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क्या दिल में इतनी जगह भी नही ? (अंकल आपको भी पकड़ कर ले जाएंगे)

कल शाम घर जा रहा था तो एक अजीब सी बात महसूस की. पूरी गली शांत थी, शाम को सिर्फ बच्चों की आवाज और हद तो तब हो गई जब रात में भी मन को ऐसा लग रहा था कि कोई आवाज है जो गायब है. सुबह दौड़ने के लिए जा रहा था तो फिर [...]
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लव, सेक्स, धोखा और भारतीय समाज : एक नजरिया

समाज में आजकल जो मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म है वह है लव, सेक्स और उसके बाद धोखा. संस्कृति के नाम पर प्यार को बदनाम करने का क्रम जारी है. कुछ समाजशास्त्री प्यार, शारीरिक सबंध आदि को गलत मानते हैं तो कुछ इसे सही. इस हो-हल्ले में शायद कुछ अनदेखा रह गया. काफी
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अमीरों की आमदनी की तरह बढ़ती मंगाई

महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए एक और मुसीबत आने वाली है। हालात अब भारत में बगावती होने वाले हैं। यदि ऐसा नहीं है तो होना जरूर चाहिए। जिस तरह हररोज अमीर की आमदनी दिन दोगुना और रात चौगुनी बढ़ रही है, उसी तरह दाल-चावल-गेहूं-नमक-तेल की कीमत क्यों बढ़नी
 
चन्दन कुमार
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लव, सेक्स, धोखा और भारतीय समाज : एक नजरिया

समाज में आजकल जो मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म है वह है लव, सेक्स और उसके बाद धोखा. संस्कृति के नाम पर प्यार को बदनाम करने का क्रम जारी है. कुछ समाजशास्त्री प्यार, शारीरिक सबंध आदि को गलत मानते हैं तो कुछ इसे सही. इस हो-हल्ले में शायद कुछ अनदेखा रह गया. काफी
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निरुपमा का ट्रायल ना हो

कहते हैं, बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। पर कुछ बातें जहाँ से शुरू होती हैं, वहीँ ख़त्म हो जाती हैं। आगे बढती है तो गलत दिशा अख्तियार कर लेती है। यही बात निरुपमा की मौत के मामले में कही जा सकती है। कहाँ तो सभी मीडिया ट्रायल की कोशिशों तक पहुँच चुके थे,
 
चन्दन कुमार
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मुबारक हो तुम्हें तुम्हारा समाज- निरुपमा की मौत

निरुपमा की मौत हमारे सभ्य समाज के चहरे पर कालिख पोत गया है। वह एक पत्रकार थी। जिसका मकसद होता है, दुनिया और समाज की बुराइयों को मिटाना। खुद फैसले लेकर निष्पक्ष रहना। पर उसने एक फैसला किया और वही उसकी मौत की वजह बन गयी। हर रोज हमारे देश में ऐसी कई निरुपमा
 
चन्दन कुमार
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अगर यही जिन्दगी है तो क्या जिन्दगी है…(इसे नजरअंदाज न करें)

जीवन अनमोल होता है, जीवन भगवान के द्वारा हमें दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है, और भी न जाने कितने शब्द जीवन की महत्ता को दर्शाने के लिए कवियों की कलम से निकले. लेकिन जब कभी जीवन की सुंदरता के पीछे छुपे बदसूरत चेहरे को देखा तो लगा कि यह तो वही बात है कि
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दलित कबतक जलाएंगे अपना दिल

भारत में जब भी दलितों की चर्चा होती है, तो उनसे जुड़ी घटनाएं-दुर्घनाएं ही हमारे सामने आती है। दलित उत्थान का जिक्र जब हम करते हैं तो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का ही चेहरा हमारे सामने आता है। खुद को दलित प्रतिमान के तौर पर पेश करने से वह भी बाज
 
चन्दन कुमार
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जेल में सेक्स का अधिकार

यूँ तो मनवाधिकार के दायरे में सभी आते हैं। चाहे वह भले ही सजायाफ्ता मुजरिम हो या जेल में ही क़ैद कोई अपराधी। ऐसे में सवाल उठता है कि मानवाधिकार के नाम पर किसी कैदी को किस हद तक आज़ादी दी जा सकती है। जेल में बंद एक कैदी ने अपनी पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध
 
चन्दन कुमार
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गर्मी में पानी का दर्द

भवरां तोरा पानी ग़जब कर जाए। गगरी न फूटे भले खसम (पति) मर जाए।।ये पंक्तियां मेरी नहीं हैं। पर इसकी समस्या मेरी जरूर है। बहुत पहले की बात है, चित्रकूट-बुंदेलखंड और पानी की समस्या पर एक रिपोर्ट देख रहा था या शायद अखबार में खबर पढ़ी थी। तभी से मुझे याद है
 
चन्दन कुमार
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कलम का सिपाही या मजदूर

भारतीय शिक्षा में बदलाव अभी भी दूर की कौड़ी नजर आ रही है। शिक्षक क्लास में आते ही अपना ज्ञान बघारने लगते हैं। हालांकि उनके द्वारा बघारा जाने वला ज्ञान भी उनका मौलिक ज्ञान नहीं होता है। वह क्लास में आते ही बकर-बकर करने लगते हैं। हम छात्र उनकी बातों को कलम
 
चन्दन कुमार
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परमाणु दायित्व विधेयक पर गैर-दायित्व की पहलकदमी

देश की संसद में आज कल परमाणु दायित्व विधेयक को लेकर काफी बहस चल रही है . कइयों के लिए यह विधेयक गले की फांस बना हुआ है तो कुछ इसे किसी भी कीमत पर पास करवाना चाहते हैं. मैंने भी इस बारे में सुना तो बड़ी हैरानी हुई कि जहां एक तरह हमारे देश की सिर्फ [...]
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पुरुषों का दोगला चेहरा

कल्बे जव्वाद साहब। जनाब मुस्लिम धर्मगुरू हैं। इन्होंने हाल फिलहाल में फरमाया है कि महिलाओं को सिर्फ लीडर पैदा करना चाहिए, उन्हें लीडर नहीं बनना चाहिए। यानी औरतें बस बच्चे पैदा करने के लिए है और उन्हीं से पैदा हुए बच्चे उनका ही अपमान करते हैं। कहते हैं
 
चन्दन कुमार
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पंडितई की आड़ में देह की दलाली

आजकल चिरकुट बाबाओं की भरमार है। बाबा, संन्यास लेकर सभी तरह की मोह-माया से मुक्ति का ढोंग करते हैं। किस तरह करते हैं, आजकल बाबा लोग सेक्स रैकेट से लेकर कई विवादों में फंस रहे हैं, यह सबसे बड़ा सबूत है। यह सभी ने देखा भी है। बाबा लोग पंडितई की आड़ में
 
चन्दन कुमार
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कामुक बाबाओं के कारनामें बनाम हमारा समाज

न जानें भगवान के नाम पर लोग और किस कदर तक गुजर जाते हैं. पहले तो लोग सिर्फ भगवान के नाम पर चुना लगाते थे मगर समय बदला और कलयुग का प्रभाव बढ़ता चला गया और हालात ऐसे आ गए जब वासना और काम से दुर रहने वाले संत [...]
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“आशा” की बुझती किरणों में निराशा का अंधेरा

आज हर तरफ सिर्फ मंहगाई और आतंकवाद की खबरें सुनाई दे रही हैं. मगर एक खबर ऐसी भी है जो इन बड़ी और मसालेदार खबरों की भीड़ में कहीं खोई हुई सी लग रही है. बच्चे जिन्हें हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण का रुप माना जाता है, आज न जाने उन पर मौत का कैसा [...]
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महिलाएं महज़ उपभोग के लिए नहीं हैं

नसीम हमीद पाकिस्तानी एथलीट हैं. उन्होंने दक्षिण एशियाई खेलों में 100 मीटर दौड़ का गोल्ड मेडल जीता. बांगलादेश में हुए इन खेलों की समाप्ति के बाद जब नसीम पाकिस्तान वापस लौंटी तो उनका जोरदार तरीके से स्वागत हुआ। इन खेलो के 26 साल के इतिहास में नसीम पहली
 
चन्दन कुमार
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पाकिस्तान में लड़कियों की हालत

यह ख़बर पाकिस्तान की है. वहां से जुड़े हालात पर है. गनीमत है कि मैं अभी बम्बई, माफ़ी चाहूंगा मुंबई में नहीं हूं. मुम्बई नहीं लिखा तो मराठियों के ठेकेदार आकर मुझे मारने लगेंगे। मीडिया में मैं भी ख़बर बन जाऊंगा। ख़ैर, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में
 
चन्दन कुमार
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वाह रे देशभक्ति……………..

वाह मान गए, क्या देशभक्ति का जुनून है शिवसेना के नेताओं (यों कहे गुण्डों) में. सिर्फ शिवसेना ही नही मनसे और कुछ ओर लोग भी इस कतार में सामिल हैं. कुछ ही दिन बीते हैं अभी जब इस राष्ट्र ने अपना 60 गणतंत्र दिवस मनाया, मगर इसके पहले और बाद में हो रहे घटना
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सिर्फ मनोरंजन ही नहीं,सूचना और जानकारी भी देती हैं फिल्‍में

हाल ही हमलोगों ने सिनेमा का अद्भुत चमत्‍कार ‘अवतार’ के रूप में देखा। ले‍खक-निर्देशक की कल्‍पना को तकनीक का सहारा मिल जाए तो उसकी उड़ान असीम हो सकती है। नावी ग्रह के नागरिकों को देखते हुए हम उनके दुख-दर्द से जुड़ जाते हैं और अपने ग्रह के
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हिंदी समाज की उपलब्धि बनीं प्रियंका और कंगना ???

माफ करें। फेसबुक पर कल यह राय रखी थी। दोस्‍तों ने इस पर टिप्‍पणियां दीं और अपनी साच जाहिर की। मुझे लगता है कि प्रियंका खेपड़ा और कंगना रानाऊत को मिले राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार को हिंदी समाज की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए। लिखने और बताने की जरूरत नहीं कि
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महंगाई यानी ग़रीबों पर लगने वाला टैक्स

महंगाई अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जब जब मंत्री साहब इसकी चर्चा करते हैं...यह आसमान छूने लगती है। लेकिन एक बात जो ध्यान देने वाली है....ख़ासकर कांग्रेस को वह यह कि दिल्ली की गद्दी उसे महंगाई के मुद्दे पर ही मिली थी...भाजपा की सरकार प्याज की
 
चन्दन कुमार
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महंगाई यानी ग़रीबों पर लगने वाला टैक्स

कांग्रेस ने 1991-९६ में आर्थिक सुधारों को लागू किया और बीजेपी ने एनडीए के अगुवा दल के तौर पर उनको आगे बढ़ाया। शायद यही वजह है कि बीजेपी भी महंगाई के मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रही है। पिछले दिनों ही इस मसले पर उसने सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन लिब्रहान
 
चन्दन कुमार
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नये साल में चेहरे नए यादें पुरानी

नया साल...नई उम्मीदें। कई लोगों की बधाइयां मिली...अच्छा लगा बुरा भी...नए साल की बधाई का बुरा क्या लगेगा...यह ऐसा शहर है कि दिल मिले न मिले लगो हाथ ज़रूर मिलाते हैं...साल की शुरुआत श्रीलंकाइ टीम पर आतंकवादी हमले से हुई...आख़िर में भी २६/११ बरसी हम मनाते
 
चन्दन कुमार
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ऐसा हमारा नेता है …

Stock market संबंधी जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें नेता एक ऐसी प्रजाति है… जो पाँच वर्षों मे केवल एक बार प्रजनन के लिए निकलता है जिसके लुभावने वादे सुनकर हर मादा (read जनता) का मन फिसलता है वो पाँचवी फेल से भी नालयक है पर भाषण ओबामा से भी अच्छे
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मर्दों की मानसिकता

यह जमाना है, अधुनिकीकरण का। 21वीं सदी का और इस सदी में भारत भी काफ़ी तरक्की कर रहा है। आधुनिकता के लबादे में भारतीय समाज ख़ुद को पाकर फूले नहीं समा रही है। अक्सर हमें सुनने को मिलता है, अशिक्षा ही अधिकतर समस्याओं की जड़ होती है। बलात्कार जैसी घटनाएं
 
चन्दन कुमार
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लाल सलाम को सलामी

साल 1967 के दौर में नक्सलबाड़ी से जो चिंगारी उठी, उसने भारत को अपनी आगोश में ले लिया. आज हालात ऐसे हैं कि बंगाल कि यह चिंगारी आंध्रप्रदेश के गांवों तक पहुंच चुकी है. लेकिन सत्ता की मंशा कभी इसे सुलझाने की नहीं रही. देश में जब जनता पार्टी की सरकार थी