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बारिश का स्‍वागत

सिर पर धर लो तन भीग न पाता हो जब धूप कड़ी तब छाया दे जाता छरहरी छड़ी बने डर पास न आता क्‍यों सखी साजन न सखी छातारेखांकन सुमनिका का और पंक्तियां अमीर खुसरो की याद में
 
अनूप सेठी
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अपनी बात

रिश्तांे को ढोने से तो अच्छा ही होगा...तलाक शब्द किसी भी भारतीय स्त्री की मन और उसकी अस्मिता को तार तार कर देता है। एक भारतीय स्त्री चाहे कितनी भी तकलीफ में क्यों न हो, वह आखिरी सूरत तक तलाक से दूर रहना चाहती है। वह अपना मान और प्रतिष्ठा एक परिवार में ही
 
Manoj Kumar
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विश्‍व पर्यावरण दिवस पर … वृक्ष हमारे जीवन संगी

वृक्ष हमारे जीवन संगी -आचार्य परशुराम राय     वृक्षों के बिन प्रकृति अधूरी, बिन वृक्षों के धरती नंगी। वृक्ष हमारी जीवन साँसें,  वृक्ष हमारे जीवन संगी।। वरद हस्त हैं शाखें इनकी, धारें मिट्टी पाँव तले। ज्ञान ने खोलीं अपनी पलकें, इनकी शीतल
 
मनोज कुमार
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दलाई लामा और शंकराचार्य का पटना प्रवास

गुरु पूर्णिमा के दिन पटना में दलाई लामा और पूरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्छ्लानंद जी पटना में थे। दलाई लामा और शंकराचार्य अलग अलग जगहों पर थे उन्होंने कई बड़े महत्व की बाते कही। दलाई लामा चूकी राजकीय मेहमान थे इसलिए उनकी बातो को मीडिया में काफी जगहे
 
कौशलेंद्र मिश्र
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बुन्देली लोक साहित्य के संरक्षण-संवर्धन की आवश्यकता

किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों, लोकरंजन के विविध पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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जातीय आधार पर जनगणना राष्ट्रहित में नहीं

भारत सरकार ने जातीय आधार पर जनगणना करने का निर्णय किया हैं जो अपने आप में दुर्भाग्य पूर्ण हैं। जिन कल्याणकारी योजनाओ को लछित करके ये सारी कवायद की जा रही हैं उन्हें पहले से ही संविधान में उल्लेखित किया जा चूका हैं। यह निर्णय असम्वैधानिक हैं। सिर्फ एक
 
कौशलेंद्र मिश्र
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मातृ दिवस पर ….. माँ!

माँ --- हरीश प्रकाश गुप्त "मेरे पास बंगला है, मोटर है, बैंक-बैलेंस है.... ! तुम्हारे पास क्या है ?" पैंतीस साल पहले एक महानायक केभारी-भरकम संवाद पर हावी हो गया था एक छोटा सा वाक्य, "मेरे पास माँ है !" पीढियां बदल गयी लेकिन दिवारफिल्म के शशि कपूर के उस
 
मनोज कुमार
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अपने बच्चों के भविष्य के लिए ही पानी बचाइए!!!

अभी अप्रैल माह पूरी तरह से बीत भी नहीं पाया है कि गरमी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये हैं। पारा अभी से 47 से ऊपर जाने लगा है। समाचार-पत्रों के अनुसार मानिकपुर (चित्रकूट) में पारा 49.3 तक जा पहुँचा था। गरमी की इस विकट और भयावह स्थिति के साथ-साथ बिजली का
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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विश्व स्वास्थ्य दिवस, 2010

विश्व स्वास्थ्य दिवस, 2010-आचार्य परशुराम राय आज 7वीं अप्रैल है। पूरा विश्व आज ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ मना रहा है। ‘विश्व स्वास्थ्य संस्था’ त्वरित गति से विकसित हो रही शहरीकरण सभ्यता से उत्पन्न स्वास्थ्य के लिए भयानक स्थितियों के प्रति लोगों को जागरुक
 
करण समस्तीपुरी
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इन्कलाब ! जिंदाबाद !!

नाम आज कोई याँ नहीं लेता है उन्हों का ! जिन लोगों के कल मुल्क ये सब ज़ेर-ए-नगीं था !! नमस्कार !आज इस ब्लॉग यात्रा का छः मास पूरा हुआ। आपके सहयोग, स्नेह, शुभ-चिंतन, मार्गदर्शन के लिए कोटिशः धन्यवाद ! असमंजस में हूँ कि इस अर्धवार्षिक पड़ाव पर क्या आपकी नजर
 
करण समस्तीपुरी
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इन्द्रियों पर नियंत्रण सब से बड़ा जिहाद है.

संतान की तरह सेवकों की सेवा करो.उन्हें वही खिलाओ जो तुम खाते हो.बदन से पसीना गिरने से पूर्व ही मजदूरों को उनकी मजदूरी दे दो.अनाथ और औरतों का हक मारना सब से बड़ा गुनाह है.तुम में सब से बेहतर वह है जो अपनी पत्नी के साथ सब से अच्छा व्यवहार करे.पानी कम से कम
 
शहरोज़
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नेताओं का मिशन :कमीशन दर कमीशन

हाल-बेहाल बैसाखी छोड़ , खड़ा हो मुसलमान तुष्टिकरणभाजपा नेतृत्व की सरकार हो तो हर ओर हिन्दू-हिन्दू !!और इसके बरक्स सरकार कांग्रेसी नेतृत्व की रही तो मुसलमानों  का शोर है.हमें इस तरह के शोर की मुखालिफ़त करनी चाहिए.ऐसी सारी राजनितिक क़वायद "तुष्टिकरण" के
 
शहरोज़
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कुछ ख़ास है....... !

नमस्कार मित्रों ! मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि आप हैरत कर रहे होंगे या कोफ़्त........ ये ब्लॉग का कीड़ा अब दिन में तीन-तीन बार काटने लगा ? ख्वातीन-ओ-हजरात ! अजी बात ही है कुछ ख़ास !! मैं तो बस कहने आया हूँ, "मुबारक हो ..... !!!" दरअसल आज इस ब्लॉग के
 
करण समस्तीपुरी
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बी.टी. बैगन - नीयत में अगर मुनाफा हो तो इंसानियत की उम्मीद कैसे करें...................

http://digitalimages.bhaskar.com/dainikmp/EpaperPdf/05022010/4bpl-pg17-0.pdfबी.टी. बैगन पर लम्बे समय से बहस चल रही है। दैनिक भास्कर भोपाल ने आज के संस्करण में बी.टी. बैगन पर आम जनता को समझ में आने वाली एक नॉलेज रिपोर्ट प्रकाशित की है इससे बहुत सारी बातें
 
दृष्टिकोण
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इक्कीसवीं शती के दसवें गणतंत्र दिवस पर

इक्कीसवीं शती के दसवें गणतंत्र दिवस पर -परशुराम रायदेश की संसद कीगंगोत्री से निकलीलोकहित की भागीरथीकिसकी जटा में खो गयी ?या कि कोई जह्नु आकरराह में ही पी गयाऔर लोकहितस्वार्थ की वैतरणी बहाकोई भगीरथ छल गया ? माना कि नवनिर्माण मेंधीरज भी कोई चीज हैपर पचासा
 
करण समस्तीपुरी
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मैं सुभाषचन्द्र बोस बोल रहा हूँ...............

सुभाषचन्द्र बोस उवाच- सुभाषचन्द्र बोस जयन्ती 23 जनवरी पर...............‘‘मैं अपने बचपन में अंग्रेज़ों को देश से भगाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य समझता था। बाद में गंभीर चिंतन के बाद इस नतीजे पर पहुचा कि सिर्फ अंग्रेज़ों को भगाने से ही मेरा फर्ज़ पूरा नहीं होगा।
 
दृष्टिकोण
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आज वसंत पंचमी है !

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता !या वीणावरदंडमंडितकरा, या श्वेत पद्मासना !!या ब्रह्मास्च्युत शंकर प्रभृतिर्भिरदेवाः सदाबंदिताः,सा मां पातु सरस्वती देवी, या निशेष जाड़यापहा !!शिशिर की शीत निशा से अवगुंठित मन-प्राण को नवजीवन का सन्देश
 
करण समस्तीपुरी
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श्रद्धा की मधुशाला

हरिवंश राय बच्चन -- एक मतवाला कवि, जिसने हिंदी साहित्य के सर्वाधिक समृद्ध काल-खंड छायावाद में भी सभी वाद से इतर अपनी राह बनायी... ! उसी राह पर बनाई मधुशाला... और पता नहीं कितनी पीढ़ियों को पकड़ाया काव्यामृत का प्याला.... ! जन-मन में रमने वाला एक ऐसा कवि
 
करण समस्तीपुरी
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धर्म का काम सामाजिक नियमों का निर्माण करना नहीं है- विवेकानंद

विवेकानन्द उवाच-विवेकानंद जयन्ती 12 जनवरी पर...............‘‘धर्म का काम सामाजिक नियमों का निर्माण करना नहीं है। सामाजिक नियम आर्थिक परिस्थितियों से उत्पन्न हुए हैं। धर्म की यह भयानक भूल थी कि उसने सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप किया । यह सत्य है कि हम
 
दृष्टिकोण
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नव वर्ष मंगलमय हो !

-- परशुराम राय।। नव वर्ष मंगलमय हो ।।ये त्रिसप्ताः परियन्ति विश्वा रूपाणि बिभ्रतः।वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वो अद्य दधातु मे (नः) ।। आज नव वर्ष 2010 के प्रथम प्रभात पर मैं अथर्ववेद के प्रथम मंत्र से जगत के लिए तापत्रय रहित सुख-समृद्धि की कामना करता हूँ। इस
 
करण समस्तीपुरी
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आ गया है साल नूतन

मित्रों आज चौपाल का दिन है! किन्तु नव वर्ष के स्वागत में चौपाल का ये सर्व सम्मत निर्णय है कि हम सब मिल कर नव वर्ष के अभिनन्दन में दिल खोल दें ! तो आज से हम शुरू कर रहे हैं नव-वर्ष 2010 की अगवानी जो चलेगी आगामी कुछ दिनों तक ! लीजिये नए साल की पहली सलामी
 
करण समस्तीपुरी
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फुस्स हुआ तीन करोड़ का बम....

तो आखिरकार बच गई सरकार। दिन भर का हंगामा थमा तो मिठाइयां बांटने और पटाखे फोड़ने का मौका मनमोहन सरकार बचाने में जुटे लोगों को ही मिला। हलांकि दोपहर बाद संसद के भीतर तीन करोड़ का नोट बम फोड़ने की बीजेपी ने नाकाम कोशिश जरूर की। एक करोड़ रुपये के नोटों क
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बच्चे को जन्म दो निकिता...

लिखने को जिसने मजबूर किया वो है प्रियदर्शन की एक कविता....) मुंबई की निकिता को अपने पहले बच्चे की मां बनना ही होगा...। बॉम्बे हाईकोर्ट ने निकिता को 24 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने की इजाजत आखिरकार नहीं दी। अदालत के फैसले के मुताबिक अगर निकिता के ग
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गुरु, हो जाओ शुरू

चुटकी---- शिबू सोरेन अब हो जाओ शुरू जी, भाजपा ने भी मान लिया अब तो आपको गुरु जी।
 
नारदमुनि
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आशाओं की आबादी खुशियों की दुनिया

साभार,मानव आजकल उसका नाम आशा है लेकिन उसकी कोई भी आशा पूरी न हो सकी, सिवाय इसके कि वह अपने बाऊ जी और खानदान की आशाओं की टोकरी बनकर रह गयी। आज वह घर का चूल्हा-चैका कर लेती है, दो बच्चे पैदा कर लिये हैं, उनका पालन और पोषण कर लेती है। जिन्दगी की इस जमा
 
पनिहारन
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जो हम पर गुजरी है...किसी दूसरे पर न गुजरे

बचपन की कई यादें जब विश्लेषण के दौर से गुजरती हैं,तो बहुत कुछ बोल जाती है। कारण कि मैं बचपन में बहुत डरने वाला और लोगों से दूर भागने वाला बच्चा था। जिसका असर अभी भी महसूस करता हूँ। मैं इसके कई कारण देखता हूँ। पहला,सबसे छोटा था तो सभी का दुलारा हो गया
 
पनिहारन
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निजी क्षेत्र से करप्सन

हिन्दूस्तान में निजीकरण के कारण करप्सन को बढ़ावा मिला है। इस बात में कितना दम है यह हमें आपके विचारों से पता चलेगा। इस सब्जेक्ट पर यहाँ एक बड़ी वाद-विवाद प्रतियोगिता है। आपके विचार हमारा मार्ग दर्शन करेंगे।
 
नारदमुनि
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दिल्ली का बादाम प्रसंस्करण उद्योग ठप्प,बादाम मज़दूरों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी

दिसम्बर, दिल्ली। करावलनगर के बादाम मज़दूर यूनियन के गिरफ्तार नेताओं आशीष कुमार सिंह, कुणाल जैन और प्रेमप्रकाश यादव शनिवार को जमानत पर रिहा हो गए. 17 दिसम्बर की सुबह बादाम के गोदाम मालिकों और उनके गुण्डों ने महिला मज़दूरों पर और यूनियन के सदस्यों पर लाठ
 
पनिहारन
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प्रतिरोध का बिंब : तीसरा अयोध्या फिल्म उत्सव

साभार नई पीढ़ी ♦ विजय प्रताप शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान की शहादत पर केंद्रित तीसरा अयोध्या फिल्म उत्सव 19 से 21 दिसंबर 2009 के बीच फैज़ाबाद में शुरू होने जा रहा है। नब्बे के दशक में सांप्रदायिकता की प्रयोगशाला के रूप में उभरा राम मंद
 
पनिहारन
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खबर,मज़बूरी,व्यवसाय या लल्ला चप्पी

आज राजेश यादव का जन्मदिन। राजेश यादव हैं अजमेर के जिला कलेक्टर। लोग दे रहें हैं शुभकामनायें।" ये किसी एस एम एस का हिस्सा नहीं है। किसी छोटे,बड़े अख़बार में भी ये प्रकाशित नहीं हुआ। ये पंक्तियाँ एक टीवी न्यूज़ चैनल पर थीं। आज दोपहर को ई टीवी राजस्थान
 
नारदमुनि
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पृथ्वी के सर्वनाश को कतई नहीं रोका जा सकता, यदि

कोपेनहेगन में पर्यावरण की चिंता को लेकर दुनिया भर के लोग इकट्ठे हुए हैं और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से होने वाले नुकसान और उससे बचाव के रास्ते खोजने की मशक्कत करने वाले हैं। इरादा तो बेहद नेक है मगर इस जमावड़े के गर्भ से कई बातों की एक बात निकलती
 
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ये तो होना ही है

मुस्लिम भी हो सकता है प्रधानमंत्री। " ये इस देश के "युवराज" राहुल गाँधी ने कहा है। जो युवराज के मुहँ से निकल गया, उसे सच्च होने में कितना समय लगेगा। कुछ दिन बाद वे ये कहते हुए दिखें कि हिंदुस्तान अब इस्लामिक देश कहलायेगा। हो सकता है, क्यों नहीं हो सक
 
नारदमुनि
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वेश्यावृति त्यागने वाली युवतियों से शादी

डेरा सच्चा सौदा [सिरसा,हरियाणा]के संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा द्वारा वेश्यावृति त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने वाली युवतियों के कल्याण के लिए चलाई गई मुहिम में १०११ युवक वेश्यावृति त्यागने वाली युवतियों से शादी करने को तैयार हैं। इन युवत
 
नारदमुनि
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मंदिर-मस्ज़िद के बहाने क़त्लेआम का जवाब लो

आज 6 दिसम्बर है, बाबरी मस्ज़िद के ध्वंस की १७ वी वर्षगांठ। आज ही के दिन कुछ धार्मिक उन्मादियों ने अयोध्या में बाबरी मस्ज़िद को ढहाकर देश में हिन्दु-मुस्लिम नफरत के एक और अध्याय की शुरूआत की थी। हिन्दुओं ने पाँच हज़ार वर्ष पूर्व के एक राजघराने के राजा रा
 
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एक तारीख या और कुछ

दिसम्बर,1992, 17 साल पहले की इस तारीख ने जो कुछ देखा,उसने धर्मनिरपेक्ष भारत के भविष्य को उलझनों का शिकार बना दिया। आजादी के बाद हुए तमाम राजनैतिक-आर्थिक-सामाजिक बदलावों,यहां तक की इमरजेंसी ने भी देश की राजनीति को इतना गहरा नुकसान नहीं पहुंचाया था। क्
 
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फ़िर पुरानी बात,पुराने घाव

भोपाल गैस कांड की त्रासदी को २५ साल हो गए। इतने समय में एक पीढ़ी जवान हो गई।किंतु मुद्दे की गर्मी वैसी वैसी की वैसी ही है।पता नहीं कब इस त्रासदी को हिंदुस्तान भुला पायेगा।हर साल वह भयावह रात याद आ जाती है जब लोग नींद में ही इस दुनिया को छोड़ गए।मीडिया
 
नारदमुनि
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नीयत ख़राब थी

चुटकी---- मधु कोड़ा बेहिसाब जोड़ा, नीयत ख़राब थी इसलिए यह भी लगा थोड़ा।
 
नारदमुनि
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मजबूर जी कहते हैं

तू है तो तेरा फ़िक्र क्या तू नहीं तो तेरा ज़िक्र क्या। ------ सीधे आए थे मेरी जां,औन्धे जाना कुछ घड़ी दीदार और कर लूँ। ---- ये कहना है श्री रवीन्द्र कृष्ण मजबूर का।
 
नारदमुनि
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नारदमुनि जी

चुटकी---- लिब्रहान आयोग की जाँच, डोंट वरी किसी पर भी नहीं आएगी आंच।
 
नारदमुनि
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कहाँ गए मोटे अनाज

साभार-प्रायोगिक चिट्ठा आईआईएमसी शशांक राय एक समय था जब भारत की कृषि –उत्पादन प्रणाली में काफी विविधता देखने को मिलती थी। गेहूं, चावल, जौ, राई, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती थी। अब यह स्थिति यह है कि आजादी के बाद बदली कृषि-नीत
 
पनिहारन