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एक साथ तुम्हारा पाने को
मैं छोड़ के सारे बन्धन को, और तोड़ के सारी कसमों को, दिल हाथ में लेकर आई थी , एक साथ तुम्हारा पाने को। ना ये देखा , ना वो सोचा, ना इसकी सुनी, ना उससे कहा, मैं सब कुछ भूल के आई थी, एक साथ तुम्हारा पाने को। बाबुल की पुकार है कानों में, मेरी माँ की आंहे स
Dec 29 2009 11:55 AM



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