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प्रयोजन

एक दिन महान मध्ययुगीन इटालियन कवि दांते एलीघरी एक चिड़ियाघर के पास से गुज़रे और उन्होंने एक पिंजड़े में कैद शेर को देखा. पिंजड़े के भीतर बेबस बैठे शेर ने दांते के ह्रदय में एक अमर छंद रच दिया जो बाद में उनके महान काव्य ‘द डिवाइन कॉमेडी’ में
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विष्‍णु नागर होने का मतलब

नागर जी से मेरा पहला परिचय उनके असंख्य पाठकों की तरह नवभारत टाइम्स के जरिए ही हुआ। ये मेरे लेखकीय शैशवकाल के दिन थे, जब पढ़ने की भूख कुछ भी पढ़वा लेती थी और जिन लेखकों को पत्र-पत्रिकाओं में किसी ना किसी रूप में पढ़ता रहा, उनमें नागर जी अहम थे। उन दिनों मुझे
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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सर्बिया का चमकीला नक्षत्र - ईवो आंद्रिक

दो साल की उम्र में जिस बालक को पिता अनाथ छोड़ जाएं, उस के भविष्य की कल्पना ही भयावह होती है। लेकिन जीवट हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता? ऐसा ही हुआ, 1961 के नोबल पुरस्कार विजेता कथाकार-उपन्यासकार ईवो आंद्रिक के साथ। 9 अक्टूबर, 1892 को जन्मे ईवो को पिता की
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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जॉर्ज लुईस बोर्खेज़

जॉर्ज लुईस बोर्खेज़ [Jorge Francisco Isidoro Luis Borges Acevedo (1899 – 1986)] अर्जेंटीना के महान विचारक थे. वैसे तो वे कवि, कथाकार, निबंधकार, अनुवादक, और पत्रकार भी थे पर मैं उन्हें मुख्यतः विचारक ही मानता हूँ. उनके लेखन पर सर्वेंटीज़, काफ़्का, और
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बेचैन आत्‍मा का कवि : इयुजीनियो मोन्‍ताले

समकालीन भारतीय कविता, विशेष रूप से हिंदी कविता को विश्‍व के जिन कवियों ने बेहद प्रभावित किया है, उनमें इतालवी कवि इयुजीनियो मोंताले का नाम प्रमुख है। आधुनिक इतिहास, दर्शन, प्रेम और मानवीय अस्तित्व की विविध दुविधाओं और बेचैनियों को गीतात्मक सौंदर्य और
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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कलम से खुदाई करने वाले शेमस हीनी

आयरलैंड के कवियों में शेमस हीनी ऐसे कवि हैं, जिनकी कविताओं ने देश-काल की सीमाओं को लांघते हुए हर काव्यप्रेमी का दिल जीता है। १३ अप्रेल, १९३९ को एक किसान परिवार में जन्मे शेमस हीनी ने अपने ग्रामीण परिवेश में जो कुछ बचपन से देखा-भोगा, उसे अपनी कवितओं में
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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समाज के लिए समर्पित लेखिका - पर्ल. एस. बक

अमेरिकी साहित्य के इतिहास में पर्ल एस. बक पहली महिला रचनाकार हैं, जिन्हें साहित्य में १९३८ में नोबल पुरस्कार मिला। अमेरिका में ईसाई मिशनरी परिवार में १८९२ में जन्मी पर्ल के जीवन का अधिकांश चीन में बीता। जन्म के बाद ही वे माता-पिता के साथ चीन आ गईं थीं।
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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मौहब्बत कोई ठुकराने की चीज़ है

—चौं रे चम्पू! हमाई बगीची-कमैटी नै सोची ऐ कै तोय बगीचीसिरी की उपाधी दई जाय, तोय कोई आपत्ती तौ नायं?—आपत्ति क्यों होगी चचा? लिख कर दिए देता हूं।—लिखे कौ कोई भरोसा नायं रे! कल्ल कूं पलट जाय कै बगीची के पुरस्कार में का धरौ ऐ, मैं तौ उद्यान-पीठ कौ पुरस्कार
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साहसी और प्रतिभावान लेखक: वोले शोयिंका

नाइजीरिया जैसे छोटे से देश को विश्‍व साहित्य में एकमात्र नोबल पुरस्कार दिलाने का श्रेय महान अश्‍वेत कवि, नाटककार और उपन्यासकार वोले शोयिंका को जाता है। शोयिंका पहले अश्‍वेत अफ्रीकी रचनाकार हैं, जिन्हें 1986 में नोबल पुरस्कार मिला। कई बार भारत आ चुके
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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आधुनिक अरबी का महान रचनाकार - नजीब महफूज

अरबी साहित्य के इतिहास में पहला और अब तक का अंतिम नोबल पुरस्कार मिस्त्र के नजीब महफूज को 1988 में मिला। लेकिन नजीब इस पुरस्कार से तीन दशक पहले ही अरबी भाषा के इतिहास में वो मुकाम बना चुके थे, जिसमें वे बाल्जाक, तोलस्तोय और चार्ल्‍स डिकेंस के समकक्ष नजर
 
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सार्थक सृजन की ओर अग्रसर सुरेश यादव

सुरेश यादव का नाम साहित्य-जगत में सुपरचित है। उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का अवैतनिक सम्पादन किया जिनमें 'संधान','सर्वहिताय' एवं 'सहजानन्द' प्रमुख हैं। आपका प्रथम कविता संग्रह - 'उगते अंकुर' वर्ष 1981 में प्रकाशित हुआ। दूसरा कविता संग्रह -'दिन अभी
 
Ram Shiv Murti Yadav
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मोगली का सर्जक-रूडयार्ड किपलिंग

अगर जन्म के आधार पर नागरिकता मानी जाए तो मुंबई में जन्मे रूडयार्ड किपलिंग पहले भारतीय थे, जिन्हें 1907 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। किपलिंग अंग्रेजी भाषा के पहले लेखक थे, जिन्हें अब तक रिकार्ड सबसे कम उम्र यानी 42 वर्ष की आयु में नोबल पुरस्कार
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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विडम्बनाओं के भंवर में फंसा रचनाकार - सेमुएल योसफ एग्नान

एफ्रो एशियाई भाषा परिवार की हिब्रू भाषा को बाइबिल की पुरानी भाषा होने के कारण हमारी संस्कृत की तरह पवित्र भाषा के रूप में जाना जाता है। प्राचीनता के कारण इस दुर्लभ, दुर्भेद्य और इतनी पुरानी भाषा के आधुनिक साहित्य को अब तक सिर्फ एक बार नोबल पुरस्
 
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तन को बेचैन भटकना था, मन में कस्तूरी रहनी थी

डॉ . अशोक कुमार मिश्र मेरठ शहर का घनी आबादी वाला मुहल्ला है ब्रह्मपुरी । दिल्ली रोड के करीब बसे इसी मुहल्ले के मुख्य मार्ग पर है परशुराम हलवाई की दुकान, जिससे सटी गली में है हिंदी काव्य मंच के समर्थ गीतकार भारत भूषण का मकान । गली में घुसने पर जो पहला
 
dr ashok kumar mishra
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मैं महज एक काला हब्‍शी हूं

नोबल पुरस्कार के इतिहास में अब तक सिर्फ तीन अश्वेत साहित्यकारों को पुरस्कृत किया गया है, जिनमें वोले शोयिंका और टोनी मॉरिसन के साथ डेरेक वालकोट का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। वेस्टन इण्डीज के छोटे-से देश सेंट लूसिया के बेहद प्रतिष्ठित कवि डेरेक
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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प्रतिरोध का कवि : आक्तोविया पाज

भारत में जिन विश्‍वविख्‍यात साहित्‍यकारों को बेहद आत्‍मीयता के साथ जाना जाता है, उनमें मेक्सिकन कवि ऑक्‍टोविया पाज का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। इसके दो कारण हैं, पहला तो यह कि वे भारत में मेक्सिको के राजदूत रहे और दूसरा यह कि भारतीय दर्शन, परंपरा
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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पहला नोबल विजेता कवि स्युली प्रूदोम

जब अल्‍फ्रेड नोबल ने प्रकृति के अध्‍ययन और इससे वाबस्‍ता ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में नई खोजों को सम्‍मानित करने के लिए नोबल पुरस्‍कार की परिकल्‍पना की थी तो उसमें साहित्‍य को भी शामिल किया था। इसके पीछे उनकी सोच यह थी कि विभिन्‍न देशों के बीच शांति
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi