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ग़ैरज़रूरी बहसों में अटके हुये

ऐसे क्या कारण हैं कि हिन्दी कि फॅमिली बेकग्राउंड होते हुआ भी हिन्दी विषय मे कोई डिग्री नहीं हैं बहुतो से ब्लॉगर के पास ??  क्यूँ ?? क्षमा चाहूँगा, रचना… मेरा  जैसे  आपसे मतभेद योग चल रहा है । आपका यह प्रश्न ब्लागर के सँदर्भ में तो क्या,
 
डा. अमर कुमार
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अथ क़ाफ़िर कथा

शिवभाई की पोस्ट पर कल देखने को मिला कि, हड़ताली ब्लागरों में मैं भी शहीद हो गया हूँ ! नहीं भाई, मेरा हड़ताल उड़ताल नहीं चल रहा है..तेल वाले हड़ताल पर थे.. या हड़ताल वाले गये तेल लेने ! आप तो दिन तक गिन ले गये…  कि, 16 दिन से गायब हूँ । ‘ काना [...]
 
डा. अमर कुमार
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क्षमा करें डा. मान्धाता

ब्लाग में आख़िर क्या लिखा जाना चाहिये..  पढ़ कर मेरी प्रतिक्रिया रोके ना रूक सकी । बड़ा अनुकूल विषय है,सो टिप्पणी के रूप में यह पोस्ट यहीं चेंप देता हूँ । डा. मान्धाता जी, आपने मेरा मनोनुकूल विषय उठाया है, अतएव.. सहमत हूँ, कि हिन्दी ब्लागिंग स्तरहीनता
 
डा. अमर कुमार
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क्षमा करें डा. मान्धाता

ब्लाग में आख़िर क्या लिखा जाना चाहिये..  पढ़ कर मेरी प्रतिक्रिया रोके ना रूक सकी । बड़ा अनुकूल विषय है,सो टिप्पणी के रूप में यह पोस्ट यहीं चेंप देता हूँ । डा. मान्धाता जी, आपने मेरा मनोनुकूल विषय उठाया है, अतएव.. सहमत हूँ, कि हिन्दी ब्लागिंग स्तरहीनता
 
डा. अमर कुमार
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बिन बुलायी, एक अपूर्ण कविता

आज व्याधिग्रस्त माया श्रीवास्तव धुर 5 बजे अवतरित हुईं, टालने का प्रश्न नहीं.. पर थोड़ी व्यग्रता थी क्योंकि यह आज के परामर्श समय की अंतिम बेला थी, हिस्ट्री लेने के दौरान मेरे मुँह से ‘ परिवेश ‘ शब्द का उल्लेख  हुआ । बस, उनके पतिदेव महोदय
 
डा. अमर कुमार
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बिन बुलायी, एक अपूर्ण कविता

आज व्याधिग्रस्त माया श्रीवास्तव धुर 5 बजे अवतरित हुईं, टालने का प्रश्न नहीं.. पर थोड़ी व्यग्रता थी क्योंकि यह आज के परामर्श समय की अंतिम बेला थी, हिस्ट्री लेने के दौरान मेरे मुँह से ‘ परिवेश ‘ शब्द का उल्लेख  हुआ । बस, उनके पतिदेव महोदय
 
डा. अमर कुमार
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कभी कभी मेरे दिल में..

….  यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है …  क्या केवल यही तो नहीं,   कि   " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,
 
डा. अमर कुमार
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कभी कभी मेरे दिल में..

….  यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है …  क्या केवल यही तो नहीं,   कि   " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,
 
डा. अमर कुमार
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जिन्दगी की रेल कोई पास कोई फेल

आज अभी चँद मिनटों पहले एक पोस्ट पढ़ी.. निठल्ले , सठेल्ले और …………ठल्ले उब दिनों एक गाना सुना करता था, उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ भी लिया ( अभी  ईस्वामी  की टिप्पणी के बाद यह अँश जोड़ा है.. धन्यवाद स्वामी ! ) तो एक गाना सुना
 
डा. अमर कुमार
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जिन्दगी की रेल कोई पास कोई फेल

आज अभी चँद मिनटों पहले एक पोस्ट पढ़ी.. निठल्ले , सठेल्ले और …………ठल्ले उब दिनों एक गाना सुना करता था, उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ भी लिया ( अभी  ईस्वामी  की टिप्पणी के बाद यह अँश जोड़ा है.. धन्यवाद स्वामी ! ) तो एक गाना सुना
 
डा. अमर कुमार
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ग़ैरज़रूरी बहसों में अटके हुये

ऐसे क्या कारण हैं कि हिन्दी कि फॅमिली बेकग्राउंड होते हुआ भी हिन्दी विषय मे कोई डिग्री नहीं हैं बहुतो से ब्लॉगर के पास ??  क्यूँ ?? क्षमा चाहूँगा, रचना… मेरा  जैसे  आपसे मतभेद योग चल रहा है । आपका यह प्रश्न ब्लागर के सँदर्भ में तो क्या,
 
डा. अमर कुमार