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सच्चा सपूत - baal-kavita

देश का प्रेम भरा हो जिसमें देश-भक्त कहलाता है , जो भावों से भरा हुआ हो देश भक्ति लिख पाता है ।अपनी मां अपनी मिट्टी से जिसका गहरा नाता हो बलिदानी वीरों सम्मुख जो नत-मस्तक हो जाता हो अपने वतन लिए अपने लिख-लिख कर भाव बहाता हो कुर्बानी सुन-सुन जिसके नयनों से
 
सीमा सचदेव
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कान्हा की बाल-लीलाएं-6 ( ब्रह्मण्ड दिखाना )

जब कान्हा बहुत छोटे थे तो बाल-स्वभाव वश वो भी मिट्टी खाते थे । मां उनको बहुत समझाती पर कान्हा मां के डर से छुप-छुपकर मिट्टी खाने लगे ।एक बार कान्हा जब सबसे चोरी छुप-छुपकर मिट्टी खा रहे थे तो उन्हें दाऊ भैया नें देख लिया और पकड कर मां के पास ले आए । मुंह
 
सीमा सचदेव
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कान्हा की बाल-लीलाएं-3

http://www.shubhamsachdeva.blogspot.com/गोकुल में मुझे छोड के आओ नन्द बाबा की कन्या लाओ सूप में कान्हा को लिया डाल चला वासुदेव धीमी सी चाल बाहर वर्षा और तूफ़ान सिर पर बैठे स्वयं भगवान शान्त चित्त मन में विश्वास पहुंचा जब यमुना के पास तेज़ धार और पानी गहरा
 
सीमा सचदेव
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बूझो तो जाने

बूझो तो जाने१.बीच चौराहे करे कमालरँग है इसका लाल-लालजब यह अपना रूप दिखाएतो चलते वाहन थम जाएँ२.बीच चौराहे खडी पुकारेदेखो मुझे सारे के सारेपीली परी है बीच बाज़ारहो जाओ चलने को तैयार३.हरे रँग की मै हू रानीमै तो हूँ तुम सबकी नानीजब भी मै कोई करूँ इशारेभाग पडे
 
सीमा सचदेव
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थैंक्यू अंकल अमर ( कविता )

नमस्कार ,नन्हामन की नई सजावट और परिकल्पना देखकर किसी की भी पहली आवाज निकलेगी....वा......ओ.ओ.ओ.ओ.ओ.ओ.ओ.ओ । और इसे सजाने संवारने का पूरा श्रेय है डा. अमर जी को , जिसके लिए हम उनके तहे दिल से आभारी हैं । आज की कविता नन्हे-मुन्नों की तरफ़ से अमर अंकल के
 
सीमा सचदेव
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बि‍ल्‍ली बोली म्‍याउं म्‍याउं

इस कविता लिखने का श्रेय मैं देना चाहुंगी राजेशा जी को जिन्होंने प्रथम चार पंक्तियां लिखकर मुझसे कविता पूरी करने को कहा और मैनें एक प्रयास किया , प्रयास कितना सफ़ल है यह आप लोग ही बताएंगे ।बि‍ल्‍ली बोली म्‍याउं म्‍याउंदूध पि‍युं या चूहे खाउंव्रत रखूं या
 
सीमा सचदेव
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गधे नें बसता एक लिया

गधे नें बसता एक लियाविद्यालय में पहुंच गयाए.बी.सी. जब बोली मिसलिया वहां से गधा खिसकबसता कक्षा में ही छोडादेख रहा था सब कुछ घोडागधे की जगह पे जाकर बैठामैडम को भी हो गया धोखापढकर घोडा शहर को आयाकुछ तो अपना नाम कमायाकिंतु अनपढ रहा गधाढोता रहता भार सदा
 
सीमा सचदेव
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जीव - बचाओ अभियान

एक घने जंगल में बच्चोरहते जंगली जानवरघने पेडों की ठण्डी छायाही था उनका घरनदी तल या झील का जल पी लेते और सुस्तातेजो भी मिलता खा लेतेजंगल में समय बितातेखुश सारे जानवर रहतेऔर नहीं किसी का डरपर उनके प्यारे से घर कोलग गई बुरी नज़रइक दिन एक शिकारी आयादेख के वो
 
सीमा सचदेव
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आप बन सकते हैं नन्हामन के सदस्य

नमस्कार दोस्तो ,मुझसे कुछ दोस्तों द्वारा मेल द्वारा पूछा गया कि नन्हामन का सदस्य कैसे बना जा सकता है ?मैं उन सभी दोस्तों से विनम्र निवेदन करना चाहुंगी कि नन्हामन बाल-साहित्य से संबंधित ऐसी ई-पत्रिका है जिसमें बच्चों की मानसिकता के अनुरूप हर विषय पर
 
सीमा सचदेव
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मां-मां मुझको भूख लगी - प्रतीक जी के चित्र पर आधारित कविता

मां-मां मुझको भूख लगीजलदी क्यों न तू जगीदेखो मेरा खाली पेटहो जाऊंगा स्कूल से लेटसैंडविच या फ़िर मैगी नूडल्सकोल्ड ड्रिण्क दो साथ में बसया फ़िर दे दो सूप कनूरबच्चों में जो है मशहूरया पिज़ा या दे दो बर्गरया फ़िर पूरी चना भरकरया भज्जिया या दो समोसाहो चटनी के साथ
 
सीमा सचदेव
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हाथी बन गया साथी

हाथी बन गया साथीजंगल मे रहता इक हाथीनही बनता वो किसी का साथी अकेले ही जंगल मे घूमताबाकी सबको को छोटा कहतामुझ सा जंगल मे न कोईसोच के सब मर्यादा खोईमैं तो सबसे बड़ा यहां परकर सकता हूँ राज जहाँ परजो कोई भी मुझसे टकराएवो तो बस मुँह की ही खाएक्यो मैं इनको
 
सीमा सचदेव
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वर्णमाला - भाग-१ स्वर ज्ञान

वर्णमाला - स्वर ज्ञानअ अनार और आ से आमहमे तो बस खाने से कामइ इमली और ई से ईखबच्चो यह सब लेना सीखउ उल्लू और ऊ से ऊँटबच्चो कभी न बोलना झूठऋ ऋषि तपस्या मे रतबच्चो इनको कहते स्वरए एडी और ऐ से ऐनकबच्चे करते कितनी रौनकओ ओखल , औ से औजारबच्चो करना सबसे प्यारअं
 
सीमा सचदेव
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हितोपदेश 19 - मूर्ख गधा

इक धोबी के पास गधाकरता रहता काम सदाकपड़े सारे उसके उठाताऔर नदी पर छोड़ के जातालेता धोबी बहुत सा कामगधे को न मिलता आरामन मिलता खाना भर पेटभूखे पेट ही जाता लेटहो गया गधा बहुत कमजोरनहीं रहा था उसमें जोरपहुँच गया वह मरण किनारेऔर अब धोबी मन में विचारेजो इसका
 
सीमा सचदेव
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राष्ट्रीय प्रतीक

प्यारे बच्चो कल मैने आपको भारत के कुछ राष्ट्रीय चिन्हों की जानकारी दी थी । आज देखिए कुछ और राष्ट्रीय प्रतीक ८.राष्ट्रीय गीतवन्दे मातरम मां का वंदनगाए हर इक भारतीय जनबंकिम चन्द्र चैटर्जी का गानराष्ट्रीय गीत हिन्द का महान ९. राष्ट्रीय-वाक्य'सत्यमेव जयते'
 
सीमा सचदेव
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झाँसी की रानी

झाँसी की रानी (कथा-काव्य)झाँसी की रानी की कहानी कथा-काव्य के माध्यम सेबच्चो एक बहादुर नारीमाने जिसको दुनिया सारी लक्ष्मी बाई था उसका नामकिए अनूठे उसने काममाँ भगीरथ की सन्तानपिता मोरोपन्त की जानकाशी नगरी जन्म स्थानमनु नाम से मिली पहचानगंगाधर सँग विवाह
 
सीमा सचदेव
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एक था चुन्नु एक थी मुनिया

एक था चुन्नु एक थी मुनियादोनों इक दूजे की दुनियारेत के टीलों पर जातेपैर पे अपने घर बनातेथपथपा कर रेत जमाकरधीरे से फ़िर पैर हटाकरदेख के मुनिया खुश हो जातीसुन्दर सा फ़िर घर सजातीउस पर एक बनाती कुटियाजहां पे होगी उसकी खटियाचुन्नु की भी जगह बनातीखरी बात फ़िर कह
 
सीमा सचदेव
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मेरी पहचान

मेरी पहचानदो आंखें और दो ही कान एक नाक मेरी पहचानदो बाहें और दो ही हाथमिलकर काम करें ये साथसिर पर भूरे लम्बे बालचिकने चिकने मेरे गालदो टांगें और दो ही पैरभागुं जिससे लगे न देर
 
सीमा सचदेव
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हितोपदेश 18- चूहे ने मारी बिल्ली

एक बार बिल्ली थी एकचूहे खा जाती अनेकदुःखी थे उससे चूहे सारेइक दिन सारे मिल के विचारेसोचा मिलकर एक उपायबिल्ली को जा दिया बतायबोले अपने मन में विचारोरोज क्यों इतने चूहे मारोइतने चूहे रोज मारोगीकितने दिन तक पेट भरोगीखत्म हो जाएंगे चूहे जबबोलो क्या करोगी
 
सीमा सचदेव