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No Problem दुख इनसान को इतना दुखी नहीं करता जितना कि उसे कुबूल न कर पाना ।

दुनिया की हर चीज़ की रचना जोड़े में की गई है ।हर ऐब से पाक है अल्लाह , जिसने सभी चीज़ों को जोड़े में पैदा किया। -पवित्र कुरआन,यासीन,36 सुख का जोड़ा दुख है । जो लोग केवल सुख के अभिलाषी हैं , वास्तव में वे एक ऐसी चीज़ चाहते हैं जो इस दुनिया में आज तक न तो किसी
 
DR. ANWER JAMAL
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आस्तिक होने के लिए केवल ईश्वर का गुणगान करना ही काफ़ी नहीं है बल्कि उसकी बताई हुई ‘जीवन पद्धति‘ का पालन करना भी ज़रूरी है । Follow The Truth

हम सब एक समाज में रहते हैं । सभी सुख , कल्याण और आनन्द चाहते हैं । सभी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं । एक बेहतर समाज केवल तभी आकार ले सकता है जबकि उसके सदस्य बेहतर हों । समाज के सदस्य तभी बेहतर हो सकते हैं जबकि वे बेहतर नियमों की पाबन्दी करें
 
DR. ANWER JAMAL
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बजट

देश का बजट बनाते हो हर साल कीमते बढ़ती हैं चीज़ों की हर साल. एक बार तो बनाओऐसा बजट किकुछ कीमतें बढें लड़कियों की भी..मिट्टी के मोल भी नहीं खरीद रहा जिन्हेविवाह के बाज़ार में कोई !विवाह के इस भव्य बाज़ार मेंलड़कों की धुँआधार बिक्री से चकराने लगा है सिर अब...अरे
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कौन सी भूख ज़्यादा बड़ी है???

प्रिय तुम्हारी बाहों मेंपाती हूँ मैं असीम सुख,भूल जाना चाहती हूँसारी दुनियावी बातों को,परेशानियों को,फिर क्यों ??याद आती है वो लड़कीचिन्दी-चिन्दी कपड़ों में लिपटीहाथ में अल्यूमिनियम का कटोरा लियेआ खड़ी हुई मेरे सामनेप्लेटफ़ार्म पर,मैंने हाथ में पकड़े
 
mukti
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कौन अधिक सुखी ---आदि मानव या आधुनिक मानव ?

आदि मानव रहता था ---हरे भरे घने जंगलों में ।जहाँ था, नीला आसमान ,स्वच्छ वायु, स्वच्छ शीतल नीर के झरने व नदियाँ , हरी भरी वादियाँ , शांत वातावरण । कोई भाग दोड़ नहीं , कोई चिंता नहीं, जो मिल गया -खा लिया , भले ही कंद मूल ही सही ।आधुनिक मानव रहता है
 
डॉ टी एस दराल
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बिखरे हुए.. जैसे बिखरी बोली..

सिर ओले पड़ेंगे, उंगलियों पर घमौरियां उगेंगी, आवारा कोई बिल्‍ली आकर बरौनियां चूम जायेगी, प्रभुवर, ऐसे में गाल कौन ज़बान मचायेंगे? मतलब भाषा कौन राह, रस्‍ते, पगडंडी, राजमार्ग जाएगी, हमें बुझाएगी? ‘दुनिया को कैसे देखें!’ तो कोई नहीं ही बतायेगा, किस ज़बान
 
Pramod Singh
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काम के सबक

दौड़ना दायें बायें, दौड़ना जिधर मिले रस्‍ता. दौड़ना कि छाती मुंह को आए, और ज़बान पैर के छालों-सा छिले जायें. फिर भी दौड़े चले जाना, जैसे ज़िंदगी की आखिरी दौड़ हो. कि न दौड़ने से कठुआता काट खाता, थरथराता हो मन. कि दौड़ते रहना ज़ि‍न्‍दा होने की इकलौती वज़ह
 
Pramod Singh
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स्वार्थी...

मुझे मालूम हैजब आपने देखा होगा पहली बार मुझेकितने खुश हुए होंगे आप शायद इतना जितना कभी नहींआपको मेरे रूप में अपना उत्‍तराधिकारी मिला था उत्‍तराधिकारी... आपकी सुखों का, आपके सपनों का,आपके भविष्य का, आपके अपने परिवार का मुझे मालूम है, आपने मुझे कभी अपने
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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शायद अतृ्प्ति ही मनुष्य का प्रारब्ध है!!!

विधाता ने जब इस सृ्ष्टि की रचना की तो एक अत्यंत सुन्दर देहधारी जीव का निर्माण किया और उसे नाम दिया मनुष्य। तब उससे बोले " जाओ भद्र्! ये पृ्थ्वी तुम्हारा क्रीडास्थल है,बुद्धि-ग्यान समर्थ दस इन्द्रियां तुम्हारे पास हैं;यथेष्ट सुखोपभोग करने के लिए जैसा उचित
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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जिंदगी से कैसे हो सकता है कोई खफा - मुंबई में आतंक

दंगे दुख देते हैं सुख को हर लेते हैं जाने कौन सी खुशी देते हैं हर आतंकी को ? खुशी पर लगता पहरा दुख बढ़ता जाता गहरा हर कोई है डरा डरा सा अब आतंकी भी है सहमा। मर्ज कोई दवा कोई हो जांच शरीफ की हर दफा हो आतंकी फिर बच निकलता है या फिर नया ही पनपता है। बम
 
अविनाश वाचस्पति
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