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महबूब खान … भारतीय सिनेमा के अग्रणी निर्माता-निर्देशक

भारतीय सिनेमा को आधुनिकतम तकनीकी से सँवारने में अग्रणी निर्माता-निर्देशक महबूब खान का अहं किरदार रहा है। महबूब खान हॉलीवुड के फिल्मों से बहुत अधिक प्रभावित थे और भारत में भी उच्च स्तर के चलचित्रों का निर्माण करने में जुटे रहते थे। सन् 1951 में उनके
 
जी.के. अवधिया
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राजा हरिश्चन्द्र – भारत की पहली फीचर फिल्म

दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्मित तथा सन् 1913 में प्रदर्शित फिल्म “राजा हरिश्चन्द्र” को भारत की पहली फीचर फिल्म होने का श्रेय प्राप्त है। “राजा हरिश्चन्द्र” चार रीलों की लम्बाई वाली एक मूक फिल्म है। इस फिल्म की कहानी हिन्दू
 
जी.के. अवधिया
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भारतीय सिनेमा का स्वर्णिम काल – सन् 1950 से 1980

भारतीय सिनेमा विकास के रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ता ही गया और उसने मुड़कर कभी पीछे नहीं देखा। किंतु सन् 1950 से उसका स्वर्णिम काल प्रारंभ हुआ। रोचक कथानकों और सुमधुर गीत संगीत के मेल होने के कारण अद्वितीय फिल्में बनने लगीं। राज कपूर, महबूब खान, गुरु दत्त,
 
जी.के. अवधिया
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संगीत के असाधारण ताल

जरा याद कीजिये फिल्म काला बाजार के गीत ‘अपनी तो हर आह एक तूफान है…..’ को। या फिल्म दोस्त के गीत ‘गाड़ी बुला रही है…..’ को। कुछ विशेषता नजर आती है इनमें? जी हाँ इन गानों में रेलगाड़ी की आवाज को ताल के रूप में इस्तेमाल
 
जी.के. अवधिया