हिंदी में नहीं रहा ……
सुंदर चंद ठाकुर की एक कविता हिंदी में हिंदी में नहीं रहा
शब्द से रोटी मांगने का रिवाज
शब्द यहां भूख है
दीवानगी है
कैद भी और निर्वाण भी
शब्द हाशिए पर लड़ाई है
जो लड़ी जाती है
अंतहीन युद्ध की तरह और याद रहे आपकी शहादत पर
न आंसू बहाए जाते हैं
न तालियां बज
Dec 03 2009 01:17 AM



Shuffle








