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सामाजिक कैंसर है हिन्दू राष्ट्रवाद

  भारत में ऐसे लोगों की किल्लत नहीं है जो राष्ट्रवाद का आए दिन डंका बजाते रहते हैं। राष्ट्रवाद का नारा देने वाले यह भूल जाते हैं राष्ट्रवाद आधुनिक युग का कैंसर है। यह बात रवीन्द्रनाथ टैगोर से लेकर प्रेमचंद तक सभी बड़े भारतीय बुद्धिजीवियों ने
 
jagadishwar chaturvedi
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लोकतंत्र में निर्जन एकांत नहीं होता मकबूल फिदा हुसैन

एफ एम हुसैन साहब बहुत बड़े चित्रकार हैं,भारतीय चित्रकला परंपरा में उनका गौरवपूर्ण स्थान है। भारतीय कला के उन्होंने अनेक नए मानक बनाए और तोड़े है। उनकी कला में भारत की आत्मा निवास करती है। कलाकार के रंगों के साथ उसके देश का अभिन्न संबंध होता है। उनकी कला
 
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संघ जानता है पश्चिम बंगाल और गुजरात का अंतर-2-

जिस तरह किसी संत-मंहत और सन्यासी के हजारों-करोड़ों भक्त भारत में मिलेंगे, उसके पीछे खड़ी अनुगामी भक्त मंडली मिलेगी,ठीक वैसी ही अनुगामी जनता पश्चिम बंगाल में तैयार करने में लाल को सांगठनिक सफलता मिली है। भक्त जनता भारत में हमेशा से महान रही है। भक्त
 
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स्पीड युग का नायक नरेन्द्र मोदी

(मोदी के शासन में साम्प्रदायिक दंगे का दृश्य)मासमीडिया दुधारी तलवार है। दर्शकों के लिए  बिडम्बनाओं की सृष्टि करता है। मासमीडिया के द्वारा सृजित अर्थ वहीं पर नहीं होता जहां बताया जा रहा है बल्कि अर्थ अन्यत्र होता है। अर्थ वहां होता है जहां विचारधारा
 
jagadishwar chaturvedi
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आरएसएस का मूक हिन्दू यूटोपिया

   (मोदी के गुजरात में हुए दंगे का एक दृश्य) मोदी ने मूक हिन्दू यूटोपिया निर्मित किया है। इसमें सहज धर्मनिरपेक्ष वातावरण असहिष्णु लगता है। नागरिकों ने अपनी जिम्मेदारी संघ के कंधों पर डाल दी है और अपने को जिम्मेदारी से मुक्त कर लिया है। मूक
 
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फासीवाद के 14 लक्षण

डा. लॉरेंस ब्रिट डा. लॉरेंस ब्रिट – एक राजनीतिक वैज्ञानिक जिन्होंने फासीवादी शासनों जैसे हिटलर (जर्मनी), मुसोलिनी (इटली ) फ्रेंको (स्पेन), सुहार्तो (इंडोनेशिया), और पिनोचेट (चिली) का अध्ययन किया और निम्नलिखित 14 लक्षणों की निशानदेही की है; 1. श
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अंजन गाँव में हुई साम्प्रदायिक झड़प पर तथ्य संकलन के आधार पर तैयार की गयी एक रिपोर्ट:-

घटनायें जब घट चुकी होती हैं हमारे पास बताने के लिये ढेर सारे तथ्य होते हैं, हमारी मुट्ठीयों में संकलित आंकड़े की एक पोटली होती हैं और चेहरे पर विवशता की छाया। जब चीख-चीख कर हम गोधरा की नृशंसता का बयान कर रहे होते हैं ठीक उसी समय हमारे आस-पास पसरी होती
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शर्मनाक है मुसलमानों के नाम पर राजनीति

फ़रीद खान अभी कुछ ही दिन पहले की बात है कि जब अमेरिका के साथ परमाणु समझौता गरम था तब मायावती ने अपना मुस्लिम कार्ड फेंका और बयान दे दिया कि चूँकि मुस्लिम समुदाय अमेरिका के विरोध में है इसलिए यह डील नहीं होनी चाहिए। मुझे तो ऐसा कोई मुसलमान नहीं दिखा ज
 
अभय तिवारी