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राससुन्दरी दासी के बहाने स्त्री आत्मकथा पर चर्चा

राससुन्दरी दासी की आत्मकथा 'आमार जीबोन' नाम से सन् 1876 में पहली बार छपकर आई। जब वे उनसठ बरस की थीं तो इसका पहला भाग लिखा था। 88 वर्ष की उम्र में राससुन्दरी देवी ने इसका दूसरा भाग लिखा। जिस समय राससुन्दरी देवी यह कथा लिख रही थीं, वह समय 88 वर्ष की बूढ़ी
 
sudha singh
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भाषा में स्त्री के अनुभव

                   एन्द्रीने रीच ने लिखा है ''स्त्री संघर्ष का समस्त इतिहास सदियों से चुप्पी में डूबा हुआ है। किसी भी स्त्रीवादी लेखिका के लिए सबसे बड़ी सांकृतिक बाधा यह आती है कि प्रत्येक
 
sudha singh