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विशिष्ट तेलुगु साहित्याविधा अवधान के प्रवर्तक

तेलुगु भाषा और साहित्य में उपलब्ध ‘अवधान’ प्रक्रिया वस्तुतः परंपरा से प्राप्‍त एक विलक्षण प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया के प्रवर्तक दिवाकर्ल तिरुपति शास्त्री और चेल्लपिल्ल वेंकट शास्त्री ‘तिरुपति वेंकट कवि द्वय’ के नाम से विख्यात हैं. अष्‍टावधान, शतावधान और
 
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तेलुगु के मानवतावादी कवि श्रीश्री : शताब्दी संदर्भ

" श्रम निष्फलमै, जनि निष्‍ठुरमै,नूतिनि गोतिनी वेदिकेवाल्ल्लु,अनेकुलिंका अभाग्युलंता,अनाथुलंता,अशांतुलंता,दीर्घ श्रुतिलो, तीव्र ध्‍वनि तोविप्लव शंखम्‌ विनिपिस्तारोई "(भाव : जब शोषित लाचार होगा और शोषकों के अत्याचार बढ़ेंगे तब सारे श्रमिक व शोषित वर्ग का
 
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सवर्ण और दलित सबकी धरती एक

23 फरवरी : पुण्यतिथि पर विशेष"श्रुतुलै शास्त्रमुलै, पुराण कथलै सुज्ञानसारम्बुलैयति लोकागम वीथुलै विविध मंत्रार्थम्बुलै नीतुलै.कृतुलै वेंकटशैल वल्लभ रति क्रीड़ा रहस्यम्बुलैनुतुलै तालुलपाक अन्नय वचो नूत्मक्रियलु चेन्नगुन्‌."(संकीर्तन लक्षणमु 12)(ताल्लपाक
 
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शिक्षा में भाषा और भाषा में शिक्षा

संप्रेषण की बहुमुखी व्यवस्था का नाम है - भाषा . वह सोचने - विचारने का माध्यम है और सामाजिक संस्था भी है. साहित्यिक साधन के साथ - साथ वह शिक्षा का भी साधन और साध्य दोनों है. उसमें जहाँ संपूर्ण देश को एक सूत्र में बाँधने की शक्ति है वहीं देश को टुकडों
 
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‘हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले’

भगवतीचरण वर्मा की पुण्यतिथि 5 अक्‍तूबर पर विशेष ‘हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले’ भगवतीचरण वर्मा (30 अगस्त, 1903 - 05 अक्‍तूबर, 1981) ने प्रायः सभी विधाओं में सृजन किया. वे एक संपूर्ण साहित्यकार थे. लेकिन कविता वर्माजी की अंतरात्मा
 
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गाँधी जयंती : ''हिंद स्वराज्य''

अक्‍तूबर का महीना आते ही सबसे पहले हम सत्य और अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी (02 अक्‍तूबर,1869 - 30 जनवरी,1948) को याद करते हैं. इस उपलक्ष्य में ‘स्रवंति ’ की ओर से आपको ‘गांधी जयंती ’ की शुभकामनाएँ. इस अंक में हम महात्मा गांधी की कृति ‘हिंद स्वाराज्
 
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'आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे'

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे, आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे, हटने के नहीं पीछे, डर कर कभी जुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे." - -अशफ़ाक उल्ला खाँ भारत की आज़ादी का इतिहास अविस्मरणीय घटनाओं से भरा पड़ा है. लाखों - करोड़ों
 
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जो चले गए, उनको प्रणाम !

हिंदी के लोकप्रिय रंगकर्मी, निर्देशक, कवि और अभिनेता, ‘आगरा बाज़ार ’ और ‘चरनदास चोर ’ जैसे सुप्रसिद्ध नाटकों के लेखक हबीब तनवीर का निधन 08 जून, 2009 को 85 वर्ष की आयु में हुआ. हबीब तनवीर का जन्म 01 सितंबर, 1923 को रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुआ था. उनका
 
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हिंदी दिवस पर भाषा चिंतन

सितंबर का महीना हम हिंदी प्रचारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी महीने में ‘हिंदी दिवस ’ मनाया जाता है. ‘स्रवंति ’ की ओर से आपको ‘हिंदी दिवस ’ की शुभकामनाएँ देते हुए हम यहाँ एक सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘हिंदी भाषा चिंतन ’ की ओर आपका ध्यान
 
गुर्रमकोंडा नीरजा
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कुँवरनारायण

चारों ओर लौह - मौन गुम्बद - सा अंधकार जिसकी दीवारों से टकराती आवाजें ये केवल सन्नाटे को और झनझनाती हैं. *** *** *** *** समय के केंचुल सरीखा रास्ता. मारकर खाया हुआ - सा पड़ा चारों ओर खाली नगर - पंजर ... लुंज दीवारें - सहारे डरी, सिकुड़ी पड़ी कुछ परछाइ
 
गुर्रमकोंडा नीरजा