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बचपन के करीब, प्रकृति के करीब

पं0 नेहरू से मिलने एक व्यक्ति आये। बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा-’’पंडित जी आप 70 साल के हो गये हैं लेकिन फिर भी हमेशा गुलाब की तरह तरोताजा दिखते हैं। जबकि मैं उम्र में आपसे छोटा होते हुए भी बूढ़ा दिखता हूँ।’’ इस पर हँसते हुए नेहरू जी ने कहा-’’इसके पीछे
 
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प्रति व्यक्ति आय 44345 रुपये...सोचिये जरा ??

केंद्र सरकार के एक साल पूरे हो गए. आज के दौर में यह अपने आप में उपलब्धि है. खैर उसके पीछे न जाने कितने समझौते और ब्लैकमेलिंग छिपी होती हैं, कोई न जाने. अँधेरी राह में एक जुगनू की चमक भी किसी को नव-जीवन दे जाती है. शायद अब मिली-जुली सरकारों का यही सच है.
 
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सभ्यताओं को लीलने को तैयार 'तम्बाकू' की विषबेल

आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. मई माह की भी अपनी महिमा है. मजदूर दिवस से आरंभ होकर यह तम्बाकू निषेध दिवस पर ख़त्म हो जाता है. दुनिया के 170 राष्ट्रों ने व्यापक तम्बाकू नियंत्रण संधि पर हस्ताक्षर तो किये हैं पर वास्तव में इस सम्बन्ध में कोई ठोस पहल नहीं
 
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शेर नहीं शेरनियों का राज

अपने देश में तेजी से बहुत सारे जीव-जंतुओं की संख्या कम होती जा रही है. पता नहीं आगामी पीढ़ियों को ये देखने को भी मिलें या नहीं. लगता है कि वे उन्हें सिर्फ पुस्तकों में पढ़ेंगें तथा खिलौने के रूप में खेलेंगें. 2008 में हुई गणना के अनुसार देश में 359 शेर,
 
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कत्थक नृत्य भगाए रोग (विश्व नृत्य दिवस पर)

शास्त्रीय नृत्य से आप सभी वाकिफ होंगे। इसके बारे में सुनते ही जेहन में कत्थक करती किसी नृत्यांगना की तस्वीर उभर आती है। लेकिन क्या आपको इस बात का इल्म है कि यह शास्त्रीय नृत्य मात्र एक कला नहीं बल्कि दवा भी है। इस बात पर अपनी सहमति की मोहर लगाती हैं
 
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IIT और IIM में भी शिक्षक नहीं..

कहते हैं किसी भी राष्ट्र को उन्नति की तरफ ले जाने में शिक्षा का बहुत योगदान है. मानव-संसाधन के विकास में भी इसका अप्रतिम योगदान है. प्राथमिक शिक्षा की स्थिति हमारे यहाँ किसी से छुपी नहीं है, पर उच्च शिक्षा का हाल भी बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता.
 
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गोरों के जाने के बाद भी देश में लूट और स्वार्थ का राज- भगत सिंह

आज 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की पुण्य तिथि है। 23 मार्च 1931 को इन क्रांतिकारियों को आजादी कि कीमत के रूप में फाँसी के फँदे पर लटका दिया गया. भगत सिंह की उम्र तो उस समय तो बहुत कम थी, पर इसके बावजूद उनके विचार बहुत परिपक्व थे. भगत सिंह ने
 
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धर्म का लबादा ओढ़े ये मानवता के भक्षक

कानपुर भले ही छूट गया हो, पर अभी भी वहाँ की ख़बरें देख-पढ़ लेती हूँ. चार साल से ज्यादा का रिश्ता इतनी जल्दी छोड़ भी तो नहीं पाती. कानपुर भले ही कभी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी रहा हो, पर आज का कानपुर अपराध के लिए कुख्यात है, वो भी मूलत: महिलाओं के
 
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जीवन एक पुष्प समान

यह जीवन एक पुष्प समान है. आप अपने हृदय के पटों को जितना खोलेंगें अर्थात अपनी विचारधारा को जितना विकसित करेंगें, वह समाज को उतना ज्यादा सुवासित करेगी !!
 
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