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यह लीजिये खजाने की चाबियों का गुच्छा!

आज की पोस्ट में कोई गाना नहीं सुनायेंगे पर आपको गाने के खजाने की चाबी नहीं बल्कि चाबियों का गुच्छा ही थमा देंगे। लूट लें जितना लूटने की हिम्मत आपमें है। अन्तर्जाल पर गाने सुनाने वाले बहुत से जालस्थल हैं, पर वे सिर्फ फिल्मवाइज गाने ही सुनाते हैं या फिर
 
सागर नाहर
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धोबी से ना जीत पावें तो गदहे के कान उमेठे

क्या यह कहावत इन्हीं मूर्ख सरकारी अधिकारियों के लिए तो नहीं बनी होगी, जिन्होने यह मूर्खतापूर्ण कदम उठाया आंध्र प्रदेश सचिवालय हैदराबाद , के बाहर २४ घने पेड़ों को बिला वजह काट दिया गया। इनमें से तो कुछ नीम के भी थे। किसी का कहना है नक्सलवदियों के आकस्मिक
 
सागर नाहर
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दस्तक ने किए चार साल पूरे

पिछले महीने की बारह तारीख को दस्तक ने हिन्दी चिट्ठा जगत में अपने चार साल पूरे कर लिये। पोस्ट दस तारीख को ही लिख ली पर हमेशा की तरह आलस के चलते आज एक महीने बाद ऊपर वाले लेख के साथ मिला कर पोस्ट कर रहा हूं। दस्तक चिट्ठा ने आज अपने चार साल [...]
 
सागर नाहर
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मसाला केप्सिकम और जास्मीन तेल

चौंक गए ना ऐसा अजीबोगरीब शीर्षक पढ़ कर.. ! पिछले साल खाना बनाने के कटु अनुभव के बाद सोच लिया था कि इस बार पहले से ही तैयारी कर लेनी पड़ेगी, और हर्ष भी इस बार गाँव नहीं जाने की जिद कर रहा है। सो हम दोनों के पेट का बंदोबस्त तो करना ही होगा। सो [...]
 
सागर नाहर
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आपने सुरत के रसावाले खमण खाये हैं कभी?

खाने पीने के मामले में सुरतीलालाओं का मिज़ाज़ बड़ा गज़ब का है, उन्हें ये रात दस बजे ये पता चले की वहां एक चाय का ठेला खुला है और क्या मस्त चाय बनती है तो फटाफट अपनी गाड़ी निकाल कर एक कट चाय पीने चले जयेंगे। कट चाय भले ही तीन की आती हो [...]
 
सागर नाहर
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IRCTC अब नये अंदाज में

भारतीय रेल केटरिंग एवं टुरिस्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने अपनी बोरिंग साईट को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास चालू कर दिया है। उसकी नई साईट जो कि अभी बीटा वर्जन में है, (प्रयोग के लिये चालू है) का इन्टरफेस तो बढ़िया है ही, कुछ सुविधाओं में थोड़ा फेरबदल करने से
 
सागर नाहर
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तैयारी करने में क्या हर्ज है?

तेलंगाना राज्य तो बनेगा तब बनेगा, पहले तैयारी कर लेने में क्या हर्ज है। कहीं बाद में मोटर साईकिल की नंबर प्लेट बनाने वालों ने अपने भाव बढ़ा दिये तो! देखिये लोगो ने अभी से अपनी गाड़ियों में नंबर प्लेट किस तरह बदलना शुरु कर दिया है। लोग भी कितने आशावादी होते
 
सागर नाहर
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बहुत दिन भए

एकाद दिन पहले; कई दिनों के बद लवलीजी से चैट हो रही थी। अचानक लवलीजी ने कहा आपको पंकज बैंगानीजी और गुड़िया (डॉ गरिमा) खोज रहे हैं। लवलीजी ने पंकजभाई के ब्लॉग की उस पोस्ट का लिंक बताया जिसमें मेरे सहित कुछ और ब्लॉगर के गुमशुदा होने की खबर प्रकाशित हुई थ
 
सागर नाहर
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जबरिया चिठ्ठा चर्चा

किसी ने कहा नहीं चिठ्ठा चर्चा करने को पर नारद पर किसी वजह से रात से चिठ्ठे नहीं दिख पा रहे थे सो चिठ्ठा चर्चा में अनूप जी उनकी चर्चा नहीं कर पाए तो मैने सोचा क्यों ना आज मैं भी एक बार सबके गले पड़ लूं, ज्यादा सर चढ़ाया ना अब [...]
 
सागर नाहर
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मेरे जीवन में धर्म का महत्व

कई चिठ्ठाकारों के धर्म पर विचार पढ़ कर धर्म पर लिखने का मन हुआ है, दर असल धर्म की कोई परिभाषा हो ही नही सकती, क्यों कि हर परिस्थिती, जगह ओर समय के अनुसार धर्म की परिभाषायें बदलती रहती है. में मानता हुँ कि धर्म की सही परिभाषा है “मानवता“, औ
 
सागर नाहर
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सबको सन्मति दे भगवान

दो अक्टूबर हर वर्ष की भाँति आया और चला गया, गाँधीजी के नाम पर बड़ी बड़ी बातें हुई, राजकुमार हिरानी की फ़िल्म ” लगे रहो… के बाद तो गाँधी जी कुछ ज्यादा ही प्रसिद्ध हो रहे हैं ( जिन लोगों ने गाँधी जी सिर्फ़ नोट पर देखे थे, कभी नाम नहीं सुना), वे
 
सागर नाहर
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किकोड़े मात्र अस्सी रुपये किलो!

बिल्कुल हद हो गई जी। किकोड़ा की सब्जी और अस्सी रुपये किलो!! आश्चर्य ही हो गया । कल बाजार सब्जी लेने गये और कुछ ठेलों पर बड़े करीने से सजाये एकदम हरे हरे किकोड़े दिख गये। बरसों बाद दिखे सो बड़े उत्साह से जाकर भाव पूछा .. जवाब मिला साठ रुपये किलो। बच्चों का
 
सागर नाहर
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॥दस्तक॥

एक बात समझ में नहीं आती, जब समाचार चैनलों को भाजपा से इतनी नफरत है कि दिन रात पानी पी पी कर उसे कोसने में लगे रहते हैं। जब ये इतने ही सिद्धान्तवादी हैं और इतने ही शर्म निरपेक्ष धर्म निरपेक्ष हैं तो फिर भाजपा के चुनाव के विज्ञापन भी अपने चैनलों पर क्य
 
सागर नाहर
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थोड़ा मैं भी नोस्टेलजिया लूं

सर्दी आई नहीं कि अपने घर से दूर रह रहे सभी लोग सर्दी, गाँव  और घर को याद कर बुरी तरह नोस्टेलजिया रहे है। कोई तहरी खिला रहा है तो कोई खा रहा है। सब अपने बचपन में तापी धूप- अलाव, गुड़ मूंगफली, गज़क,कुतरी हुई गाजर- मूली को याद कर नोस्टेलजिया रहे हैं;
 
सागर नाहर
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अरे, सब लोग हमें बधाई दो रे!

यह शीर्षक कहीं पढ़ा- पढ़ा सा लगता है ना! आज से दो साल पहले जिन मित्रों ने चिट्ठा लिखना शुरु कर दिया था वे सब अपने दिमाग पर जोर देंगे तो याद आ जायेगा कि ये शब्द कहां पढ़े थे। नहीं याद आया ना! चलिये मैं ही बता देता हूं यह पोस्ट हम सबकी प्रिय [...]
 
सागर नाहर
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थैंक्यू टीवी चैनल्स!

आप चौंक गये ना शीर्षक पढ़ कर! मैं अपना कॉफे रात को दस- सवा दस बजे बन्द कर घर जाता हूं तब तक श्रीमतीजी का लगभग सारा काम निबट चुका होता है या फिर कभी किसी कारण से नहीं भी निबटा तो काम के साथ साथ टीवी देखना भी चालू रहता है, और ना चाहते [...]
 
सागर नाहर