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क्या हम प्रयोग करने से डरते हैं?

क्या आप जानते हैं कि सिकंदर जब भारत आया था तब उसने अपने 7000 की सैनिकों का पड़ाव एक बरगद के पेड़ के नीचे डाला था!  
 
पुनीत बिंद्लिश
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होमवर्क खरीदने का जमाना

मेरा आम तौर पर यह प्रयास रहा है कि मैं ब्लॉग के लिए ऐसे टॉपिक उठाऊं जो हमें, यानी आम लोगों को प्रभावित करे। मुझे यह लगता है कि इससे कहीं न कहीं थोड़ा असर जरूर पड़ता है। पर शायद ही मैंने कभी किसी विषय पर इतने उत्तेजित मन से कभी कुछ लिखा है, जैसा कि इस
 
राजेश कालरा
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साइकिल वाले को कितनी जगह देते हैं आप?

आजकल देखा जा रहा है कि बड़े शहरों में साइकिल चलाने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है! प्रसंगवश हमारे बरगद के पेड़ के नीचे भी आज यही चर्चा हो रही है! संतोष हड़बडाते हुए अपनी गाडी खड़ी कर सुभाष और देव से हाथ मिलाते हुए कहता है, "यार, यह साइकिल वाले
 
पुनीत बिंद्लिश
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प्रियभांशु, तुम्हें किस बात का डर है?

कैंडल मार्च में जाने का जबर्दस्त क्रेज़ होता है। लोग खुद को सुपरहिट मूवी 'रंग दे बसंती' के आमिर और शरमन से कम नहीं समझते। शनिवार को भी ऐसा ही एक मार्च था। चूंकि मामला हमारे इंस्टिट्यूट की एक लड़की की मौत से जुड़ा था तो बहुत मन कर रहा था कि इसमें शामिल
 
प्रशांत अस्थाना
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खुशबू की जीत मगर बदबू से लड़ाई जारी है

शाबाश खुशबू! नहीं, बधाई नहीं। तुम अभी जीती नहीं हो। सुप्रीम कोर्ट ने तुम्हारे खिलाफ चल रहे 22 मामले खारिज कर दिए हैं। लेकिन यकीन मानो यह जीत नहीं है। इससे कुछ नहीं बदलेगा। वे लोग जो तुम्हें जलती निगाहों से देखते आए हैं, देखते रहेंगे। वे, जो हाथों में
 
विवेक आसरी
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कल मेरे पिगी ने भी दूध पीया

पिछले संडे अचानक एक प्लान सूझा। सोचा, मूर्तियों के दूध पीने का एक्सपेरिमेंट घर में क्यों नही ट्राइ किया जाए। अब घर में कोई मूर्ति तो थी नहीं, सो बेटी का एक खिलौना ले लिया। उसे अच्छे से धो-पोंछकर साफ किया। फिर दूध का एक कटोरा लिया और बैठ गए उसे दूध
 
नीरेंद्र नागर
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सत्य साई हैं जादूगर, यह विडियो हमें बताता है

मेरा दोस्त प्रदीप महफिलों की जान है। अगर वह हो तो कोई बोर हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह कुछ छोटे-मोटे जादू दिखाना शुरू कर देता है। रूमाल के अंदर से सिक्का गायब कर देना, फिर उसे हवा से निकालना, रस्सी को काटना, फिर उसमें गांठ लगाना और गांठ का गायब हो
 
नीरेंद्र नागर
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आत्महत्या से बचें, कॉन्डम को चुनें?

मेक लव नॉट वॉर - 70 के दशक में उभरे हिप्पी आंदोलन ने इसे अपना घोष वाक्य बनाया था। अब 2010 में मुंबई के दो यंग बिजनेसमेन युवाओं से कह रहे हैं, - फंदा नहीं, कॉन्डम अपनाओ। उनका कहना है फंदा जीवन का अंत है, जबकि कॉन्डम (यानी सेक्स) असफलता से उपजी निराशा
 
प्रणव प्रियदर्शी
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एक मां, उसके बच्चे और कुछ जंगली इंसान

प्रिय पाठको, पिछले हफ्ते मुझे मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने का सौभाग्य मिला। वहां मैंने धरती के सबसे खूबसूरत और शक्तिशाली पशुओं के कई लुभावने दृश्य देखे, लेकिन यह पोस्ट उनके बारे में नहीं है। मैं आपको बताने जा रहा हूं एक अद्भुत कहानी एक
 
राजेश कालरा
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गे सेक्स अननैचरल है तो ब्रह्मचर्य क्या है?

तब मैं क्लास 8 में पढ़ता था। Homosexual शब्द अखबारों में आ रहा था। मतलब इसका समझ तो गया था, फिर भी अपने मॉडर्न पिता से पूछ लिया था, यह होमोसेक्शुअल क्या होता है? वह जवाब नहीं दे पाए। टालमटोल वाले अंदाज़ में कहा, एक तरह की मानसिक बीमारी है। मैंने और सवाल
 
नीरेंद्र नागर
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विचारों की उल्टी मैं नहीं करूंगी

आपका लेख विचारपरक होगा या...? हां, हां, बिल्कुल विचारपरक ही होगा। हम बाजारू लेख नहीं लिखते। लिख ही नहीं सकते.....। एक्सक्यूज मी! सबसे पहले कन्फेशन... कि मैंने उन दोनों कॉलीग्स की ये बातें सुनीं, जो नहीं सुननी चाहिए थीं, क्योंकि इसे बैड मैनर्स कहते हैं।
 
नमिता जोशी
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हत्यारा सिस्टम, बेबस जिंदगी

कुछ ही घंटों के दौरान हुई दो दुर्घटनाओं ने राजधानी के कई जख्मों को कुरेद दिया। आरटीवी पलटने से एक स्टूडेंट समेत तीन लोगों की मौत की घटना हो, या फिर अशोक विहार में एक ही घर के दो चिरागों का बुझना। दोनों ही घटनाओं के जो लोग शिकार हुए, उनकी न तो कोई गलती थी
 
दिलबर गोठी
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पुरुषों पर अत्याचार

महिला अधिकारों की जब बात उठती है तो महिलाएं क्या मांगती हैं? जाहिर है बराबरी का अधिकार। लेकिन अगर बराबरी की मांग करते-करते कोई खुद शोषणकारी की तरह बर्ताव करने लगे तो.... कम से कम कुछ मामलों में तो यही हो रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अभी भी कई जगह
 
पूनम पांडे
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कई धोखे खाकर संभाला परिवार

अनजान शहर में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए, चाहे फिर वह आपका रिश्तेदार ही क्यों न हो। पूर्व महिला आईपीएस अधिकारी किरन बेदी एक ऐसी ही लड़की की कहानी, उसी की जबानी बता रही हैं, जो कई मुश्किलों से गुजरने के बाद अब अपने माता-पिता की मदद कर रही
 
किरन बेदी
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दिल्ली में बसंत चिंतन यानी चिरकुटई

 दिल्ली में बसंत जब आया, तो दिल्ली की पब्लिक कोहरे से जूझ रही थी। बसंत कब आ गया, पता ही नहीं चला। सुना है कि पुराने जमाने में कई कवियों की ड्यूटी इस बात के लिए लगती थी कि जैसे ही बसंत आए, उस पर कविता कर दें। पुराने राजा महाराजा कई कवियों को सिर्फ इस
 
आलोक पुराणिक
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हसंने के कारण असभ्य होती लड़कियां

पिछले दिनों अखबारों में मैंने कुछ हंसती हुई लड़कियों की तस्वीरें देखीं। वे तस्वीरें विज्ञापनों में छपी थीं। उनमें से मां बनने जा रही एक लड़की किसी मजाक पर अपने पति के साथ हंस रही थी। दूसरी अपने प्रेमी के साथ हल्के-फुल्के क्षणों का आनंद उठा रही थी। तीसरी
 
बालमुकुंद
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वो फोन पर किससे बातें करती रहती है?

देख...देख...फिर से फोन पर बातें कर रही है। दिन भर बालकनी में कान पर कंधे के सहारे फोन अटका कर इधर से उधर चक्कर लगाती रहती है और हंस-हंसकर बात करती रहती है। ये थकती नहीं है? इसकी ममी कुछ नहीं कहती? पता नहीं, किससे बातें करती रहती है? अरे यार, और कौन होगा,
 
नमिता जोशी
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सुंदरी पर डिपेंडेंस

सवाल - दिल्ली में हुए ऑटो मेले-ऑटो एक्सपो में कारों-बाइकों के आसपास कई सुंदरियां क्यों खड़ी थीं?जवाब - यह बताने के लिए अलां कार बहुत जोरदार है, फलां बाइक बहुत जोरदार है। सवाल - निश्चय ही ये सारी सुंदरियां ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का कोर्स करके आई होंगी।
 
आलोक पुराणिक
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सुंदरी पर डिपेंडेंस

सवाल - दिल्ली में हुए ऑटो मेले-ऑटो एक्सपो में कारों-बाइकों के आसपास कई सुंदरियां क्यों खड़ी थीं?जवाब - यह बताने के लिए अलां कार बहुत जोरदार है, फलां बाइक बहुत जोरदार है। सवाल - निश्चय ही ये सारी सुंदरियां ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का कोर्स करके आई होंगी।
 
आलोक पुराणिक
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मूत्रविसर्जन, बलात्कार, स्तन और तोहफा कुबूल

थ्री इडियट्स वहां पहुंचे जहां अब तक कोई नहीं पहुंचा था। आमिर खान और उसके यारों के कारनामों पर बनी इस फिल्म को इंडियन फिल्म हिस्ट्री की सबसे कामयाब फिल्म बताया जा रहा है। इसने 300 करोड़ रुपये से ऊपर की कमाई की है, जोकि ज्यादातर ट्रेड पंडितों के मुताबिक ऑल
 
संजय खाती
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मूत्रविसर्जन, बलात्कार, स्तन और तोहफा कुबूल

थ्री इडियट्स वहां पहुंचे जहां अब तक कोई नहीं पहुंचा था। आमिर खान और उसके यारों के कारनामों पर बनी इस फिल्म को इंडियन फिल्म हिस्ट्री की सबसे कामयाब फिल्म बताया जा रहा है। इसने 300 करोड़ रुपये से ऊपर की कमाई की है, जोकि ज्यादातर ट्रेड पंडितों के मुताबिक ऑल
 
संजय खाती
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दोषी कौन?

हमेशा चहकते रहने वाले मामा खबरुद्दीन उस दिन थोड़े उदास थे। वजह पूछी तो कहने लगे, 'कुछ खास नहीं, बस आज एक ऐसा वाकया हो गया, जिससे मन थोड़ा खराब हो गया है।' मैंने उत्सुकता से पूछा, 'आखिर हुआ क्या मामा? जरा हम भी तो सुनें।' मामा सुनाने लगे -  घर वापस
 
प्रभात गौड़
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दोषी कौन?

हमेशा चहकते रहने वाले मामा खबरुद्दीन उस दिन थोड़े उदास थे। वजह पूछी तो कहने लगे, 'कुछ खास नहीं, बस आज एक ऐसा वाकया हो गया, जिससे मन थोड़ा खराब हो गया है।' मैंने उत्सुकता से पूछा, 'आखिर हुआ क्या मामा? जरा हम भी तो सुनें।' मामा सुनाने लगे -  घर वापस
 
प्रभात गौड़
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हंसने से डरता है क्यों

हंसना अपने देश में दोयम दर्जे का काम है। इसलिए आप देखेंगे कि दफ्तरों में छोटे लेवल के कर्मचारी थोड़ा-बहुत हंसी मजाक करते हैं, लेकिन अधिकारी स्तर के लोग हमेशा गंभीर बने रहते हैं। वे मजाक नहीं करते। चेहरे पर हमेशा चिंता ओढ़े रहते हैं। जो जितना बड़ा अधिकारी
 
बालमुकुंद
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हंसने से डरता है क्यों

हंसना अपने देश में दोयम दर्जे का काम है। इसलिए आप देखेंगे कि दफ्तरों में छोटे लेवल के कर्मचारी थोड़ा-बहुत हंसी मजाक करते हैं, लेकिन अधिकारी स्तर के लोग हमेशा गंभीर बने रहते हैं। वे मजाक नहीं करते। चेहरे पर हमेशा चिंता ओढ़े रहते हैं। जो जितना बड़ा अधिकारी
 
बालमुकुंद
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बस दो कमरों की बात है... बन जाएंगे!

पिछले दिनों एक बार फिर मैं अपने लिए किराए का घर ढूंढने निकली। घर तो फाइनली मिल गया, लेकिन उसके साथ मुझे कई सबक भी मिले। पहले भी मैं कुछ सबक पा चुकी हूं। एक दोस्त ने मेरी कहानी सुनी तो सुझाया कि जो सबक मैंने सीखे हैं, उनसे बाकी लोगों को भी अवगत करा दूं
 
सोनिया वर्मा
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बस दो कमरों की बात है... बन जाएंगे!

पिछले दिनों एक बार फिर मैं अपने लिए किराए का घर ढूंढने निकली। घर तो फाइनली मिल गया, लेकिन उसके साथ मुझे कई सबक भी मिले। पहले भी मैं कुछ सबक पा चुकी हूं। एक दोस्त ने मेरी कहानी सुनी तो सुझाया कि जो सबक मैंने सीखे हैं, उनसे बाकी लोगों को भी अवगत करा दूं
 
सोनिया वर्मा
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अश्लील कौन : हुसैन, प्रेमचंद, बिहारी या हम?

पिछली पोस्ट में मैंने ईश्वर के नाम पर पैदा किए गए डर की चर्चा की थी। इस तथाकथित ईश्वर के नाम के डर की मौत मेरे भीतर तब हुई थी, जब मुझे डारविन के विकासवाद का पता चला। बहरहाल, मैं किसी की भावना पर चोट करना नहीं चाहता। किसी भी भावना को किसी तर्क से खत्म
 
अनुराग अन्वेषी
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अश्लील कौन : हुसैन, प्रेमचंद, बिहारी या हम?

पिछली पोस्ट में मैंने ईश्वर के नाम पर पैदा किए गए डर की चर्चा की थी। इस तथाकथित ईश्वर के नाम के डर की मौत मेरे भीतर तब हुई थी, जब मुझे डारविन के विकासवाद का पता चला। बहरहाल, मैं किसी की भावना पर चोट करना नहीं चाहता। किसी भी भावना को किसी तर्क से खत्म
 
अनुराग अन्वेषी
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इस साल दिल्लीवालों का भविष्यफल

2010 में दिल्लीवासियों का भविष्यफल इस प्रकार रहेगा -मेषकैश जेब में कम ही बचेगा, क्योंकि इस साल अरहर दो सौ रुपये किलो और टमाटर तीन सौ रुपये के दस ग्राम मिलेंगे। वृषआपको पूरे साल तमाम आइटमों के भाव मरखने बैल की तरह दिखाई देंगे। इसे लेकर परेशान ना हों। मौत
 
आलोक पुराणिक
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रात में निकलें जुलूस और 7 बजे हो ऑफिस

लो, फिर जाम हो गई दिल्ली। सुबह से लेकर देर रात तक जाम ही जाम। कोई जुलूस निकल रहा है, कहीं पाइपलाइन फट गई है, तो कहीं सड़क खुदी पड़ी है। कभी फ्लाईओवर बनने की वजह से है जाम तो कहीं मेट्रो के काम के नाम। कभी शादियों का सीजन दिल्ली वालों के लिए बन जाता है
 
दिलबर गोठी
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टेंशन से बचना है तो... बैकअप सिड

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नीरेंद्र नागर
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लेडीज टॉयलेट में टाइमपास

उसके एक हाथ में पर्स और दूसरे हाथ में बड़ा-सा बैग था। हांफते हुए वॉशरूम (टॉयलेट) में घुसी और सैंडल उतार कर उस बैग में डाल दिए। फिर केले के छिलके-सी पतली और स्लीक कलरफुल चप्पलें निकालकर पहन लीं। नैपकिन गीला किया और पैरों में जमी धूल साफ करने लगी। फिर पर्स
 
नमिता जोशी
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'मैं किसी कीमत पर हिंदी नहीं बोलूंगी'

बात 4 साल पहले की है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन होनेवाला था। चूंकि चित्रकार कोई खास नामी नहीं थीं, इसलिए उन्होंने शायद सोचा होगा, क्यों न किसी फिल्मी हस्ती से ही इसका उद्घाटन कराया जाए। उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन कराने
 
प्रेमचंद्र गुप्ता
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सीताओं को आत्महत्या करने से रोको

अखबार में एक खबर का शीर्षक है - एक और रुचिका ने दी जान। खबर पढ़े बिना हम समझ जाते हैं कि एक लड़की के साथ रेप या गंभीर छेड़खानी हुई और कुछ दिनों बाद तमाम तरह की दिक्कतें झेल कर टूट चुकी लड़की ने आत्महत्या कर ली। खबर हम एक सांस में पढ़ते चले जाते हैं
 
पूजा
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शिक्षा और हिम्मत ही हैं जिंदगी के साथी

शिक्षा और हिम्मत ही मुश्किलों से सामना करने का हौसला देती हैं। अपने हक के लिए अपने ही परिवार से लड़ना मुश्किल और मजबूरी दोनों है, लेकिन यह जिंदगी की जरूरत भी है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी आज बता रही हैं एक ऐसी महिला की कहानी उसी की जबानी, जो अपने
 
किरन बेदी
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बाप-बेटे के संबंध में प्रतिद्वंद्विता का भाव

इवान तुर्गनेव की एक मशहूर कहानी है -मेरा पहला प्यार। इसका नायक किशोर वय का एक बालक है, जो पड़ोस में रहने वाली अपने से बड़ी उम्र की एक लड़की से प्यार करता है। शुरू में वह लड़की भी उसके प्यार को स्वीकार करती है, लेकिन कुछ दिनों बाद वह अचानक उससे खिंची-
 
बालमुकुंद
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मूंछ का सवाल, दाढ़ी का बाल

कुछ लोग नाराज हैं, बहुत नाराज। उन्हें जिलेट के उस ऐड से शिकायत है, जिसमें औरतों को दाढ़ी-मूंछ के खिलाफ एकजुट होते दिखाया गया है। इधर ऐसे सर्वे भी आए हैं, जो बताते हैं कि दाढ़ी-मूंछ वाले मर्दों को औरतें पसंद नहीं करतीं। इन सर्वे के पीछे कौन है, पता नहीं,
 
संजय खाती
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गोरयां नु दफा करो

कुछ दिन पहले एक बच्चे से मिला। उसे उसकी मां ने छोड़ दिया था...पैदा होते ही। छोड़ दिया यानी उसे गांव में रहने के लिए भेज दिया दादा-दादी के पास, यह कहकर कि मैं इस बच्चे को नहीं रखूंगी। वैसे यह कोई नई बात तो नहीं है। हमारे यहां मां-बाप कई बार बच्चों को
 
विवेक आसरी
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वह बच्चा चोर कैसे बन गया?

मैं ऑफिस के पास से बस में चढ़ी ही थी कि अचानक एक 35-36 साल का शख्स जो बस के गेट के पास था, बस को जोर-जोर से यह कहकर पीटने लगा कि बस आगे नहीं जाएगी। जैसे ही ड्राइवर बस स्टार्ट करता, वह जोर-जोर से बस को पीटता। पहले तो मुझे समझ नहीं आया कि माजरा क्या है
 
पूनम पांडे