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कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,तुम कह देना कोई ख़ास नहीं.एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,एक झूठ है आधा सच्चा सा.एक झूठ है आधा सच्चा सा.जज़्बात को ढके एक पर्दा बस,जज़्बात को ढके एक पर्दा बस,एक बहाना है अच्छा अच्छा सा.एक बहाना है अच्छा
 
acharyakeshav
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याद आ रही है

याद आ रही है उन दिनों की जिन्हें गुजरे अरसा हो गया।अब तो लगता है कि मानो बात पिछले जनम की हों.कुछ धुंधली  सी यादें है जिन्हें दिल के किसी कोने में छिपा रखा है।कभी तन्हाई में तो कभी भीड़ में टटोल लेते है उस धुंद को,तो दिख जातें है बचपन
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