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आ चल सैर करे !

आ चल सैर करे !किनारे की ओरमन मचला आजसैर को ॥दिन ढले चल पडे अकेले किनारे की तरफदिल आज था मौज मेचल पडा मन सैर कोदिल मे था आज बालपन और नयी उमंगे लियेसोचा चलुआ चल सैर करे ! किनारे की ओर ॥
 
Dhiraj Shah
टैग: सैर