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गुलामी

अब मुझे गुलाम नही रहना , अरे तुम गुलाम कहाँ हो ? हाँ मैं गुलाम हूँ , अगर मैं अपने ही धरती पर अपने ही लोगों के खिलाफ नही बोल सकता तो मैं गुलाम हूँ , मैं अगर अपनी जाति या धरम से बाहर जाकर विवाह नही कर सकता तो मैं गुलाम हूँ , मैं उन रुढिवादी रीति रिवाजो
 
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क्रांति

हम ही समाज बनाते हैं और समाज देशों का भविष्य तय करते हैं , हम बहुत आसानी से अपनी गलती दूसरो को मसलन "सरकार " की गलती है कहकर टाल देते हैं , चलिए मैं आपको आत्मदर्शन कराता हूँ , शुरुआत मैं धरम से करता हूँ चलिए बताइए धरम चीज क्या है , हिंदू ,मुस्लिम इसा
 
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