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मात-दिवस के अवसर पर सभी मांओ को कोटि-कोटि नमन

स्त्री जो हर रिश्तों के डोर से बधी हुई है।सबसे पहले किसी की बेटी बन कर,फ़िर बहन ,ननद,भाभी ,किसी कि सखा फ़िर किसी कि पत्नि और अन्तत: मां बनती है। हर रूप में वह अपने को समर्पित करति चलती है,पूरी तन्म्यता के साथ्। तभीतो स्त्री को मां के रूप में एक महान
 
JHAROKHA
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बंदी घातलेली पुस्तकं..

कुठलिही गोष्ट आपण नेहेमीच एका ठराविक बौध्दीक तराजु मधे तोलत असतो. आपल्या मतांमधे म्हणुनच मते – मतांतरे होतात. एखादी गोष्ट जेंव्हा त्यावर बंदी आणली जाते तेंव्हा जास्त लोकप्रिय होते.जशी गुजरात मधे दारु..तशीच बऱ्याच बंदी घातलेल्या पुस्तकांबद्दल
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स्क्रीन पर स्त्रीःस्त्री सत्ता या टीआरपी की कठपुतलियां

मूलतः मीडिया मंत्र,मार्च 2009 में प्रकाशित स्क्रीन पर की स्त्री, पुरुष पत्रकारों-प्रोड्यूसरों के लिखे-कहे शब्दों के आगे गुलामबंद होती हैं, ये विमर्श उन लड़कियों के लिए चौंकानेवाली हो सकती है जो कि मीडिया कोर्स के दौरान अपने को पर स्क्रीन पर देखना चाह
 
विनीत कुमार
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सुनों कहानी.......

जागो सोने वालो सुनो ......।बदलों मेरी कहानी। मेरी माँ कहती है औरत ही औरत की दुश्मन है। वही मेरी दुसरी माँ(सास) का कहना है औरत की नाक न हो तो मैला खाए। क्य़ा मेरी दोनों माए अपना जीया अनुभव कहती है या सुनी सुनाई बातें । राम जाने । माँ ने जब यह कहा मै बह
 
आभा