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बात

गर्म टहकार,कुनकुनी पीली ,चमकीली उत्फुल्ल,धूपसिर्फ धूप नहीं है । दरसल वह एक बात है ।बात –जो सूरज धरती से किया करता है ।रोज रोज , हर रोज ।उसके कई अर्थ हैं ।अनेक भाव ,गन्ध ,भंगिमाएं ,कहानियां हैं ।धरती की छाती पर टंकीछोटी से छोटी घास से लेकरवृहद देवदारू व
 
Aarjav
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जब सूरज को जेल हुई

गुड़गांव एक्सप्रेस-वे दिल्ली और गुड़गांव के बीच ज़रूरी रफ़्तार मुहैया कराता है। लेकिन बेचारा बेहद ख़तरनाक दुर्घटनाएं होने के लिए भी बदनाम है। क़रीब एक महीना पहले यहां से गुज़रना हुआ। हल्की बूंदा-बांदी के बाद टोल प्लाज़ा के पास इस जगह पर लगे टावर की
 
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सूरज की करामात

पिछली पोस्ट में सूरज की करामात का ज़िक्र किया था तो इस पोस्ट में उसी कड़ी को आगे बढ़ा रहा हूं। उस रोशनी में कुछ ऐसा है कि वो जिसे चाहे उसे रहस्यमयी और दिलचस्प बना सकती है। एक साधारण तस्वीर को असाधारण बना सकते की क़ुव्वत उसी में है। मुझे नहीं लगता कि एक
 
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