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कुछ सूफियाना सा..

इस बार कुछ शेर हैं, जिन से बात शुरू करता हूँ..तू सुन के मेरी इल्तिज़ा क्या करेगाजो पहले से सोचा हुआ था, करेगा ... औरआइना तुम भी हो, आइना मैं भी हूंदेखूं तो आती है लौट कर रोशनीमौला ऐसा सलीका हमें बख्श देहम लुटाते रहें उम्र भर रोशनी... ...शेर हमारे साथी
 
विवेक.
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बात नहीं समझानी आयी

पढ़ते पढ़ते हम सोये तो, ख्वाब में वही कहानी आयीइक पहचाना दिवाना दिखा और सूरत इक बेगानी आईलाल उजाला, हरा अंधेरा और दूध सा सूरज भी थाजो भी देखा, तुझको पुकारा, हर इक तेरी निशानी आईसच कहते हैं कब दिखता है, दिल में छुपा हुआ आंखों कोकभी कबीरा मुस्काया और,
 
Rajey Sha