सारंगा तेरी याद में..
हंसी-मज़ाक की बतकही देखते-देखते तीखे झगड़े में बदल गई थी. ऑडिसियस (किताब उसी के हाथ में थी) ऊपर हवा में किताब लहराता भावुक होकर चीख रहा था, ‘आप भूलिए मत, अदम ग़ुलाम नहीं थे! उनकी तबियत हुई, चीन गए. लोकतंत्र व्यक्ति के विचार को ही नहीं, उसकी भौतिक गति का
Jun 11 2010 03:11 PM



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