भारत से सुकेश साहनी की दो लघुकथाएं
प्रतिमाएं
-सुकेश साहनी
उनका काफिला जैसे ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के नज़दीक पहुँचा, भीड़ ने घेर लिया। उन नग-धड़ंग अस्थिपंजर-से लोगों के चेहरे गुस्से से तमतमा रहे थे। भीड़ का नेत्तृव कर रहा युवक मुट्ठियाँ हवा में लहराते हुए चीख रहा था, “मुख्यमंत्री—मुर्दाबाद
Apr 21 2010 05:15 AM



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