स्नोवा का पत्र, उपन्यास अंश और सैन्नी का स्नेह
दोस्तो, मुझे हाल ही में यह मेल मिला है..पत्र इतना दिलचस्प और आत्मीय है कि पढकर मुझे लगा मैं इसे सार्वजनिक करुं..स्नोवा का अस्तित्व हो या ना हो..उनकी कहानियां तो हैं..वे बोलती हैं...साल भर बोलती रहीं..छपती रहीं..सराही जाती रहीं..मैं साहित्य पेज देखती हूं
Jan 16 2010 02:41 PM



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