पंकज विष्ट कों एक खुला ख़त
समयांतर के मार्च, 2010 अंक में नवीन पाठक के नाम से आपने पृश्ठ 39 पर लिखा है: ... इधर उभरे वामपंथी प्रकाषनगृहों से मुख्य तौर से वे किताबें नए सिरे से छप कर आई हैं जो सोवियत रूस के जमाने में प्रगति प्रकाषन मास्को से छपती थीं. इनकी लोकप्रियता देखते हुए यह
May 03 2010 12:08 AM



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