केहि बिधि मिट्टी से मिट्टी मिल जावे...
मित्रों,ऐसे ही फुर्सत के कुछ लम्हों में एक ताल के किनारे बैठे हुए, मेरोरियल डे के दिन (मई ५, २०१०) चंद पंक्तियाँ मन में उपजी...उन्हें सूफियाना रंग और विस्तार देकर प्रस्तुत कर रहा हूँ, वैसे तो सूफी गीतों पर मेरी कोई पकड़ नहीं हैं
Jun 08 2010 11:37 PM



Shuffle








