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स्यासी इश्तिहार

स्यासी इश्तिहार ओढ़ने की ,नाकाम कोशिश करता हुआ ,नींद के नशे मे चूर ,इश्तिहार को खींचता हुआ,कि फट न जाये कहीं ,खुद को थोडा समेटता हुआ ,उलझे बाल, अर्ध नगन सा,सूखा जिस्म,मिटटी सा रंग ,पेट मे घुटने दबाये ,एक बच्चा सो रहा था ......!कभी पांव ढकता , कभी सर
 
sanjeev kuralia