बात
गर्म टहकार,कुनकुनी पीली ,चमकीली उत्फुल्ल,धूपसिर्फ धूप नहीं है । दरसल वह एक बात है ।बात –जो सूरज धरती से किया करता है ।रोज रोज , हर रोज ।उसके कई अर्थ हैं ।अनेक भाव ,गन्ध ,भंगिमाएं ,कहानियां हैं ।धरती की छाती पर टंकीछोटी से छोटी घास से लेकरवृहद देवदारू व
Jan 11 2010 01:26 AM



Shuffle








