को यह मैसेज ज़रूर पहुंचाएं, जितना हो सके! और मेरी तरफ़ से यह पूरी कोशिश रहती है कि
पसंद करें
1
नापसंद करें

जब 'गौरैया' ने हमारे घर में घोंसला बनाया था, ऐसा लगा मानो घर में कोई मेहमान आया था: Saleem Khan

सर्वप्रथम मैं जनाब केके मिश्रा और जनाब डीपी मिश्रा को धन्यवाद कहना चाहता हूँ जो dudhwalive.com व अपने ब्लॉग के माध्यम से निरन्तर प्रकृति के प्रति जागरूकता फैला रहें हैं. जनाब डी पी मिश्रा जी से मेरा परिचय लगभग
पसंद करें
0
नापसंद करें

हम उस आदमी का कैसे खण्डन करें जो यह दावा करता है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ज़िन्दा हालत में उस की ज़ियारत करते हैं ?

सूफी लोग (सूफिया) धर्म के नाम पर बुराई की जड़ और आधार हैं, जब मैं ने एक आदमी को जिस के बारे में यह कहा जाता है कि वह ज्ञान वाला (आलिम) आदमी है, यह कहते हुए सुन कर दंग रह गया कि : "आप अल्लाह के पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वास्तकिव रूप में
पसंद करें
3
नापसंद करें
पसंद करें
0
नापसंद करें

स्त्री "0" शुन्य है और पुरुष "1" एक है; महिला दिवस पर विशेष: सलीम ख़ान

स्त्री "0" शुन्य है और पुरुष "1" एक है. यह वाक्य पढ़ते ही ऐसा लगता है कि स्त्री पुरुष से कमतर है. ज़ाहिर सी बात है इस वाक्य के  भावार्थ से निकला परिणाम निश्चित रूप से स्त्री को पुरुष से कम अंक रहा है. मैं भी सिर्फ़ इतना कह कर जवाब-विहीन हो जाऊंगा
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोहम्मद उमर कैरान्वी को ब्लोगवाणी पर देख कैसा लगता है आपको, मुझे तो....

आज सुबह सुबह जैसे ही ब्लोगवाणी खोली तो देखा वहां पर "कहीं से कुछ ब्लॉग कालम में जनाब मोहम्मद उमर कैरान्वी साहब विराजमान हैं (दुसरी लाइन में बाएं से दुसरा चित्र) और मुझे उस सवाल का जवाब भी मिल गया जो कैरान्वी भाई पहले हमेशा से ब्लोगवाणी से करते
पसंद करें
0
नापसंद करें

सलीम ख़ान और 'नारी' पर लिखे गए लेख: एक दृष्टि यहाँ भी !!!

क़ुरआने मजीद और नारीइस्लाम में नारी के विषय पर अध्धयन करने से पहले इस बात पर तवज्जो करना चाहिये कि इस्लाम ने इन बातों को उस समय पेश किया जब बाप अपनी बेटी को ज़िन्दा दफ़्न कर देता था और उस कुर्रता को अपने लिये इज़्ज़त और सम्मान समझता था। औरत दुनिया
पसंद करें
0
नापसंद करें

सलीम ख़ान के पत्रकार भाई समीउद्दीन नीलू (यू पी पुलिस द्वारा उत्पीड़ित) को मानवअधिकार आयोग से राहत, यू पी सरकार को ५ लाख मुआवजा देने का निर्देश

बचपन से सुना करते थे कि ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं ! लेकिन देश के मौजूदा सड़े हुए तंत्र में जिस तरह से आम जनता का भरोसा उठ गया है वह भी एक गंभीर समस्या ही है. समीउद्दीन नीलू उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले में विगत एक दशक से ज़्यादा समय से
पसंद करें
6
नापसंद करें

आतंकवादियों का जनक, आतंकवादियों का आतंकवादी कौन ??? The Mother Of All Terrorists

जानना कहते हैं कि दुनियां भर में कथित रूप से जो आतंकवादी होने का ठप्पा लिए घूम रहे हैं उनका भी बाप कौन है? जानना चाहते हैं कि  आतंकवादियों का जनक, आतंकवादियों का आतंकवादी कौन ??? The Mother Of All Terrorists कौन है? तो इस लेख को ज़रूर
पसंद करें
3
नापसंद करें

सलीम ख़ान तुम 'जेहादी' लगते हो, अपनी दाढ़ी -मूंछ मुंडवा लो !

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनामवो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता ||जी हाँ, कुछ ऐसी ही कैफ़ियत हुई जब मुझे ये शब्द अपने बचपन के दोस्त के मुहं से सुना कि सलीम "तुम अपनी दाढ़ी मुंडवा लो क्यूंकि ऐसे में तुम जेहादी लगते हो" ! पिछले बरस तक मैं क्लीन
पसंद करें
1
नापसंद करें

देश जिनमें अधिकतम मुसलमान रहते हैं !!! (मुसलमान जनसंख्या)

मैं पिछले कई हफ़्तों से इंटरनेट और ब्लोगिंग से थोड़ा दूर-दूर सा था. लेकिन कहते हैं न नशा किसी भी चीज़ का हो वह कभी ख़त्म नहीं होता है, शायेद अंत तक ! और नशे पर लाख अपनी व्यस्तताओं के चलते उस पर थोड़ा
पसंद करें
1
नापसंद करें

ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा और रोज़ उसे 20,000 लीटर पीते चले गए!

ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा और रोज़ उसे 20,000 लीटर पीते चले गए! जी हाँ, एक औसत व्यक्ति हर रोज़ लगभग 20,000 लीटर हवा ग्रहण करता है. हर उस पल जब हम सांस लेते हैं, ज़हरीले और ख़तरनाक रसायनों के साँस के दौरान शरीर के अन्दर जाने का ख़तरा
पसंद करें
6
नापसंद करें

'हिंदू' शब्द की परिभाषा

भारत वर्ष में रह कर अगर हम कहें की हिंदू शब्द की परिभाषा क्या हो सकती है? हिंदू शब्द के उद्भव का इतिहास क्या है? आख़िर क्या है हिंदू? तो यह एक अजीब सा सवाल होगा लेकिन यह एक सवाल ही है कि जिस हिन्दू शब्द का इस्तेमाल वर्तमान में जिस अर्थ के लिए किया जा रहा
पसंद करें
5
नापसंद करें

अगर लड़कियां कम से कमतर कपडे पहनेंगी तो छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाओं पर लगाम लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा (छोटे वस्त्र: दुर्व्यवहार करने का

आजकल फिल्मों में तो लड़कियां (Actresses) उधम करे ही हुए हैं मगर हमारे लोकल समाज में भी अब छोटे कपडे आम होते जा रहे हैं, मुझे तो ऐसा लगता है कि हर गर्मी में लड़कियां पश्चिमी सभ्यता के नज़दीक और करीब आती जा रही हैं और उनके वस्त्रों में अमेरिका और यूरोप की
 
सलीम ख़ान
पसंद करें
4
नापसंद करें

एक व्यक्ति 125 बार बलात्कार करता है लेकिन उसके विरुद्ध मुकदमा चलने का अवसर केवल एक बार ही आता है!

इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत है!!!बहुत से लोग इसे निर्दयता कह कर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं कुछ का तो कहना है कि इस्लाम एक जंगली धर्म है मैंने उन जैसे कई व्यक्तियों से एक सवाल पूछा था - सीधा और सरल कोई आपकी माँ या बहन के साथ बलात्कार
 
सलीम ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ and स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़

नए वर्ष की शुभकामनाओं के साथ मैं सहर्ष आप सभी ब्लागर बन्धुवों को यह सूचित करना चाहता हूँ कि मैंने एक नए ब्लॉग को शुरू किया है जो कि विज्ञान विषयक रहेगा! ब्लॉग  का  नाम है:स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़यहाँ चटका लगा कर आप नए
पसंद करें
3
नापसंद करें

आधुनिक सशक्तिकृत नारी नारीत्व के पैमाने पर मुग़लकालीन तवायफ़ों से भी निचले दर्ज़े तक पहुँच चुकी है!

वर्तमान में हमारे भारतीय समाज में जो पश्चिमीकरण का अन्धानुकरण हो रहा है वह नक्सलवाद से भी बड़ा ख़तरा है. पश्चिम में नारी सशक्तिकरण के लुभावने नारे के पीछे उसकी क्या गत हो चुकी है वह किसी से छिपी नहीं है. हम यह अच्छी तरह जानते हैं की पश्चिम में